गजब! सुक्खू सरकार ने भेजी निर्धन छात्रों की छात्रवृत्ति, अधिकारियों ने ऑफिस खर्चों में ही उड़ा दी

कांगड़ा (बैजनाथ)। हिमाचल प्रदेश में एक तरफ जहां सुक्खू सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने और गरीब छात्रों की मदद के लिए खजाना खोल रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर बैठे अधिकारी सरकार की इन कोशिशों पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। कांगड़ा जिले के प्रारंभिक शिक्षा खंड बैजनाथ से एक ऐसा गजब कारनामा सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां अधिकारियों ने गरीब और जरूरतमंद बच्चों के हक का पैसा डकार लिया और उसे बच्चों को देने के बजाय अपने ऑफिस के सुख.सुविधाओं और कार्यों पर खर्च कर डाला।

बीच रास्ते से ही ‘गायब’ गरीब छात्रों की राशि

मामला बेहद गंभीर है। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अनुसूचित जाति (SC), आईआरडीपी (IRDP) और गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति (Scholarship) की राशि जारी की थी। नियमतः यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जानी चाहिए थी ताकि वे अपनी पढ़ाई-लिखाई की सामग्री खरीद सकें।

  • इसके तहत पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को 250 रुपये,
  • तीसरी और चौथी कक्षा के बच्चों को 300 रुपये,
  • पांचवीं कक्षा के बच्चों को 350 रुपये दिए जाते हैं।

हैरानी की बात यह है कि सरकार द्वारा भेजी गई यह राशि बच्चों तक पहुंचने से पहले ही बीच रास्ते में गायब हो गई। जांच में खुलासा हुआ कि यह पैसा गायब नहीं हुआ, बल्कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर इसे कार्यालय के रोजमर्रा के खर्चों में स्वाहा कर दिया। महीनों तक बच्चों को स्कॉलरशिप नहीं मिली और मामला तब उजागर हुआ, जब इसकी भनक विभाग के बाहर तक पहुंची।

खुलासा होते ही मचा हड़कंप

जैसे ही यह मामला सामने आया] बैजनाथ स्थित शिक्षा विभाग के कार्यालय में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में विभाग की ओर से सफाई दी जाने लगी कि राशि गलती से गलत हेड में ट्रांसफर हो गई थी। अब उसे सही हेड में डालकर बच्चों को स्कॉलरशिप दी जा रही है और दावा किया गया कि 31 मार्च तक भुगतान पूरा कर दिया जाएगा।

लापरवाही या नियमों की अनदेखी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चों के लिए आई राशि को बिना अनुमति कैसे दूसरे कार्यों में खर्च किया गया। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। सरकारी नियमों के तहत छात्रवृत्ति की रकम किसी भी सूरत में अन्य मदों में खर्च नहीं की जा सकती। ऐसे में यह मामला केवल तकनीकी गलती नहीं, बल्कि गंभीर विभागीय लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।

अधिकारियों के बयान

प्रारंभिक शिक्षा खंड अधिकारी बैजनाथ सुभाष चंद का कहना है कि राशि गलती से दूसरे हेड में चली गई थी, जिसे अब सही कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह चूक कहां हुई, इसकी जांच की जाएगी। वहीं, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग धर्मशाला अजय सकलानी ने कहा कि उनके संज्ञान में ऐसा मामला नहीं है और छात्रवृत्ति की राशि को कहीं और खर्च नहीं किया जा सकता। उन्होंने भी पूरे प्रकरण की जानकारी लेने की बात कही है।

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