वेनेजुएला में भूकंप ने भरी तबाही मचाई है. 10 हजार से अधिक लोगों के मारे जाने का अनुमान है. संख्या ज्यादा भी हो सकती है. सरकारी एजेंसियां नुकसान का आंकलन करने में जुटी हुई है. सही तस्वीर आने में कुछ दिन का वक्त लग सकता है. तबाही बड़ी है. में बड़ी संख्या में तेल के कुएं हैं. आशंका है कि नुकसान यहां भी हुआ है. जनहानि भी हो सकती है. आइए, इसी बहाने समझते हैं कि भूकंप से तेल के कुएं कितना प्रभावित होते हैं? इसे लेकर वैज्ञानिक दृष्टि क्या है?

भूकंप भूमि के अंदर ऊर्जा का अचानक मुक्त होना है. यह ऊर्जा तरंगों के रूप में सतह पर पहुंचती है. दो प्रमुख तरंगें होती हैं. पीतरंग और एसतरंग. सतह तरंगें जमीन पर लंबा और दूर तक कंपन पैदा करती हैं. यही कंपन इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाते हैं. चाहे, भवन हो, बहुमंजिली इमारतें, ऑफिस काम्प्लेक्स या फिर तेल के कुएं. नुकसान सभी को होता है.

क्या हैं पी और एस तरंग?

भूकंप के दौरान जमीन के अंदर से जो ऊर्जा निकलती है, वह तरंगों के रूप में चलती है. इनमें पीतरंग और एसतरंग सबसे महत्वपूर्ण हैं.

  • पीतरंग: इसे प्राइमरी तरंग कहते हैं क्योंकि यह भूकंप आने पर सबसे पहले पहुंचती है. यह तरंग किसी स्प्रिंग की तरह काम करती है. इसमें जमीन के कण आगेपीछे डोलते रहते हैं. यह सबसे तेज चलने वाली तरंग है. यह ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती है. तेल के कुओं के मामले में, यह तेल और पानी के अंदर से भी निकल जाती है. यह आमतौर पर एक हल्के झटके या धक्के के रूप में महसूस होती है.

    वेनेजुएला में भूकंप के बाद का हाल.

  • एसतरंग: इसे सेकंडरी तरंग कहते हैं क्योंकि यह पीतरंग के बाद दूसरे नंबर पर पहुंचती है. यह तरंग किसी लहर या रस्सी को हिलाने जैसी होती है. इसमें जमीन के कण ऊपरनीचे या दाएंबाएं लहराते हैं. यह पीतरंग से धीमी होती है. यह केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती है. यह तेल या पानी में गायब हो जाती है. लेकिन यह पीतरंग से ज्यादा विनाशकारी होती है क्योंकि यह जमीन को जोर से झकझोरती है, जिससे इमारतों और तेल के कुओं के पाइपों पर ज्यादा दबाव पड़ता है.

कुएं की संरचना और संवेदनशीलता

तेल का कुआं आमतौर पर तीन प्रमुख भागों से बनता है. सतही हेड और वेलहेड, स्टील केसिंग और सीमेंटिंग, भूमिगत लग्स और प्रोडक्शन जोन. भूकंप की वजह से किसी भी हिस्से में क्षति कुएँ की कार्यक्षमता और सुरक्षा पर असर डाल सकती है. संभव है कि वेनेजुएला के तेल कूपों पर भी नकारात्मक असर हुआ हो. इसका सही अंदाजा तब लग पाएगा, जब सुरक्षा एजेंसियां अपनी पड़ताल पूरी कर लेंगी. अभी सबका ध्यान सामने से दिखने वाली धनजन की हानि पर है.

भूकंपीय लहरों का सीधा प्रभाव

भूकंप की गतिशील लहरें कुएं पर सीधे बल लगाती हैं. यह बल दो तरह से काम करता है. अक्षीय और घुमावीय बल से केसिंग में मोड़ या टूटन पैदा हो सकता है. सतह कंपन से वेलहेड और पाइपलाइन के जॉइंट कमजोर हो सकते हैं या टूट भी सकते हैं. छोटी कंपन भी तबाही कर सकती है अगर कुआं पुराना या कमजोर बना हो.

कई तरह के अलगअलग खतरे

  • केसिंग का झुकना या टूटना: तेज कंपन से स्टील केसिंग में क्रैक्स आ सकते हैं. सीमेंट बॉन्ड टूट सकता है. इससे भूमिगत परतों के बीच संपर्क बदल सकता है.
  • सर्फेस टूटना और डिस्प्लेसमेंट: भूकंप से जमीन का फटना सीधे वेल स्ट्रक्चर को तोड़ सकता है. वेलहेड मिसअलाइन हो सकता है.
  • लिक्वीफैक्शन या मृदा द्रवीकरण: तेज कंपन से पानी से भरी रेतीली मिट्टी तरल जैसा व्यवहार कर सकती है. इससे कुएं का आधार धंस सकता है. केसिंग झुक सकती है.
  • पाइपलाइन और कनेक्शन में टूट: सतह पर लगी पाइप और अन्य हिस्से टूट सकते हैं. इससे रिसाव व आग का खतरा बढ़ जाता है.
  • प्रेशर शॉक और ब्लोआउट का जोखिम: यदि चिन्हित कनेक्शन या वेल कंट्रोल सिस्टम क्षतिग्रस्त हो जाए तो उच्च दबाव वाली फील्ड में ब्लोआउट हो सकता है. यह पर्यावरणीय आपदा बन सकती है.

भूमिगत प्रभाव और दाब परिवर्तन

भूकंप की स्थिति में जमीन के अंदर और बाहर कई तरह की स्थितियाँ बनती हैं. इंका असर प्रायः नुकसान के रूप में सामने आता है. दबाव से जल और तेल के प्रवाह मार्ग बदल सकते हैं. पोर दबाव अस्थायी रूप से बढ़ सकता है. तेल या गैस का अप्रत्याशित मार्ग परिवर्तन उत्पादन को प्रभावित कर सकता है. कुछ स्थितियों में भूकंप से रिसाव का खतरा बढ़ता है.

सांकेतिक तस्वीर.

भूकंपीयता और कुएं संचालन

तेल व गैस गतिविधियां खुद भूकंप को प्रेरित कर सकती हैं. ऐसा तब होता है जब बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन होता है. भूकंप की स्थिति में दाब बदलने से फॉल्ट सक्रिय हो जाते हैं. इसलिए भूकंपीय जोखिम और वेल ऑपरेशन के बीच तालमेल बेहद जरूरी है.

पर्यावरणीय और मानव सुरक्षा जोखिम

कुएं की विफलता से तेल और गैस का रिसाव हो सकता है. यह जमीन और जल स्रोतों को दूषित कर सकता है. आग और विस्फोट का खतरा भी रहता है. निकटवर्ती बस्तियों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.

मॉनिटरिंग और पूर्व चेतावनी यंत्र मददगार

पूर्व चेतावनी यंत्र एवं उनकि मॉनिटरिंग इसे मामले में सबसे सटीक हैं. कुछ उपकरण लगाकर काफी हद तक बचाव संभव है. जमीन कंपन मापक, झुकन मापक, दबाव और प्रवाह सेंसर तथा फाइबरऑप्टिक निगरानी जैसे उपकरण मददगार हो सकते हैं. ये उपकरण भूकंप के बाद त्वरित निरीक्षण और रियलटाइम चेतावनी में मदद करते हैं.

डिजाइन और रोकथाम के उपाय

  • सिस्मिकरेटेड वेलहेड और कनेक्शन: वेलहेड को ऐसे डिजाइन करें जो झटकों और घुमाव को सह सके.
  • लचीले कनेक्शन और विस्तार जोड़: पाइपलाइनों में फ्लेक्सिबल जॉइंट से टूटने का जोखिम कम होता है.
  • मजबूत केसिंग और बेहतर सीमेंट बॉन्डिंग: अच्छे केसिंग डिज़ाइन से भूमिगत परतों में बिखराव की आशंका रहती है.
  • ऑटोमैटिक शटइन सिस्टम: भूकंप के साथ ही वेल को बंद करने वाले वॉल्व रखें. इससे ब्लोआउट रोका जा सकता है.
  • ज़ोनआधारित जोखिम मूल्यांकन: भूकंपीय खतरे के मानचित्र बनाकर कुओँ की लोकेशन तय करना लाभकारी हो सकता है.

वेनेजुएला के भूकंप से उठे सवाल

वेनेजुएला में आए भूकंप ने कई प्रश्न उठाये हैं. कुछ मुख्य चिंताएं भी इनमें शामिल हैं. पुरानी फील्ड संरचनाएं कितनी सुरक्षित हैं? क्या निगरानी तंत्र पर्याप्त थे? क्या आपात प्रतिक्रिया योजनाएँ सक्रिय थीं? अस्थायी और दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभाव क्या होंगे? इन सवालों का जवाब वैज्ञानिक जांच, रिकॉर्डेड डेटा और फील्ड सर्वे से ही मिल पाएगा. और निश्चित इसमें वक्त लग सकता है. सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि वेनेजुएला में करीब 30 हजार से अधिक तेल कुएं हैं. इनमें करीब 85 सौ सक्रिय हैं. मतलब इनमें उत्पादन हो रहा है. इन कुंओं में करीब 90 हजार से अधिक लोग काम करते हैं.

सरल शब्दों में कहें तो भूकंप तेल के कुओं पर सीधा और असर डालते हैं. प्रभाव काफी हद तक कुएं की डिज़ाइन, भूकंपीय तीव्रता और स्थानीय मिट्टी की प्रकृति पर निर्भर करता है. तैयारी और आधुनिक निगरानी बहुत जरूरी है. नियमित ऑडिट और आपात योजना हर ऑपरेटर के लिए अनिवार्य होनी चाहिए. गरीबी, बदहाली से जूझ रहे वेनेजुएला में सब कुछ बेपटरी है, ऐसे में नियमित ऑडिट और आपात योजना पर काम के बारे में सोचना भी बेमानी है.