
नोएडा पुलिस पर एक महिला अधिवक्ता ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद मामला देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सेक्टर-126 थाने में कथित तौर पर महिला को अवैध रूप से रोके जाने, उत्पीड़न और धमकियों के मामले में संज्ञान लेते हुए पुलिस से उस अवधि का सीसीटीवी फुटेज तलब किया है। साथ ही पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा गया है। इस केस की अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी।
रात में थाने पहुंची, अगले दिन दोपहर तक रोके जाने का आरोप
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, महिला वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि 3 दिसंबर 2025 की रात वह अपने एक क्लाइंट की मदद के लिए सेक्टर-126 थाने पहुंची थीं। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने उन्हें गैरकानूनी तरीके से वहीं बैठा लिया और करीब 14 घंटे तक थाने में रोके रखा।
महिला का कहना है कि उन्हें रात करीब 12:30 बजे से अगले दिन दोपहर 2 बजे तक बिना किसी गिरफ्तारी मेमो या कानूनी प्रक्रिया के थाने में रखा गया, जबकि नियमों के मुताबिक किसी महिला को रात में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
मारपीट, कपड़े उतारने की कोशिश और यौन उत्पीड़न का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिरासत के दौरान पुरुष पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की, कपड़े उतारने की कोशिश की गई और यौन दुर्व्यवहार किया गया। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। महिला वकील का दावा है कि इस दौरान उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
पिस्टल दिखाकर एनकाउंटर की धमकी देने का दावा
महिला अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनकी गर्दन पर सरकारी पिस्टल सटा दी और कहा कि अगर उन्होंने बात नहीं मानी तो फर्जी एनकाउंटर कर दिया जाएगा। इस धमकी से वह बुरी तरह डर गई थीं।
मोबाइल जब्त कर सबूत मिटाने का भी आरोप
याचिका के अनुसार, पुलिस ने उनसे जबरन मोबाइल फोन का पासवर्ड लिया और उसमें मौजूद वीडियो व अन्य सबूत डिलीट कर दिए। आरोप है कि थाने के सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए गए ताकि कोई रिकॉर्ड न रहे।
इसके अलावा, महिला का कहना है कि उन्हें हिरासत के दौरान न खाना दिया गया, न पानी और न ही परिवार या किसी कानूनी मदद से मिलने दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और संबंधित समय का सीसीटीवी फुटेज पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट अब 7 जनवरी को इस मामले की अगली सुनवाई करेगा।
फिलहाल यह मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है और पुलिस की ओर से अभी तक आरोपों पर विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है।