हिमाचली खबर: नई दिल्ली के मालवीय नगर एरिया में एक रेस्तरां में अचानक लगी आग से 21 लोगों की जानें चली गईं. कई लोग अस्पतालों में जीवन से संघर्ष कर रहे हैं. असल में इस रेस्तरां के ऊपरी मंजिल पर लॉज भी चलता था. हादसे के बाद सब चिंतित हैं. जांचपड़ताल के प्रयास भी दिखाई दे रहे हैं. उपराज्यपाल तक ने बैठक करके समुचित निर्देश दिए हैं. पर, सवाल फिर खड़ा हुआ है कि आखिर कई मंजिल और दर्जनों कमरों के मकान में एग्जिट एक ही क्यों था? इसके लिए जिम्मेदार कौन है? आइए, मालवीयनगर के दुखद हादसे के बहाने जानते हैं कि देश में फायर डिपार्टमेंट से एनओसी कैसे मिलती है? किन शर्तों को पूरा करने के बाद व्यक्ति या संस्थाएं अनुमति पाती हैं?

दिल्ली का मालवीय नगर हो या मुंबई का कोई व्यस्त इलाका. जब भी कहीं आग लगने की खबर आती है, एक सवाल उठता है. क्या इमारत और दुकान में फायर सेफ्टी के सारे इंतजाम थे? क्या फायर डिपार्टमेंट से NOC ली गई थी? यानी फायर विभाग की सहमति जगह के इस्तेमाल के लिए थी. असल में यह मामला फायर डिपार्टमेंट से ज्यादा खुद की जागरूकता से जुड़ता है. लोग जागरूक हों तो हादसे कम होंगे. कागजी एनओसी से ज्यादा जरूरी है हम खुद जागरूक हों. फायर सेफ़्टी के सभी जरूरी उपाय केवल कागज में न करें बल्कि वास्तव में भी करें. इनकी समयसमय जांचपड़ताल भी करतेकराते रहें.
एनओसी क्यों जरूरी है?
एनओसी मतलब नो ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट, एक कागज का टुकड़ा भर नहीं है. यह आपकी जगह के फायर रिस्क को कम करने का तरीका है. यह लोगों की जान बचाने से जुड़ा विषय है. कई जगहों पर एनओसी के बिना लाइसेंस, ट्रेड परमिट, ओसी या इंश्योरेंस में दिक्कत आती है. कुछ मामलों में सीलिंग और जुर्माना भी हो सकता है.
मालवीय नगर अग्निकांड
दिल्ली और मुंबई में नियम किस पर लागू होते हैं?
हर छोटा घर हमेशा एनओसी के दायरे में नहीं आता, पर कई तरह की जगहों पर यह जरूरी हो जाती है.इसमें मॉल, शोरूम, होटल, रेस्टोरेंट, बैंक, ऑफिस, स्कूल, कोचिंग, हॉस्टल, अस्पताल, क्लिनिक, फैक्ट्री, गोदाम, वर्कशॉप, सोसायटी, हाईराइज बिल्डिंग, बेसमेंट वाले परिसर, सिनेमा, हॉल, इवेंट वेन्यू आदि शामिल हैं. कुछ नियम अलगअलग राज्योंशहरों में अलगअलग हो सकते हैं लेकिन उद्देश्य आमजन की सुरक्षा ही है. इसके लिए स्थानीय फायर विभाग के नियमकानून लागू होते हैं.
एनओसी के प्रकार: प्री और फाइनल
अक्सर एनओसी दो चरणों में दी जाती है.
- प्रोविजनल / फायर क्लीयरेंस: यह नई बिल्डिंग के प्लान स्टेज पर मिलती है. मतलब प्लान में फायर व्यवस्था सही दिख रही है.
- फाइनल /ऑक्यूपेंसी से पहले एनओसी: यह तब मिलती है जब साइट पर काम पूरा हो जाए. तब फायर विभाग मौके पर जांचपड़ताल करता है. सब कुछ दुरुस्त पाए जाने पर एनओसी देने का नियम है.
घटनास्थल की तस्वीर. फोटो: PTI
सबसे पहले क्या तय करें?
आवेदन से पहले कुछ बातें साफ कर लें. आपकी जगह का उपयोग क्या है? बिल्डिंग की ऊंचाई और एरिया कितना है? बेसमेंट है या नहीं? लोगों की अनुमानित संख्या कितनी रहने वाली है? इन्हीं चीजों के आधार पर तय होता है कि कौनकौन से फायर सिस्टम लगाए जाने हैं.
एनओसी पाने की सामान्य प्रक्रिया क्या है?
प्रक्रिया शहर के हिसाब से कुछ अलगअलग हो सकती है. पर, स्टेप लगभग एक जैसे हैं. चाहे दिल्ली हो, मुंबई हो या कोई और शहर.
1 ड्रॉइंग और फायर प्लान बनवाना: आर्किटेक्ट या इंजीनियर से बिल्डिंग प्लान तैयार कराएं. जहां जरूरी हो, फायर कंसल्टेंट से फायर लेआउट बनवाएं. इसमें निकास, सीढ़ियां, हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर, अलार्म सब दिखता है.
2 आवेदन जमा करना: फायर डिपार्टमेंट के ऑनलाइन या ऑफलाइन, जो भी सिस्टम लागू हो, आवेदन करना होता है. कई जगह फीस भी लगती है. आपको रेफरेंस नंबर मिलता है, जिसके आधार पर आगे ट्रैक करना आसान होता है.
3 दस्तावेज़ और ड्रॉइंग की जांच: फायर विभाग प्लान देखता है. कमियां हों तो ऑब्जेक्शन कर देता है. फिर सुधार करके दोबारा जमा करने की व्यवस्था लागू है.
4 साइट निरीक्षण: इंस्पेक्शन टीम मौके पर आती है. यह टीम देखती है कि प्लान के मुताबिक सारे उपकरण लगे हैं या नहीं? वे टेस्ट भी कराते हैं. कई बार पंप चलाकर, अलार्म बजाकर, स्प्रिंकलर लाइन प्रेशर देखकर भी जांच की व्यवस्था है.
5 एनओसी जारी होगी या रिजेक्ट: सब ठीक पाया गया तो एनओसी मिल जाती है. कमियां हों तो रिपोर्ट मिलती है. फिर सुधार करके रीइंस्पेक्शन की व्यवस्था है.
घटनास्थल की तस्वीर. फोटो: PTI
कौनकौन से दस्तावेज़ लगते हैं?
शहर और केस के अनुसार लिस्ट बदल सकती है. पर, सामान्य तौर पर निम्नवत दस्तावेज मांगे जाते हैं. ओनरशिप, लीज या अथॉरिटी लेटर
- साइट प्लान और बिल्डिंग प्लान
- यूज़ डिटेल यानी किस काम के लिए जगह तय है.
- कंप्लीशन या ऑक्यूपेंसी से जुड़े कागज
- फायर सिस्टम की डिटेल और स्पेसिफिकेशन
- पंप, टैंक, पाइपलाइन का लेआउट
- इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, अर्थिंग से जुड़ी रिपोर्ट
- लिफ्ट, डीजी, किचन जैसी सर्विस एरिया की डिटेल, जहां लागू हो
- कई मामलों में मेंटीनेंस या एनुअल मेंटीनेंस के कागज
क्या होती है फायर एनओसी की मुख्य शर्तें?
- सुरक्षित निकास: पर्याप्त निकास होने चाहिए. निकास का रास्ता खुला रहे. दरवाजे बाहर की तरफ खुलें. रास्ते में सामान न रखा जाए.
- सीढ़ियां और फायर एस्केप: सीढ़ियों की चौड़ाई मानक के अनुसार हो. सीढ़ियों में स्टोरेज न बने. फायर डोर और डोरक्लोजर कई जगह जरूरी होते हैं.
- फायर अलार्म और डिटेक्शन: स्मोक, हीट डिटेक्टर जरूरी जगहों पर लगे हों. मैनुअल कॉल पॉइंट और हॉर्न सिस्टम लगे हों. पैनल काम करता हो.
- स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, होज़ रील: जहां जरूरी हो, स्प्रिंकलर नेटवर्क सही दबाव पर हो. हाइड्रेंट, होस रील आसानी से पहुंचे. नोजल, होस पाइप, वाल्व सही हालत में हों.
- पानी की व्यवस्था और पंप: अंडरग्राउंड, ओवरहेड फायर टैंक निर्धारित क्षमता के हों. मेन पंप, जॉकी पंप, स्टैंडबाय पंप की टेस्टिंग हो. पंप रूम में एक्सेस बना रहे.
- इमरजेंसी लाइट और साइन बोर्ड: बिजली जाने पर इमरजेंसी लाइट चले. एग्जिट साइन साफ दिखें. रास्ता स्पष्ट समझ में आए.
- बेसमेंट और पार्किंग नियम: बेसमेंट में वेंटिलेशन और स्मोक मैनेजमेंट जरूरी हो सकता है. बेसमेंट का गलत इस्तेमाल बड़ी गलती है. पार्किंग एरिया में ज्वलनशील स्टोरेज न हो.
- किचन, गैस और रेस्टोरेंट सेफ्टी: कमर्शियल किचन में डक्ट, चिमनी की सफाई नियमित हो. एलपीजी बैंक सुरक्षित जगह और मानक दूरी पर हो. फायर एक्सटिंग्विशर सही प्रकार के हों. इनकी नियमित जांच हो.
At least 10 people were killed after a major fire broke out at a restaurant in Malviya Nagar, New Delhi, India. Officials says. pic.twitter.com/LyeUUb1S1a
— Weather Monitor June 3, 2026
सबसे आम गलतियां, जिनसे एनओसी अटकती है
निकास पर ताला या अवरोध, सीढ़ियों में सामान रखना, फायर पंप खराब या बंद, अलार्म सिस्टम डमी या डिस्कनेक्ट, बेसमेंट में स्टोर, किचन या वर्कशॉप चलाना, नक्शे में दिखाया लेकिन साइट पर उपकरण नहीं लगाया, एएमसी, मेंटीनेंस रिकॉर्ड नहीं रखने पर एनओसी न देने का प्रावधान है.
एनओसी मिलने के बाद जिम्मेदारी खत्म नहीं होती
एनओसी मिलना शुरुआत है. असली काम रोज़ की मेंटीनेंस है. हर महीने बेसिक टेस्ट करें. हर तिमाही, छमाही प्रोफेशनल सर्विसिंग करवाएं. रिकॉर्ड लिखित में रखें. स्टाफ बदलता है तो ट्रेनिंग फिर कराएं. कई जगह एनओसी की वैधता अवधि होती है. ऐसे में समय पर रिन्यूअल भी जरूरी हो सकता है.
मालवीय नगर हो या कोई और मोहल्ला या शहर. हादसों में पैटर्न एक जैसा दिखता है. भीड़, संकरी गलियां, बंद निकास, और खराब मेंटीनेंस. कभीकभी छोटे शॉर्ट सर्किट भी बड़ा नुकसान कर देते हैं. इसलिए पेपर कंप्लायंस के साथ ही ग्राउंड पर भी कंप्लायंस जरूरी है. एनओसी उसी का एक औजार है.
एनओसी को बोझ नहीं, सुरक्षा मानें
दिल्ली हो या मुंबई, एनओसी का लक्ष्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है. और आग को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है. आप जितनी जल्दी योजना बनाकर सिस्टम लगाते हैं, उतना कम खर्च आता है. और जोखिम भी घटता है.
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