‘आप हमारी मदद के लिए आएं’, लद्दाख के मुद्दे पर सोनम वांगचुक की अपील, अभिजीत दीपके का आया रिएक्शन…

Sonam Wangchuk News: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शनिवार सुबह देश भर के लोगों से लद्दाख में लोकतंत्र की लड़ाई में समर्थन देने की अपील की। ​​उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 9 सितंबर को हुई बैठक में लद्दाखी नेताओं को यह आश्वासन देने में विफल रही कि केंद्र शासित प्रदेश में लोकतांत्रिक सरकार बनने तक भूमि आवंटन और स्थानीय प्रशासन से संबंधित कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय मौजूदा प्रशासन द्वारा नहीं लिया जाएगा। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक का समर्थन करते हुए कहा, “लद्दाख के साथ खड़े रहें!”

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर कहा, “हेलो दोस्तों कॉकरोचों कैसे हो। मैं अभी दिल्ली में हूं और ठीक उस जगह पर हूं, जहां पर हमने आपके साथ कई हफ्ते बिताए भूखे रहकर। जीं हां जंतर-मंतर पर हूं, लेकिन घबराइए मत किसी अनशन या प्रदर्शन के लिए नहीं, हम यहां लद्दाख से आए है गृह मंत्रालय के साथ एक मीटिंग के लिए, जो कि लद्दाख की प्रकृति, संस्कृति या जमीन के संरक्षण के लिए चल रही थी।”

कॉमेडियन जसपाल भट्टी का वांगचुक ने शेयर किया वीडियो

वांगचुक ने कॉमेडियन जसपाल भट्टी का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि बैठक में अगली बैठक की तारीख तय करने के अलावा कोई नया कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा, “बैठक में सिर्फ चाय अच्छी थी, बाकी कोई नया फैसला नहीं लिया गया।” उन्होंने बताया कि लद्दाख में विधानसभा के तहत एक लोकतांत्रिक ढांचा बनाने सहित पहले से लिए गए फैसलों को दोहराया गया। लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बात का कोई आश्वासन नहीं दिया कि लद्दाख के स्थानीय प्रशासन और उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा लिए गए बड़े फैसलों से प्रस्तावित विधानसभा की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।

वांगचुक ने कहा, “हमें सरकार से केवल एक छोटा, वैध आश्वासन चाहिए था कि जब तक लद्दाख में लोकतांत्रिक ढांचा स्थापित नहीं हो जाता, तब तक केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन लद्दाख का स्वरूप बदलने वाले कोई भी बड़े फैसले न ले, चाहे वह भूमि आवंटन हो या स्थानीय प्रशासन। इन क्षेत्रों में कोई बड़ा बदलाव नहीं लाया जाना चाहिए और यह लोकतांत्रिक ढांचे के समन्वय से किया जाना चाहिए।”

आप हमारी मदद के लिए आगे आएं- सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक ने कहा, “हम आप सबसे चाहते हैं कि आप हमारी मदद के लिए आएं, हम लद्दाख में 19-24 सितंबर को एक पदयात्रा करने जा रहे हैं और अगर एक हफ्ते के अंदर हमें आश्वासन मिल जाता है तो हम इसे एक यादगार पदयात्रा मानेंगे। वरना हम इसे पूरे भारत की तरफ से एक बड़ा प्रदर्शन बनाएंगे कि लद्दाख के साथ इंसाफ किया जाए, जैसा कि हर राज्य में होता है, बड़े फैसले लद्दाख के लोगों पर ही छोड़ दिए जाएंगे। याद रखिए ये सिर्फ लद्दाख के लिए नहीं है, लद्दाख हिमालय में वो जगह है, जहां से आपको पानी आता है। ये वो जगह है जिन लोगों ने बिना वर्दी, बिना तनख्वाह के देश की रक्षा की है। अब देश की जरूरत लद्दाख को है।”

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वांगचुक ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने कुछ ऐसी बातें रखीं जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता, जैसे कि ब्यूरोक्रेसी पर चुने हुए केंद्रशासित प्रदेश-लेवल के नेता का दबदबा और कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण। साथ ही, उन्होंने यह भरोसा भी मांगा कि प्रस्तावित लोकतांत्रिक ढांचा बनने से पहले लद्दाख और उसके प्रशासन से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला नहीं लिया जाएगा। वांगचुक ने कहा, “इनमें से किसी भी मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई।” यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…