
बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद से एक ऐसी हृदय विदारक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसे सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान की आंखें नम हो जाएं। जनपद के मनियर वार्ड नंबर 13 में एक हंसता-खेलता परिवार अचानक माता-पिता दोनों के साये से महरूम हो गया। इस दोहरेवियोग ने बच्चों के सिर से आंचल और छांव दोनों एक साथ छीन लिए हैं।
यह मार्मिक घटना तब और अधिक भावुक हो गई, जब पिता की मौत के कुछ ही समय बाद मां की भी सांसें थम गईं। अपनी अंतिम घड़ी में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही मां ने जब अपनी जवान बेटी को पास बुलाया, तो उनके मुंह से निकले आखिरी शब्द वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा चीर गए। मां ने नम आंखों से बेटी से कहा-देखो बेटी, हमारे ये छोटे-छोटे मासूम बच्चे हैं। अब इनकी दुनिया और इनका सब कुछ तुम ही हो, संभाल लेना इन्हें, मैं तो अब जा रही हूं।
बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
मां के ये आखिरी शब्द सुनते ही वहां मौजूद हर रिश्तेदार और पड़ोसी की आंखों से आंसू छलक पड़े। इस दुखद और असहनीय पल ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है। माता-पिता के अचानक उठ जाने से बेसहारा हुए इन छोटे-छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। अब नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सबसे बड़ी बहन, 19 वर्षीय खुशबू के कंधों पर आ गई है।
19 साल की खुशबू पर टूटा दुखों का पहाड़
इस परिवार की हर तस्वीर दिल को झकझोर देने वाली है जिस उम्र में एक बेटी को मां की गोद में बैठकर अपने सपने देखने चाहिए थे, उस उम्र में सुहानी को अपनी मां की अर्थी को कंधा देना पड़ा, जिस घर में मां-बाप के जाने के बाद बच्चों को संभालने वाला कोई बड़ा होना चाहिए था, वहां केवल 19 साल की खुशबू खड़ी थी।
14 साल के भाई ने दी मुखाग्नि
खुशबू प्रसाद ने बताया कि, उनके घर में दो बहनें और एक भाई है, जो नाबालिग हैं। इनके पिता सन 2016 में दुनिया को अलविदा कह चुके थे। उस वक्त बच्चे बहुत छोटे थे. मां ने खेतों में मजदूरी करके किसी तरह चारों बच्चों का पेट पाला, उन्हें पढ़ाया। जिंदगी आगे बढ़ा रही थी, लेकिन करीब दो-तीन महीने पहले बीमारी और अभावों में मां भी छोड़कर चली गई। मां की उम्र महज 41 साल थी और उनको मुखाग्नि देने वाला खुशबू का भाई 14 साल का था, अभी तक इन अनाथ भाई-बहनों को कोई मदद नहीं मिली है, लेकिन उम्मीद है।
19 साल की खुशब भाई -बहनों के लिए बनी मां-बाप
मां की अर्थी को चारों भाई-बहनों ने कंधा दिया था। उस दिन खुशबू की दुनिया जैसे खत्म हो गई थी. लेकिन उसी पल खुशबू को उनकी मां की कही एक बात याद आई कि, तुम बड़ी बेटी हो, घर में अब तुमसे कोई बड़ा नहीं है।
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मेरे जाने के बाद अपने छोटे भाई-बहनों को तुम्हें ही संभालना है। बस, यही बात खुशबू की टूटती हुई हिम्मत का सहारा बन गई और आज 19 साल की यह बेटी अपने 14 साल के भाई और बहनों के लिए मां-बाप दोनों बन गई है।
खुशबू रोजी-मजदूरी कर चलती है अपना घर
खुशबू किसी तरह भाई और बहनों के लिए टिफिन का इंतजाम करती है और स्कूल भेजती है। इसके बाद खुद बस स्टेशन पहुंचकर मेहनत-मजदूरी करती है। शाम को घर लौटकर फिर भाई-बहनों की देखभाल, खाना बनाना और एक गाय के चारे-पानी का इंतजाम करती है, जो थोड़ा पैसा मिलता है और उसी से घर चलाने का प्रयास करती है, जिससे अपने छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई और खुद की पढ़ाई भी जारी रखने की कोशिश करती आ रही है।
सरकारी सहारे की उम्मीद
खुशबू ने कहा कि, मुझे पता नहीं तब तक अपनी भाई-बहनों को पढ़ा पाएगी। अब उनके पास कोई सहारा नहीं है। हर उम्मीद अब दम तोड़ रही है, आज इस परिवार को दया नहीं, एक अवसर और सरकारी सहारे की जरूरत है। बलिया जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और सरकार से खुशबू की बस इतनी गुहार है कि, इनके छोटे-छोटे भाई-बहनों की कुछ मदद हो जाए, ताकि जिस बेटी ने अपनी मां का वादा निभाने के लिए अपना बचपन कुर्बान कर दिया है। खुशबू को बलिया डीएम मंगला प्रसाद सिंह से काफी उम्मीद है कि, यह डीएम जरूरतमंदों की मदद करते हैं, अगर इनकी आवाज भी डीएम और सरकार तक पहुंचेगी तो इनके भी टूटते सपनों में जान आ जाएगी।



