Featured Image

Raipur News: रायपुर। राजधानी रायपुर पुलिस ने काले कागज से नोट बनाने का झांसा देकर ठगी करने वाले दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके पहले पुलिस ने मामले में 9 आरोपियों को पकड़ा था। आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ से ज्यादा की नगदी और मोबाइल, एटीएम जब्त किया था। ये पूरा मामला थाना तेलीबांध थाना क्षेत्र का है।

थाना तेलीबांधा के अपराध क्रमांक 330/26, धारा 318(4), 61(2) बीएनएस के प्रकरण में थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा मामले की जाँच करते हुए आरोपियों की पतासाजी व गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है।

मामले में पुलिस टीम द्वारा पूर्व में कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय, दीपिका पॉलीवाल, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी, मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर, विवेक सिंह, शुभम पांडेय, योगेन्द्र चौहान व बालमुकुंद दीक्षित को गिरफ्तार किया गया था।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस टीम द्वारा 4 करोड़ रुपये से अधिक नगदी रकम, 20 नग मोबाइल, एटीएम कार्ड, नोट के आकार का काला पेपर, कांच के प्लेट्स, अन्य सामग्री व महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किया गया था।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए गिरफ्तार आरोपियों से प्रकरण में संलिप्त अन्य व्यक्तियों, उनके आपसी संपर्कों तथा घटना में उनकी भूमिका के संबंध में विस्तृत व गहन पूछताछ की गई। पूछताछ से प्राप्त जानकारी के साथ-साथ आरोपियों के कब्जे से जप्त मोबाइल फोन व उनमें उपलब्ध डिजिटल सामग्री का तकनीकी परीक्षण व विश्लेषण किया गया।

तकनीकी विश्लेषण व पूछताछ से प्राप्त तथ्यों के आधार पर आरोपियों के आपसी संपर्कों तथा प्रकरण में रामायण सिंह उर्फ अभिषेक सिंह व दीपक सिंह की संलिप्तता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली। पुलिस ने आरोपियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपी

01. रामायण सिंह उर्फ अभिषेक सिंह पिता नंदकिशोर सिंह उम्र 39 साल निवासी 106 जे 04 रूस्तम जी ग्लोबल सिटी थाना विरार वेस्ट जिला पालघर मुम्बई।

02. दीपक सिंह पिता वीरेन्द्र सिंह उम्र 46 साल निवासी 002 डी विंग रोज गार्डन बिल्डिंग मीरा रोड थाना काशीमीरा जिला पालघर मुम्बई।

जानिए पूरा मामला

दरअसल, थाना तेलीबांधा में धारा 318(4), 61(2) बीएनएस के प्रकरण में क्राईम व तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा पूर्व में कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय पति शुभम पाण्डेय कोलकाता और दीपिका पॉलीवाल राजस्थान को गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों के कब्जे से 3 नग मोबाइल फोन, नगदी रकम 26,000 रूपये और एटीएम कार्ड, आधार कार्ड जब्त कर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

गिरफ्तार आरोपी व अन्य आरोपियों व उनके आपसी संपर्कों के संबंध में पूछताछ की गई। साथ ही आरोपियों के कब्जे से जब्त मोबाइल व उनमें उपलब्ध डिजिटल सामग्री का तकनीकी परीक्षण व विश्लेषण किया गया। सायबर टीम द्वारा मोबाइल फोन में मिले चैट व अन्य डिजिटल साक्ष्यों का सूक्ष्मता से जाँच की गई। इस दौरान अन्य आरोपियों की जानकारी मिलने पर पुलिस की संयुक्त टीम पुणे रवाना हुई।

पुणे में एक सप्ताह कैंप

टीम द्वारा लगभग एक सप्ताह तक कैम्प कर आरोपियों की गतिविधियों व संभावित ठिकानों पर निगरानी रखते हुए इनपुट के आधार पर पुणे के खण्डाला स्थित एक रिसॉर्ट में आरोपियों का लोकेशन मिला। टीम ने बिना देरी किये रेड कार्रवाई की।

रंगे हाथ पकड़ाए आरोपी

रेड के दौरान 7 आरोपी मौके पर मिले, जो वाराणसी निवासी एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर अपने पास बुलाए थे। पीड़ित अपने साथ करोड़ों रुपये लेकर रिसॉर्ट पहुंचा था और रकम दोगुनी करने के लालच में आरोपियों को नगदी सौंप चुका था। पुलिस टीम द्वारा आरोपियों को पीड़ित से रकम प्राप्त कर ठगी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।सभी 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लगभग 4 करोड़ से अधिक नगदी, मोबाइल 17 नग, नोट के आकार का काला पेपर, कांच के प्लेट्स, अन्य सामग्री और दस्तावेज जब्त कर पुणे से ट्रांजिट रिमाण्ड पर रायपुर लाया गया।

आरोपियों से पूछताछ के दौरान उनके द्वारा छत्तीसगढ़, नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं शहरों में इसी प्रकार की ठगी की घटनाओं को अंजाम देना बताये।

कैप्टन और सर गिरफ्तार

आरोपी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ “कैप्टन” उर्फ “शेट्टी” उर्फ ‘‘रेड्डी‘‘ पूर्व में भी इसी प्रकार की ठगी की घटनाओं को अंजाम देने के मामले में मुम्बई से जेल जा चुका है। इसी तरह आरोपी मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ “बड़े सर” भी ठगी के प्रकरणों में मुम्बई व वाराणसी जेल निरुद्ध रह चुका है।

जानिए आरोपियों की भूमिका

आरोपी ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ शेट्टी उर्फ रेड्डी व मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर गिरोह के मुखिया है। आरोपी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव गिरोह में “कैप्टन” की भूमिका निभाता है, जबकि आरोपी मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ “बड़े सर” के रूप में कार्य करता है। गिरोह के अन्य सदस्यों की भी अलग-अलग भूमिका थी।

डी कंपनी का बताकार डराते

आरोपियों द्वारा स्वयं को “डी ग्रुप कंपनी (दाऊद ग्रुप)” से जुड़ा बताकर पीड़ितों पर प्रभाव बनाने का प्रयास किया जाता था। गिरोह के सदस्यों को उनकी भूमिका के अनुसार “कैप्टन”, “बड़े सर” आदि नामों से संबोधित किया जाता था तथा ठगी से प्राप्त रकम का आपस में प्रतिशत के आधार पर बंटवारा किया जाता था। पीड़ितों को प्रभावित करने के लिए आरोपी खुद को बड़े नेताओं एवं फिल्मी कलाकारों के साथ फोटो दिखाते थे।

5 स्टार होटलों में मीटिंग

गिरोह के मुख्य भूमिका निभाने वाले आरोपी अपने साथ निजी गनमैन भी रखता था, ताकि पीड़ितों पर प्रभाव व दबाव बनाया जा सके। आरोपियों द्वारा पीड़ितों को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, आगरा, राजस्थान, गुजरात व नागपुर आदि शहरों के अलग-अलग 5 स्टार होटलों में बुलाया जाता था। खुद को प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में पेश कर पीड़ितों का विश्वास हासिल किया जाता और उनसे बड़ी रकम ली जाती थी। इसके बाद केमिकल के माध्यम से नोटों को दोगुना करने का झांसा देकर ठगी की जाती थी।पीड़ितों को रकम दोगुनी होने का विश्वास दिलाकर उनसे बड़ी राशि ली जाती और बाद में आरोपी योजनाबद्ध तरीके से रकम लेकर फरार हो जाते और पीड़ितों को गुमराह कर ठगी की राशि हड़प लेते थे।

ऐसे देते थे घटना को अंजाम

आरोपियों द्वारा प्लानिंग के तहत खुद को प्रभावशाली व्यक्तियों व विदेशी निवेशकों से जुड़ा बताकर पीड़ितों का विश्वास अर्जित करते थे। इसके बाद कंपनी के लिए बड़े निवेश व फंड स्वीकृत कराने का झांसा देते और बड़े अधिकारियों से बैठक, फाइल प्रोसेसिंग, सुरक्षा स्वीकृति, विदेशी परीक्षण, हाई-पावर केमिकल व अन्य तकनीकी औपचारिकताओं का हवाला दिया जाता था।

प्रार्थी का विश्वास बनाए रखने के लिए आरोपियों द्वारा उसे विभिन्न स्थानों पर बुलाकर नकली केमिकल व विशेष रासायनिक प्रक्रिया का प्रदर्शन किया जाता और झूठा दावा किया जाता था कि काले रंग से ढके नोटों को विशेष केमिकल व विदेशी तकनीक की सहायता से असली भारतीय मुद्रा में परिवर्तित किया जा सकता है।

आरोपियों द्वारा पहले से तैयार असली नोटों का उपयोग कर नकली रासायनिक प्रक्रिया का प्रदर्शन किया जाता था।वॉश-वॉश (Wash & Wash) Black currency Scam पद्धति का उपयोग करते हुए विशेष केमिकल, विदेशी तकनीक व काले नोटों को असली नोटों में परिवर्तित करने का झूठा प्रदर्शन कर लोगों का विश्वास जीता जाता था, जिससे प्रार्थी उनकी बातों पर विश्वास कर ले। इसके बाद आरोपियों द्वारा कभी विदेशी केमिकल मंगाने, कभी हाई-पावर केमिकल खरीदने, कभी विदेशी परीक्षण, कभी वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति तो कभी फंड रिलीज व अन्य आवश्यक औपचारिकताओं का बहाना बनाकर विभिन्न किश्तों में राशि ऐंठी जाती थी।