आयुर्वेद में वैध गोयल के अनुसार मूली का सेवन अगर खास तरीके से किया जाए तो पुरानी से पुरानी एसिडिटी को कंट्रोल किया जा सकता है।

रेडिश जिसे भारत में मूली (Mooli) कहा जाता है। ये सब्जी ब्रैसिकेसी (सरसों) परिवार की एक कुरकुरी जड़ वाली सब्ज़ी है। इसका हल्का तीखा स्वाद और फ्रेश क्रंच इसे सलाद, सूप और पारंपरिक भारतीय व्यंजनों का अहम हिस्सा बनाता हैं। मूली सफेद, लाल, बैंगनी और काले जैसे कई रंगों में मिलती है। यह सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद होती है। मूली की जड़ और पत्ते दोनों खाने योग्य होते हैं और इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स, फाइबर और ज़रूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। सर्दी में इस सब्जी का सेवन इम्यूनिटी को बूस्ट करता है। ये सब्जी लिवर की कार्यक्षमता सुधारने में बेहद मददगार साबित होती है। ये एक लो-कैलोरी सुपर वेजिटेबल हैं जो ओवरऑल हेल्थ को सपोर्ट करती है।
नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार, मूली कैलोरी में कम लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर होती है। खासतौर पर इसके पत्ते, जो जड़ की तुलना में लगभग 2 गुना अधिक विटामिन C से भरपूर होते हैं। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। इसमें 3 से 10 गुना ज्यादा कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, जिंक, राइबोफ्लेविन और फोलेट मौजूद होता है। मूली में मौजूद सभी पोषक तत्व मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं और हार्ट हेल्थ में सुधार करते हैं।
इस सब्जी का सेवन करने से पाचन में सुधार होता है और गट मूवमेंट भी दुरुस्त होती है। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में ये सब्जी बेहद मददगार साबित होती है। सर्दी में मूली और इसके पत्तों को एक साथ खाने से बॉडी को भरपूर पोषण मिलता है।
आयुर्वेद में इस सब्जी को पाचन के लिए वरदान कहा गया है। वर्धा आयुर्वेद में वैध सुभाष गोयल के अनुसार मूली का सेवन अगर खास तरीके से किया जाए तो पुरानी से पुरानी एसिडिटी को कंट्रोल किया जा सकता है। मूली में खास तरीके से सेंधा नमक लगाकर इस्तेमाल करें तो ये क्रॉनिक एसिडिटी का इलाज बनती है। आइए एक्पपर्ट से जानते हैं कि पाचन को दुरुस्त करने के लिए और क्रॉनिक एसिडिटी का इलाज करने के लिए मूली में किस तरह नमक लगाकर उसका सेवन करें।
मूली में सेंधा नमक लगाकर कैसे सेवन करें
एक्सपर्ट ने बताया रात में मूली को छील लें और उसे कद्दूकस पर बारीक घिस लें। इस मूली को जाली वाले बर्तन में रख दें ताकि इसका पानी नीचे टपकता रहे। इस मूली में एक चम्मच सेंधा नमक लगाएं और उसे अच्छे से मिक्स कर लें। नमक लगाने से मूली से पानी टपकना शुरु हो जाता है। मूली से पानी टपकाने का खास मकसद है कि मूली खाने से जो पेट में गंदी गैस बनती है वो बनना बंद हो जाएगी।
इस मूली को रात भर ऐसे ही खुले बर्तन में रखा रहने दें और सुबह इसे अच्छे से धो लें और उसे खा लें। मूली में नमक लगाने से मूली का सारा पानी निकल जाता है और मूली के सारे मिनरल्स उस पानी में आ जाते हैं। मूली को इस तरह रात में रखकर खाने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी। इस तरह मूली का सेवन करने से बिगड़ा हुआ पाचन सुधर जाएगा।
मूली फाइबर से भरपूर होती है, जो पाचन को बेहतर रखने में अहम भूमिका निभाती है। यह मल त्याग को नियमित करती है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाती है। मूली में मौजूद प्राकृतिक एंजाइम पित्त (Bile) के स्राव को बढ़ाते हैं, जिससे फैट और भारी भोजन आसानी से पचता है। कच्ची मूली या मूली का जूस पेट की एसिडिटी को संतुलित करता है और गैस व सूजन की परेशानी कम करता है



