पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच के दौरान फील्डिंग करते वक्त चोटिल हुए दिल्ली कैपिटल्स के तेज गेंदबाज लुंगी एनगिडी को अरुण जेटली स्टेडियम से राजेंद्र नगर मैक्स हॉस्पिटल तक पहुंचानेके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। स्टेडियम से इस अस्पताल तक पहुंचने में आम तौर पर 2530 मिनट लगते हैं, लेकिन शनिवार को एनगिडी को सिर्फ 11 मिनट में वहां पहुंचा दिया गया। इस ऑपरेशन को एसीपी संजय सिंह ने लीड किया था जो खुद एक पूर्व क्रिकेटर हैं और वो गौतम गंभीर व विराट कोहली के साथ मैदान शेयर कर चुके हैं।

11 मिनट में लुंगी एनगिडी को हॉस्पिटल पहुंचाने वाले ACP हैं पूर्व क्रिकेटर, कोहली-गंभीर के साथ शेयर किया था मैदान
11 मिनट में लुंगी एनगिडी को हॉस्पिटल पहुंचाने वाले ACP हैं पूर्व क्रिकेटर, कोहली-गंभीर के साथ शेयर किया था मैदान

11 मिनट में एनगिडी पहुंचे अस्पताल

दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स के बीच 2026 में हुए मुकाबले के दौरान मिडऑफ पर कैच लेने की कोशिश में एनगिडी अपने सिर और गर्दन के बल गिर पड़े। मैदान पर ही उनका प्राथमिक उपचार किया गया लेकिन चोट की गंभीरता को लेकर चिंता तेजी से बढ़ गई। शाम 6:16 बजे एम्बुलेंस स्टेडियम से रवाना हुई। शाम 6:27 बजे तक वह हॉस्पिटल पहुंच चुकी थी। एम्बुलेंस ने पीक आवर में लगभग 10 किलोमीटर की दूरी सामान्य समय के आधे से भी कम समय में तय कर ली थी।

पूर्व क्रिकेटर रह चुके हैं संजय सिंह

जिस वक्त एनगिडी के साथ ये हादसा हुआ उस वक्त स्टेडियम में एसीपी संजय सिंह ड्यूटी पर तैनात थे और उन्होंने तुरंत ही ग्रीन कॉरिडोर बनाने का फैसला किया। यह दरअसल एक आपातकालीन रास्ता होता है जिसमें ट्रैफिक लाइटों को मैन्युअल रूप से इस तरह से सिंक्रोनाइज किया जाता है ताकि बिना किसी रुकावट के रास्ता मिल सके। संजय सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस के बात करते हुए कहा कि हमारे पास कोई और विकल्प नहीं था। एनगिडी एक इंटरनेशनल क्रिकेटर हैं और उनका गिरना काफी बुरा था। जैसे ही हमें इस स्थिति के बारे में बताया गया, हमने सोचना शुरू कर दिया कि बिना किसी रुकावट के एम्बुलेंस को कैसे ले जाया जाए। मैंने क्रिकेट खेला है और समझता हूं कि ऐसी स्थितिया आती हैं जब मैदान पर लगी चोट की वजह से हालात बहुत खराब हो सकते हैं।

मौके पर लिया गया ग्रीन कॉरिडोर बनाने का फैसला

संजय सिंह ने आगे बताया कि ग्रीन कॉरिडोर बनाने का फैसला मौके पर ही लिया गया। मैंने ड्राइवर से पूछा कि वह किस रास्ते से जाएगा। उसने जवाब दिया कि वह गूगल मैच को फॉलो करेगा। शाम के 6 बजे थे और ट्रैफिक का पीक आवर था इसलिए हमने ग्रीन कॉरिडोर बनाने का फैसला किया क्योंकि यह एक बेहद जरूरी था, लेकिन हमने लंबा रास्ता चुना क्योंकि दूसरे रास्ते भारी ट्रैफिक की वजह से बुरी तरह से जाम थे। मुझे आसपास के रास्तों की बहुत अच्छी जानकारी है। इसलिए जब ड्राइवर ने मुझसे कहा कि वह गूगल मैच को फॉलो करेगा तो मुझे पूरा यकीन था कि वह ट्रैफिक में फंस जाएगा।

इसके बाद मैंने कंट्रोल रूम से संपर्क किया और उन्हें बताया कि हम आगे बढ़ रहे हैं। यह जानकारी तुरंत आगे पहुंचा दी गई और रास्ते में पड़ने वाले सभी बड़े जंक्शन हमें खाली मिले। ग्रीन कॉरिडोर आमतौर पर अंगों को ले जाने या बहुत ज्यादा इमरजेंसी के लिए रिजर्व रखे जाते हैं और अक्सर इनकी प्लानिंग काफी पहले से कर ली जाती है, लेकिन इस बार इसे कुछ ही मिनटों में तैयार कर लिया गया। संजय सिंह ने कहा कि यह बहुत ही कम होने वाली चीज है और ज्यादातर एम्बुलेंस को रास्ता देने या इमरजेंसी कॉल पर मदद पहंचाने के लिए किया जाता है। यह पहली बार था जब किसी ग्रीन कॉरिडोर को इतनी तेजी से बनाया गया। आमतौर पर इसकी प्लानिंग पहले से की जाती है।

को ब्रायन लारा जैसा ट्रीटमेंट दें’, वेस्टइंडीज के पूर्व ऑलराउंडर की सलाह, कहा हाइब्रिड मॉडल अपनाएं

वैभव को लेकर वेस्टइंडीज के पूर्व ऑलराउंडर ने कहा कि भारत को उनके साथ ब्रायन लारा जैसे बर्ताव करना चाहिए और इस युवा बैटर के लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाना चाहिए।