Bharat Tiwari Encounter Case Update: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले 26 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की 17 जून 2026 को एनकाउंटर के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद से बिहार की राजनीति, पुलिस की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है.इस मामले में CBI जांच की याचिका पर SC का सुनवाई से इनकार कर दिया है.साथ ही HC जाने की छूट दे दी है. वहीं आज भरत तिवारी की तेरहवीं है। कम से कम 25 हजार लोगों के लिए खाने का इंतजाम किया गया है।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में CBI जांच की याचिका पर सुनवाई से SC का इनकार
बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है। आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट ने PIL दायर करने वाले वकील से कहा कि वे अपनी याचिका के साथ संबंधित हाई कोर्ट जा सकते हैं। गौरतलब है कि इस PIL में उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है, जिन्होंने भरत तिवारी को एनकाउंटर में मार गिराया था। आपको बता दें PIL में एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई थी।
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न्याय की लड़ाई के लिए 11 समितियों का गठन
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग को लेकर 11 अलगअलग समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों का उद्देश्य मामले की कानूनी लड़ाई को संगठित तरीके से आगे बढ़ाना और न्यायिक प्रक्रिया की निगरानी करना बताया गया है। इन सभी समितियों में सबसे प्रमुख ‘अमर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष समिति’ बनाई गई है। इसके अध्यक्ष अनिल मिश्रा को बनाया गया है, जो ग्वालियर के रहने वाले हैं और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं। समिति के कार्यकारी अध्यक्ष सलेमपुर निवासी नागेश्वर दुबे हैं, जो आरा सिविल कोर्ट में वकालत करते हैं। वहीं, पंकज त्रिपाठी को समिति का संयोजक बनाया गया है, जबकि भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी सहसंयोजक की जिम्मेदारी संभालेंगे। मुख्य समिति में इनके अलावा सात अन्य अधिवक्ताओं को भी शामिल किया गया है। बताया गया है कि यह समिति पूरे मामले की कानूनी रणनीति, जांच की प्रगति और न्यायिक प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। साथ ही समयसमय पर अन्य समितियों को दिशानिर्देश और आवश्यक कानूनी सलाह भी देगी।
25 हजार लोगों के लिए महाभोज की तैयारी
एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी की आज मंगलवार को तेरहवीं है। इस मौके पर गांव में बड़े स्तर पर श्रद्धांजलि सभा और महाभोज का आयोजन किया जा रहा है। परिवार के अनुसार, करीब 25 हजार लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है, जबकि अतिरिक्त 15 हजार लोगों के लिए भी राशन का इंतजाम रखा गया है, ताकि आने वाले किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। गांव में सुबह से ही भोजन बनाने का काम शुरू हो गया है। श्रद्धांजलि सभा के लिए घर के सामने विशाल शामियाना लगाया गया है। वहीं, आसपास के खेतों में दो बड़े टेंट लगाए गए हैं, जहां लोगों के बैठने और भोजन करने की व्यवस्था की गई है। गर्मी और उमस को देखते हुए कूलर और पंखे लगाए गए हैं, जबकि दूरदराज से आने वाले लोगों के आराम के लिए खेतों में पलंग भी बिछाए गए हैं।
परिजनों का कहना है कि बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से हजारों लोगों के तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी ने बताया कि बाहर से आने वाले समर्थकों के ठहरने, भोजन और अन्य सुविधाओं की पूरी व्यवस्था की गई है। इस बीच भरत तिवारी की मां आशा देवी ने बेटे को न्याय दिलाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा, “मुझे सिर्फ हाईकोर्ट पर भरोसा है कि मेरे बेटे को न्याय मिलेगा। सरकार की ओर से गठित न्यायिक जांच टीम और भोजपुर पुलिस पर मुझे बिल्कुल भरोसा नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
17 जून को भोजपुर पुलिस ने दावा किया कि शाहपुर थाना क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई। पुलिस के मुताबिक, आत्मरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसमें भरत के पैर में गोली लगी। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
हालांकि, भरत के परिवार और बिलौटी गांव के ग्रामीणों ने पुलिस के इस दावे को खारिज कर दिया। उनका आरोप है कि यह वास्तविक मुठभेड़ नहीं बल्कि फर्जी एनकाउंटर था। परिवार शुरू से ही पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करता रहा है।
पुलिस के दावे पर उठे सवाल
घटना के बाद यह मामला तेजी से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर भी एनकाउंटर को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे। विपक्षी दलों ने बिहार सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। वहीं सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की।
बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने केवल पुलिस ही नहीं बल्कि सरकार की भूमिका की भी जांच कराने की बात कही।
फॉरेंसिक जांच बनी सबसे अहम कड़ी
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भरत भूषण तिवारी को लगी गोली आखिर किस हथियार से चली थी। इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए अदालत की अनुमति के बाद एनकाउंटर में इस्तेमाल किए गए तीनों हथियारों और घटनास्थल से बरामद कारतूसों के खोखों को पटना स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है।
एफएसएल की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भरत के शरीर में लगी गोली किस हथियार से चली थी और घटनास्थल से मिले साक्ष्य पुलिस के दावे से मेल खाते हैं या नहीं। फिलहाल सभी की निगाहें इस रिपोर्ट पर टिकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने इस पूरे मामले को लेकर जनहित याचिका दायर की। उन्होंने खुद याचिकाकर्ता के रूप में अदालत में पैरवी की है। याचिका में केंद्र सरकार, बिहार सरकार, बिहार के पुलिस महानिदेशक और CBI को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि
- भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को फर्जी मानते हुए इसकी CBI जांच कराई जाए।
- एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए।
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति करे।
- संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
याचिका में कहा गया है कि पुलिस किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने या सजा देने वाली संस्था नहीं है। सजा देने का अधिकार केवल अदालत को है और फर्जी एनकाउंटर कानून के शासन के खिलाफ हैं।
पहले तत्काल सुनवाई से किया था इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती चरण में इस मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। अदालत ने याचिकाकर्ता को नियमित प्रक्रिया के तहत सुनवाई की तारीख लेने को कहा था। अब आज इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
राष्ट्रपति सचिवालय ने भी लिया संज्ञान
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने 24 जून को राष्ट्रपति के नाम ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी। राष्ट्रपति सचिवालय ने इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही की गई कार्रवाई की रिपोर्ट याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है।
आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग
वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने मांग की है कि यदि मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच तभी संभव होगी जब जांच पूरी तरह स्वतंत्र एजेंसी के हाथों में हो।
पुलिस अधिकारियों को धमकी देने के आरोप में नया केस
इसी बीच भोजपुर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी दीपक दीक्षित उर्फ पंडित के खिलाफ साइबर थाना में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर पुलिस अधिकारियों को जान से मारने की धमकी दी और लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काने की कोशिश की।
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अब आगे क्या?
अब इस पूरे मामले में तीन बड़ी बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं
1. सुप्रीम कोर्ट आज याचिका पर क्या रुख अपनाता है।
2. क्या अदालत CBI जांच के आदेश देती है या नहीं।
3. एफएसएल रिपोर्ट में गोली और हथियारों को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आता है।
इन तीनों पहलुओं पर आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित मामले की दिशा काफी हद तक तय होगी।
फिलहाल स्थिति
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब केवल एक पुलिस मुठभेड़ का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस कार्रवाई, न्यायिक निगरानी, मानवाधिकार और कानून के शासन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बता रही है, जबकि दूसरी ओर परिवार, ग्रामीण और कई सामाजिकराजनीतिक पक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिनसे इस मामले की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है
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