सरगुजा। न चेहरे पर अपराध का बोध, न कोई शिकन। मां-बेटी की नृशंस हत्या के दोषी कुलदीप साहू को जब फास्ट ट्रैक कोर्ट FTC ने पुलिसकर्मियों को कार से कुचल कर हत्या के प्रयास में 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, तो कोर्ट से बाहर निकलते ही वह हंस रहा था।

शर्मनाक बात ये, भीड़, पुलिसकर्मियों और कैमरों के सामने उसने हंसते हुए पोज दिया और कहा – स्माइली वाला दिखाइएगा। उसका इशारा मीडिया और वीडियो बना रहे लोगों की ओर था। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सोमवार को फैसले के दिन कोर्ट परिसर में भीड़ जुटी थी। भारी सुरक्षा के बीच कुलदीप को अंबिकापुर केंद्रीय जेल से सूरजपुर न्यायालय ले जाया गया था। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट आनंद प्रकाश वारियाल ने दोहरे हत्याकांड में दो आरोपियों सूरज साहू और निलकेश्वर साहू को दोषमुक्त कर दिया, जबकि आदतन अपराधी कुलदीप साहू समेत चार आरोपियों रिंकू उर्फ फूल सिंह, चंद्रकांत चौधरी और आर्यन विश्वकर्मा पर हत्या का आरोप सिद्ध माना है। सजा पर फैसला 8 अक्टूबर को सुनाया जाएगा।

जानिए क्या है मामला?

13 अक्टूबर 2024 की रात सूरजपुर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और नाबालिग बेटी की किराए के मकान में चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। शवों को पीढ़ा गांव के पास फेंक दिया गया था। उसी रात पुराना बस स्टैंड चौपाटी में आरक्षक घनश्याम सोनवानी पर खौलता तेल उड़ेल कर हमला किया था,फिर प्रधान आरक्षक तालिब शेख सहित पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने की कोशिश थी। इस प्रकरण में कुलदीप साहू को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। रिंकू, चंद्रकांत, आर्यन, अशोक साहू और राजू साहू को दोषमुक्त कर दिया गया है। भागते समय बिश्रामपुर के तत्कालीन टीआई अलरिक लकड़ा पर लटोरी में फायरिंग के आरोप भी लगे थे। इसमें कुलदीप साहू और सूरज साहू को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया है।

दोहरे हत्याकांड के पहले, दो दर्जन से अधिक अपराधों में शामिल

प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी व बेटी की हत्या से पहले ही दो दर्जन से अधिक केस पंजीकृत है। गुंडा बदमाशों की सूची में शामिल था। घटना के बाद सूरजपुर सड़कों पर उतर आया था। लोगों ने कठोरतम सजा की मांग की थी। प्रशासन ने कुलदीप के अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया था। घटना के बाद फरार कुलदीप को बलरामपुर पुलिस ने पकड़ा था। घटना की गंभीरता पर तत्कालीन कलेक्टर और एसपी हटाए गए थे। कुलदीप से संपर्क रखने पर आरक्षक प्रदीप साहू को बर्खास्त कर दिया गया था। राज्य शासन की अनुमति से सहायक संचालक अभियोजन सुरेश शर्मा को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट में अप्रैल 2026 से गवाही शुरू हुई थी।