भारत में ऑटोमैटिक कारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है. शहरों में ट्रैफिक भी लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में बिना क्लच वाली कार चलाना काफी आसान लगता है. लेकिन इसके बावजूद मिडसाइज SUV खरीदने वाले ज्यादातर लोग अभी भी मैनुअल गियरबॉक्स को ही पसंद कर रहे हैं.

Jato Dynamics के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही यानी जनवरी से जून के बीच मिडसाइज SUV की कुल बिक्री में मैनुअल मॉडल की हिस्सेदारी 71.4 प्रतिशत रही. वहीं, ऑटोमैटिक SUV की हिस्सेदारी सिर्फ 28.6 प्रतिशत रही. यानी हर 10 SUV में करीब 7 लोग अभी भी मैनुअल गियर वाली कार खरीद रहे हैं.

ज्यादा कीमत सबसे बड़ी वजह

के बीच कीमत का अंतर इसकी सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है. पेट्रोल मैनुअल और पेट्रोल ऑटोमैटिक मॉडल की कीमत में औसतन करीब 1.5 लाख रुपये का फर्क होता है. मिडसाइज SUV खरीदने वाले कई ग्राहक पहले ही अपने बजट को खींचकर कार खरीदते हैं. ऐसे में सिर्फ ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के लिए डेढ़ लाख रुपये ज्यादा देना हर किसी के लिए आसान नहीं है.

अगर कोई ग्राहक कार लोन पर खरीदता है, तो ज्यादा कीमत का सीधा असर उसकी EMI पर पड़ता है. ऐसे में खरीदार के सामने यह सवाल भी रहता है कि अतिरिक्त पैसे ऑटोमैटिक गियरबॉक्स पर खर्च करें या फिर उसी बजट में ज्यादा फीचर्स वाला वेरिएंट लें.

ट्रैफिक के बाद भी मैनुअल की पकड़ मजबूत

बड़े शहरों में रोज लंबे ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है. ऐसे में काफी आरामदायक होती है. बारबार क्लच दबाने और गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे ड्राइविंग के दौरान थकान भी कम हो सकती है.

फिर भी कई लोग मैनुअल कार को छोड़ना नहीं चाहते. बहुत से ड्राइवर लंबे समय से मैनुअल गाड़ी चला रहे हैं और उन्हें इसे चलाने की आदत है. उन्हें ऑटोमैटिक के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत महसूस नहीं होती.छोटे शहरों और कस्बों में भी मैनुअल कारों की अच्छी मांग है. यहां कई खरीदार इन्हें आसान और कम खर्च में संभालने वाला विकल्प मानते हैं.

हर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स एक जैसा नहीं

ऑटोमैटिक कारों में भी अलगअलग तरह के गियरबॉक्स मिलते हैं. इनमें AMT आमतौर पर कम कीमत वाला विकल्प होता है. इसलिए मैनुअल और AMT मॉडल के बीच कीमत का अंतर कुछ कम हो सकता है.

इसके अलावा CVT, Torque Converter और DualClutch जैसे गियरबॉक्स भी बाजार में मौजूद हैं. इनकी कीमत आमतौर पर ज्यादा होती है. यही वजह है कि कार की कुल कीमत बढ़ जाती है और ग्राहक मैनुअल मॉडल की तरफ जा सकता है.

आगे बढ़ सकता है ऑटोमैटिक का हिस्सा

हालांकि अभी मैनुअल SUV की बिक्री ज्यादा है, लेकिन आने वाले सालों में तस्वीर बदल सकती है. CRISIL के Senior Practice Leader Hemal N Thakkar के अनुसार, 2030 तक SUV की बिक्री में ऑटोमैटिक गियरबॉक्स की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है.

पावरट्रेन की बात करें तो 2026 की पहली छमाही में मिडसाइज SUV बिक्री में पेट्रोल की हिस्सेदारी 50.8 प्रतिशत रही. डीजल की हिस्सेदारी 31.3 प्रतिशत, CNG की 10.8 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक की 7.1 प्रतिशत रही.फिलहाल कीमत और बजट के कारण मैनुअल SUV आगे है. लेकिन जैसेजैसे ऑटोमैटिक कारों की कीमत और विकल्प बेहतर होंगे, आने वाले वर्षों में इनकी मांग तेजी से बढ़ सकती है.