
देश में तेल आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में तय समय से पहले ही सभी पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल उपलब्ध करा दिया था। बता दें कि E20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार का दावा है कि इस ऐतिहासिक कदम से विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत होगी और गन्ना किसानों को भी सीधा फायदा मिलेगा। लेकिन अब सड़क पर गाड़ियां दौड़ाने वाले कई वाहन चालकों की शिकायतें इस नीति पर एक नई बहस छेड़ रही हैं।
क्या है E20 पेट्रोल और क्यों किया गया इसे लागू?
भारत लंबे समय से कच्चे तेल के आयात पर भारी खर्च कर रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ता है। इसी भारी-भरकम खर्च को कम करने के लिए सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की रफ्तार को काफी तेज किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्के और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का साफ मानना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से न केवल विदेशी तेल पर हमारी निर्भरता कम होगी, बल्कि देश के अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाने में भी बड़ी मदद मिलेगी। यही वजह है कि देश भर में E20 ईंधन को बहुत तेजी से लागू किया जा रहा है।
माइलेज में भारी गिरावट और इंजन की शिकायतें
E20 पेट्रोल के पूरी तरह लागू होने के बाद अब कई वाहन मालिकों ने माइलेज अचानक घटने की गंभीर शिकायत की है। सोशल मीडिया से लेकर मैकेनिक की दुकानों तक, कुछ ड्राइवरों का तो यहां तक दावा है कि उनके वाहनों में 20% से लेकर 30% तक कम माइलेज देखने को मिल रहा है। इसके अलावा, कई लोग स्पार्क प्लग के जल्दी खराब होने और इंजन पर अतिरिक्त दबाव जैसी तकनीकी समस्याओं को लेकर भी लगातार शिकायतें कर रहे हैं।
दूसरी ओर, अगर सरकारी अनुमानों की बात करें तो E20 के अनुकूल (Compliant) बनाए गए नए वाहनों में माइलेज पर असर केवल 2% से 6% तक ही होना चाहिए। इस विरोधाभास को लेकर ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने वाहनों में यह असर अपेक्षाकृत बहुत अधिक महसूस हो सकता है, क्योंकि उन गाड़ियों को तकनीकी रूप से E20 ईंधन के लिए विशेष रूप से डिजाइन नहीं किया गया था।
इसी बीच ऑटो जगत से एक और बड़ी खबर आ रही है कि टीवीएस कंपनी प्रीमियम बाइक खरीदारों के लिए ‘TVS Paddock’ खोलने की तैयारी में है, जहां अब ग्राहकों को शोरूम के अंदर ही बिल्कुल लग्जरी एक्सपीरियंस मिलने वाला है।
क्या अब E85 और E100 की ओर बढ़ रहा है भारत?
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से वैकल्पिक और पर्यावरण के अनुकूल ईंधनों के सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। वे भविष्य में E85 और E100 जैसे बेहद उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों को भी बढ़ावा देने की बात कई बार कह चुके हैं। हालांकि, इस नीति के आलोचकों का कहना है कि इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले आम यूजर्स को अपनी मर्जी का विकल्प दिया जाना चाहिए। यही वजह है कि कुछ संगठन और आम लोग पेट्रोल पंपों पर नॉर्मल पेट्रोल और E20 पेट्रोल दोनों के अलग-अलग विकल्प उपलब्ध कराने की मांग लगातार उठा रहे हैं।
आखिर आगे क्या होगा समाधान?
देखा जाए तो E20 ईंधन नीति भारत के ऊर्जा क्षेत्र के सुरक्षित भविष्य का एक बेहद अहम हिस्सा मानी जा रही है, लेकिन इसकी अंतिम सफलता काफी हद तक आम जनता और यूजर्स के जमीनी अनुभव पर ही निर्भर करती है। ऐसे में अगर आने वाले दिनों में माइलेज में कमी और वाहनों के खराब प्रदर्शन को लेकर शिकायतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो निश्चित रूप से सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों को मिलकर जल्द ही कोई नया और ठोस समाधान तलाशना पड़ सकता है।




