देश के कई राज्यों में पिछले कुछ समय से मानसून का मौसम बना हुआ है. यह मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ नमी, जलभराव और मौसम में लगातार बदलाव भी लेकर आता है. ऐसे मौसम में प्रेग्नेंट महिलाओं को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई शारीरिक और हॉर्मोनल बदलाव होते हैं. इन बदलावों की वजह से शरीर को अधिक देखभाल और साफसफाई की जरूरत होती है. खानपान, पीने का पानी, स्वच्छता और आसपास का वातावरण इस दौरान काफी अहम भूमिका निभाते हैं.

के दौरान मां की सेहत का सीधा असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ सकता है. इसलिए इस समय छोटीछोटी लापरवाहियों से बचना और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना जरूरी माना जाता है. हालांकि हर प्रेग्नेंसी अलग होती है और हर महिला की स्वास्थ्य स्थिति भी एक जैसी नहीं होती. ऐसे में मानसून के मौसम में अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है. आइए जानते हैं कि इस मौसम में प्रेग्नेंट महिलाओं को किन संक्रमणों का ज्यादा खतरा रहता है, संक्रमण होने पर किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और इससे बचाव के लिए क्या सावधानियां अपनानी चाहिए.
मानसून में प्रेग्नेंट महिलाओं को किन संक्रमणों का सबसे ज्यादा खतरा रहता है?
मानसून के मौसम में प्रेग्नेंट महिलाओं में कुछ संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है. इनमें यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन सबसे आम माना जाता है, क्योंकि इस दौरान नमी और पानी की कमी जैसी स्थितियां इसकी संभावना बढ़ा सकती हैं. इसके अलावा दूषित भोजन या पानी की वजह से फूड पॉइजनिंग और पेट से जुड़े संक्रमण भी हो सकते हैं. बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी रहता है.
अधिक नमी के कारण कुछ महिलाओं में फंगल संक्रमण की समस्या भी हो सकती है. वहीं सर्दी, जुकाम और वायरल बुखार जैसे संक्रमण भी इस मौसम में अधिक देखने को मिलते हैं. हालांकि हर प्रेग्नेंट महिला को ये संक्रमण हों, ऐसा जरूरी नहीं है. साफसफाई, सुरक्षित भोजन, साफ पानी और समय पर डॉक्टर की सलाह से इनका खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.
प्रेग्नेंसी में संक्रमण होने पर किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
अगर प्रेग्नेंसी के दौरान तेज बुखार, बारबार पेशाब आने के साथ जलन, पेट या कमर में तेज दर्द, लगातार उल्टी, दस्त, असामान्य वजाइनल डिस्चार्ज, तेज खुजली, शरीर में अधिक कमजोरी या कंपकंपी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
इसके अलावा बच्चे की हलचल में कमी महसूस होना या लंबे समय तक तबीयत खराब रहना भी डॉक्टर से तुरंत संपर्क करने का कारण हो सकता है. समय पर जांच और इलाज मां और बच्चे, दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है.
मानसून में संक्रमण से बचने के लिए गर्भवती महिलाएं क्या करें?
मानसून में संक्रमण से बचने के लिए हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाएं तथा साफ और सुरक्षित पानी पिएं. बाहर का कटा हुआ फल या अस्वच्छ भोजन खाने से बचें.
हाथों की साफसफाई का ध्यान रखें और मच्छरों से बचाव के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार सुरक्षित मच्छररोधी उपाय अपनाएं. किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.


