भारतीय सिनेमा को वैश्विक पटल पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और इसके बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक के बाद, प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी की अगुवाई में एक हाईलेवल स्टडी ग्रुप के गठन की घोषणा की है। यह समूह भारतीय फिल्म उद्योग के समक्ष मौजूद अवसरों और चुनौतियों का गहराई से अध्ययन करेगा और इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए ठोस उपाय सुझाएगा।

 

महीने में सौंपी जाएगी रिपोर्ट, एक्सपर्ट्स होंगे शामिल

इस हाईलेवल स्टडी ग्रुप में फिल्म इंडस्ट्री के नामचीन विशेषज्ञों और टेक्नोलॉजी पार्टनर्स को शामिल किया गया है।

समय सीमा: यह ग्रुप सिनेमा जगत से जुड़े सभी संबंधित पक्षों से व्यापक बातचीत करेगा और तीन महीने के भीतर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

उद्देश्य: भारतीय सिनेमा के लंबे समय के विकास के लिए एक व्यापक पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार करना।

इन मुख्य मुद्दों पर केंद्रित रहेगा अध्ययन समूह

यह ग्रुप मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा:

वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारतीय फिल्मों को ग्लोबल मार्केट में अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक कैसे बनाया जाए।

तकनीकी बदलाव: सिनेमा और फिल्म निर्माण पर नई तकनीकों के प्रभाव का आकलन करना।

संस्थानिक वित्तपोषण : फिल्म निर्माता बाजार से आसानी से फंड और इंस्टीट्यूशनल फाइनेंस कैसे हासिल कर सकते हैं।

फंडिंग के नए विकल्प: प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन के दौरान फिल्ममेकर्स को आने वाली वित्तीय दिक्कतों को दूर करना और फंडिंग के नए रास्ते तलाशना।

सिनेमाघरों की संख्या बढ़ाने के लिए ‘मॉडल स्टेट सिनेमा रेगुलेशंस’

भारत में सिनेमाई बुनियादी ढांचे को तेजी से बढ़ाने के लिए सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्तमान में अलगअलग राज्यों में थिएटर स्थापित करने के लिए अलगअलग नियम और जटिल अनुमति प्रक्रियाएं लागू हैं।

 

क्या है कानूनी स्थिति?

पत्र सूचना कार्यालय के मुताबिक, सिनेमा और थिएटर से जुड़े नियम संविधान की ‘स्टेट लिस्ट’ के तहत आते हैं। इसलिए केंद्र सीधे नियम लागू नहीं कर सकता, लेकिन वह राज्यों को दिशानिर्देश दे सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने ‘मॉडल स्टेट सिनेमा रेगुलेशंस’ का एक सेट तैयार किया है और इसे सभी राज्य सरकारों के साथ साझा किया है।

राज्यों से अनुरोध: केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से इन मॉडल नियमों को अपनाने का अनुरोध किया है।

केंद्र की मदद: मंत्रालय इन नियमों को जमीन पर लागू करने में राज्यों की हरसंभव मदद भी करेगा।

सरकार के इन जुड़वां फैसलों—पहला नीतिगत सुधारों के लिए प्रसून जोशी कमेटी का गठन और दूसरा सिंगलविंडो या आसान थिएटर रेगुलेशंस के लिए मॉडल नियमों का ड्राफ्ट—से भारतीय फिल्म उद्योग को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल देश में सिनेमाघरों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि कंटेंट और तकनीक के मामले में भारतीय सिनेमा ग्लोबल लेवल पर अपनी मजबूत धाक जमा सकेगा।