हिमाचल: इंस्टाग्राम पर की दोस्ती, घर बुलाकर 14 साल की लड़की से किया मुंह काला; अब मिली सख्त सजा

शिमला की रामपुर कोर्ट ने आरोपी को सुनाई 20 साल की सजा जुर्माना भी लगाया
शिमला। आज सोशल मीडिया के दौर में अनजान लोगों से दोस्ती होना आम बात हो गई है। इंस्टाग्रामए फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवक.युवतियां एक.दूसरे के संपर्क में आते हैं। कई बार शातिर युवक कम उम्र की लड़कियों को अपने झूठे प्यार और भरोसे के जाल में फंसाकर उनका शोषण भी करते हैं।
ऐसा ही एक मामला हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशहर से सामने आया हैए जहां इंस्टाग्राम के जरिए 14 वर्षीय किशोरी से संपर्क करने वाले युवक ने उसे मिलने के बहाने बुलाया और बाद में उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले में अब आरोपी को कोर्ट ने सख्त सजा सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार, 14 वर्षीय किशोरी आरोपी ज्ञान दास को सोशल मीडिया के माध्यम से जानती थी। 9 फरवरी 2024 को आरोपी ने इंस्टाग्राम पर उसे संदेश भेजा और बाजार में मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद वह किशोरी को अपने घर ले गया, जहां उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके साथ दुष्कर्म किया गया। घटना के बाद आरोपी ने किशोरी को किसी को कुछ न बताने के लिए कहा और उसे धमकी भी दी। परिवार को जब घटना की जानकारी मिली तो मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।
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शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच पूरी होने पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया। POCSO कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाह अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 27 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद ज्ञान दास को दोषी ठहराया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय किन्नौर स्थित रामपुर ने आरोपी ज्ञान दास निवासी कल्पा, किन्नौर को नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में नामजद दूसरे आरोपी ज्ञान चंद के खिलाफ अपराध में सक्रिय संलिप्तता साबित नहीं हो सकी। पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अदालत ने उसे बरी कर दिया।
इन मामलों से यह बात सामने आती है कि सोशल मीडिया पर किसी अनजान व्यक्ति से संपर्क बनाते समय विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। कम उम्र के बच्चों और किशोरकिशोरियों को ऑनलाइन पहचान, निजी जानकारी साझा करने, अकेले मिलने जाने और किसी व्यक्ति के दबाव या धमकी में आने से जुड़े खतरों के बारे में जागरूक करना महत्वपूर्ण है।
रामपुर POCSO कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को भी रेखांकित करती है। नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई POCSO कानून के तहत की जाती है और दोष सिद्ध होने पर कानून में कठोर दंड का प्रावधान है। रामपुर में सामने आए इन दोनों मामलों में अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर बच्चों की ऑनलाइन और ऑफलाइन सुरक्षा को लेकर सतर्कता की जरूरत सामने आई है।

