हिमाचली खबर: राहत इंदौरी उर्दू शायरी और महफ़िलों की दुनिया का एक ऐसा चमकता हुआ सितारा थे, जिन्होंने कविता को सिर्फ़ मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे आम जनता की आवाज़ बना दिया। उनकी शायरी में जो बेबाकी, तेवर और रूमानियत थी, उसने हर पीढ़ी के दिल को छुआ। राहत साहब अपनी शायरी को जिस अंदाज़, बुलंद आवाज़ और सलीके से मंच पर पढ़ते थे, वह अद्वितीय था। वे साजिक मुद्दों, राजनीति और समाज की विसंगतियों पर सीधा और करारा प्रहार करते थे। उनकी शायरी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। ऐसे में हम राहत इंदौरी साहब के मशहूर शेर लेकर आए हैं। यहां पढ़ें राहत साहब के मशहूर शेर।

1.सोए रहते हैं ओढ़ कर ख़ुद को
अब ज़रूरत नहीं रज़ाई की
2. अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है
उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते
3. मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूं
यहां हमदर्द हैं दोचार मेरे
4. तुझ से मिलने की तमन्ना भी बहुत है लेकिन
आने जाने में किराया भी बहुत लगता है
5. अब इतनी सारी शबों का हिसाब कौन रखे
बड़े सवाब कमाए गए जवानी में
6. आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में
कूच का ऐलान होने को है तय्यारी रखो
7. जानमाज़ों की तरह नूर में उज्लाई सहर
रात भर जैसे फ़रिश्तों ने इबादत की है
8. हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते
9. रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है
10. वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया
11. बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूं पिला देनी चाहिए
12. सूरज सितारे चांद मिरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मिरे हाथ में रहे
13. बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं
14. घर के बाहर ढूंढता रहता हूं दुनिया
घर के अंदर दुनियादारी रहती है
15. चराग़ों का घराना चल रहा है
हवा से दोस्ताना चल रहा है


