टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए आयकर विभाग ने एक सख्त कदम उठाया है. विभाग ने टैक्सपेयर्स के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट का दायरा पहले से काफी ज्यादा बढ़ा दिया है. अब तक जो वित्तीय लेनदेन विभाग की नजरों से बच जाते थे, वे सब अब AIS के रडार पर होंगे. विभाग ने इसमें गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स रिटर्न, बैंकिंग चैनल के बाहर किए गए विदेशी निवेश से लेकर ऑफमार्केट शेयर सौदों तक को शामिल कर लिया है. ये नया बदलाव सीधे तौर पर उन लोगों के लिए है जो अपनी आय या निवेश की पूरी जानकारी छिपाने की कोशिश करते हैं.

दायरा बढ़ने से कसेगी नकेल

आयकर विभाग की ओर से जुटाए जा रहे इस बड़े डेटाबेस से टैक्सपेयर्स की आय का सही मिलान करना आसान हो जाएगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इसके लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया है. इसके तहत इनकम टैक्स के महानिदेशक को ये अधिकार दिया गया है कि वे जानकारी मिलने वाले महीने के अंत से तीन महीने के भीतर उसे पोर्टल पर अपलोड कर दें. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, डेटाबेस बढ़ने से टैक्स रिटर्न में दी गई जानकारी का दूसरी जगह से मिलान करना मजबूत होगा. इससे टैक्स जांच के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी को आसानी से पकड़ा जा सकेगा.

विदेशी निवेश पर रहेगी पैनी नजर

अब तक बैंकिंग चैनल के जरिए होने वाले सामान्य लेनदेन की जानकारी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स के जरिए विभाग को मिल जाती थी. लेकिन, कई बार लोग ब्रोकर या विदेशी एजेंट के जरिए विदेश के डेरिवेटिव मार्केट या अनलिस्टेड कंपनियों में पैसा लगाते थे. ये निवेश अक्सर टैक्स के दायरे से बाहर रह जाते थे. लेकिन अब ये अतिरिक्त जानकारी भी AIS का हिस्सा बनेगी. इससे विदेशी जमीन पर किए गए गुप्त निवेश को पकड़ना मुमकिन हो जाएगा.

दूसरे का ITR भी बन सकता है सबूत

इस नए बदलाव की सबसे खास बात ये है कि अब किसी एक टैक्सपेयर के इनकम टैक्स रिटर्न में दी गई प्रासंगिक जानकारी दूसरे टैक्सपेयर के AIS में भी दिख सकती है. इससे एक व्यक्ति की जानकारी दूसरे की जांच का आधार बन जाएगी. इसके अलावा, पहले GST का डेटा केवल स्क्रूटनी वाले मामलों में ही इस्तेमाल होता था. लेकिन अब ये सीधा AIS में दिखेगा. इससे टैक्सपेयर्स को अपनी सही आय बताने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. वहीं निवेशकों के लिए, डिपॉजिटरी या रजिस्ट्रार की तरफ से रिपोर्ट किए गए ऑफमार्केट सौदे भी AIS में दर्ज होंगे.

गलत जानकारी दिखने पर क्या करें

अगर किसी टैक्सपेयर को लगता है कि AIS में दी गई जानकारी गलत है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है. विभाग ने इसके लिए भी आसान विकल्प दिया है. टैक्सपेयर इनकम टैक्स पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए अपना AIS देख सकते हैं. अगर कोई एंट्री गलत या दो बार दर्ज है, तो वे अपना फीडबैक सबमिट कर सकते हैं. ये सुविधा ऑफलाइन यूटिलिटी के जरिए भी मौजूद है. अधिकारी का कहना है कि आने वाले समय में चंदा जैसी अन्य जानकारियां भी AIS में जुड़ेंगी. ये पूरी कवायद इसलिए की जा रही है ताकि टैक्सपेयर अपनी आय की सही रिपोर्टिंग करें.