दिल्लीएनसीआर में घर खरीदने वाले लोगों के लिए लोकेशन सबसे बड़ा आकर्षण होती है. मेट्रो कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे और बड़े रिहायशी प्रोजेक्ट्स के आसपास फ्लैट खरीदना आम तौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन नोएडा में कुछ ऐसे इलाके हैं जहां शानदार लोकेशन होने के बावजूद फ्लैट या प्लॉट खरीदना भारी नुकसान का सौदा साबित हो सकता है. नोएडा अथॉरिटी ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे भंगेल, सलारपुर, हाजीपुर और आसपास के कुछ क्षेत्रों में बिना मंजूरी वाले प्रोजेक्ट्स में निवेश न करें. अथॉरिटी का कहना है कि यहां अवैध निर्माण हो रहे हैं और भविष्य में इन संपत्तियों को लेकर कानूनी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं.

नोएडा अथॉरिटी ने सेक्टर77 के अंतर्गत आने वाले सलारपुर, भंगेल और हाजीपुर गांवों के कई खसरा नंबरों में स्थित प्लॉट और फ्लैट की खरीदफरोख्त पर रोक लगाने की चेतावनी जारी की है. अथॉरिटी के मुताबिक इन इलाकों में बिना स्वीकृत नक्शों के आधार पर इमारतों का निर्माण किया जा रहा है. मंगलवार शाम जारी नोटिस में नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कृष्णा करुणेश ने कहा कि कुछ लोगों, जमीन माफिया और अतिक्रमण करने वालों की ओर से नोएडा अथॉरिटी की जमीन पर अवैध निर्माण और कब्जा किया जा रहा है. यह जमीन सलारपुर, भंगेल और हाजीपुर गांवों में स्थित है और इसे पहले ही नोटिफाई, अधिग्रहित या पट्टे पर लिया जा चुका है. उन्होंने कहा कि अथॉरिटी समयसमय पर ऐसे अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने और सील करने की कार्रवाई करती रही है.
कितने खसरा नंबर हैं फर्जी
अधिकारियों के मुताबिक अथॉरिटी ने 700 से 800 के बीच के नंबरों वाले कम से कम 100 खसरा नंबरों की पहचान की है, जिन पर लोगों को निवेश न करने की सलाह दी गई है. अधिकारियों ने बताया कि ये खसरा नंबर सेक्टर107 के पीछे स्थित हैं. यह इलाका कई बड़े और वैध ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के नजदीक है, जिसकी वजह से यहां प्रॉपर्टी खरीदने के इच्छुक लोगों के भ्रमित होने की आशंका ज्यादा रहती है.
अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि इन जमीनों की खरीदफरोख्त को लेकर प्रवर्तन निदेशालय भी जांच कर रहा है. यह जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू की गई है. ऐसे में इन प्रॉपर्टीज में निवेश करने वाले लोगों को भविष्य में कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
अवैध कॉलोनियों को नहीं मिलेंगी सुविधाएं
नोएडा अथॉरिटी ने साफ कहा है कि चिन्हित खसरा नंबरों पर बनी अवैध कॉलोनियों और प्रोजेक्ट्स को बिजली, पानी, सीवर, सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी. अथॉरिटी का कहना है कि अतिक्रमण करने वालों और अवैध निर्माण कराने वालों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं. इसके अलावा संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराकर एफआईआर कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है.
इस कार्रवाई के बीच कई स्थानीय निवासियों ने सवाल उठाया है कि यदि निर्माण अवैध थे तो इन्हें बनने से पहले क्यों नहीं रोका गया. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश आर्किटेक्चर एसोसिएशन के नोएडा चैप्टर के अध्यक्ष अतुल कुमार गुप्ता ने कहा कि नोएडा के शहरी गांवों जैसे भंगेल, सलारपुर, बरोला, अट्टा, निठारी, छजारसी, खोड़ा, मामूरा, छलेरा और बरौला में बड़ी संख्या में अनधिकृत सोसायटियां बन चुकी हैं. अगर यहां आग जैसी कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए तो फायर टेंडर तक अंदर नहीं पहुंच पाएंगे. उन्होंने कहा कि बिना योजना और सुरक्षा मानकों के बनाए गए ऐसे प्रोजेक्ट्स भविष्य में लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं.
कुला मिलाकर, अगर आप अपने सपनों का आशियाना नोएडा में बनाना चाहते हैं तो आपको अथॉरिटी की बातों को गांठ बांध लेना है. आपको किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले उसकी जमीन का रिकॉर्ड, खसरा नंबर, स्वीकृत नक्शा और संबंधित अथॉरिटी से मंजूरी की स्थिति जरूर जांच लेनी चाहिए. केवल अच्छी लोकेशन या कम कीमत देखकर निवेश करना बाद में बड़े आर्थिक नुकसान और कानूनी विवाद का कारण बन सकता है.



