हिमाचली खबर: Padmini Ekadashi 2026 Vishnu Ji Mata Laxmi Mantra, Aarti: बुधवार को पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। पद्मिनी एकादशी अधिक माह में आती है। जो एकादशी अधिक माह के शुक्ल पक्ष में आती है उसे पद्मिनी एकादशी कहते हैं। बता दें कि अधिक मास को मलमास, पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। इस एकादशी को अधिक मास एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पद्मिनी एकादशी अधिकमास में आने के कारण अत्यंत दुर्लभ और पवित्र मानी जाती है। इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु के साथसाथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और वैभव का आगमन होता है। पद्मिनी एकादशी के दिन विष्णु जी के साथ ही मां लक्ष्मी की आरती और मंत्रों का जाप भी जरूर करें।

पद्मिनी एकादशी के प्रभावशाली मंत्र
भगवान विष्णु का मंत्र
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
- ॐ नमोः नारायणाय॥
- मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरीकाक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
मां लक्ष्मी का बीज मंत्र
- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय…
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।
स्वामी दुख बिनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…
मातपिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
स्वामी शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥ ॐ जय…
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…
तुम हो एक अगोचर, सब के प्राणपति।
स्वामी सब के प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धाभक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय…
तनमनधन सब कुछ है तेरा।
स्वामी सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।…
माता लक्ष्मी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन ध्यावत, हरिविष्णु विधाता॥ ॐ जय…
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जगमाता।
सूर्यचन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय…
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धिसिद्धि धन पाता॥ ॐ जय…
तुम पातालनिवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्मप्रभावप्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय…
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय…
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खानपान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय…
शुभगुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधिजाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ॐ जय…
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय…
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन ध्यावत, हरिविष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।…



