
आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर पत्तों का इस्तेमाल कई बीमारियों के इलाज और बचाव में किया जाता है। नीम के कड़वे गुण, सदाबहार के एंटी-डायबिटिक तत्व और शीशम की ठंडी तासीर जब इन तीनों पत्तों को मिलाकर चटनी बनाई जाती है, तो यह सेहत के लिए बेहद असरदार मानी जाती है। आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, यह चटनी न केवल डायबिटीज में फायदेमंद है, बल्कि पुरुषों में स्पर्म से जुड़ी समस्याओं और यूरिन से जुड़ी समस्याओं में भी असरदार मानी जाती है। अगर इन तीन औषधीय पत्तों की चटनी बनाकर खाई जाए तो ये शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करती है।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स के अनुसार, सदाबहार, नीम और शीशम के पत्तों की चटनी का नियमित व सही मात्रा में सेवन ब्लड शुगर कंट्रोल करने के साथ-साथ शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है। सदाबहार, नीम और शीशम के पत्ते मिलकर आपकी सेहत को दोगुना फायदा पहुंचा सकते हैं। जानिए फायदे और इसका सेवन करने का सही तरीका।
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नीम के पत्ते
आयुर्वेद में नीम को तिक्त (कड़वा), शीतल और रक्तशोधक यानी खून को साफ करने वाला माना जाता है। सदियों से नीम के पत्तों का इस्तेमाल कई तरह की स्किन की बीमारियों से जुड़ी औषधियों में किया जाता रहा है। इसके पत्तों का पारंपरिक रूप से इस्तेमाल खुजली और सूजन से जुड़ी समस्याओं का इलाज करने में किया जाता रहा है। नीम को शरीर की सफाई और स्किन हेल्थ के लिए रामबाण औषधि माना जाता है। आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी ने बताया एक कड़वा सा पत्ता अकेले आपकी बॉडी में पांच बीमारियों जैसे स्किन,लिवर, इम्यूनिटी,शुगर और इंफेक्शन पर काम कर सकता है। ये एक ऐसा मेडिसिनल प्लांट है जो एक साथ बैक्टीरिया, फंगस, वायरस,सूजन, ब्लड शुगर इम्बैलेंस, डैंड्रफ, मुहांसे और लिवर सबका सॉल्यूशन करता है। Also ReadClove Water Benefits: पाचन के लिए लौंग के पानी का सेवन कैसे करता है असर, डॉक्टर से जानिए फायदे और तरीका
सदाबहार के पत्ते
आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में सदाबहार (Periwinkle) का उल्लेख औषधीय पौधे के रूप में मिलता है। पारंपरिक रूप से इसके पत्तों का उपयोग शरीर में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए किया जाता रहा है। सदाबहार में विंका अल्कलॉइड्स जैसे सक्रिय औषधीय यौगिक पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसके पौधे का उपयोग आधुनिक चिकित्सा में भी खासतौर पर औषधीय यौगिकों के स्रोत के रूप में किया गया है।
शीशम के पत्ते
शीशम (Shisham) के पत्तों का भी पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी बताया गया है। आयुर्वेद के मुताबिक इनकी तासीर ठंडी होती है जो स्किन को ठंडक देती है। इनका सेवन करने से सूजन कंट्रोल रहती है और स्किन संबंधी परेशानियां भी दूर होती है। फर्निचर के रूप में इस्तेमाल होने वाले इस पेड़ की पत्तियों का सेवन गर्मी के रोगों को शांत करने में असरदार साबित होता है। इन पत्तियों का सेवन शरीर में होने वाली कमजोरी से जुड़ी परेशानियों को दूर करता है। इन पत्तियों को पीसकर उसकी चटनी बनाकर खाने से आपको कई तरह से फायदा होगा।
इन पत्तियों का सेवन कैसे करें
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण ने बताया अगर आप इमाम दस्ते में दो से तीन शीशम के पत्ते, दो से तीन नीम और सदाबहार के पत्ते पीसकर उसकी चटनी बना लें और उसे पानी में उबालकर उसका सेवन करें तो आपकी डायबिटीज कंट्रोल रहेगी। इस चटनी का सेवन आप पानी के साथ भी ऐसे ही कर सकते हैं, इसे खाने से कमजोरी दूर होगी और बॉडी हेल्दी रहेगी।


