पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की संभावनाएं आगे बढ़ गई हैं. सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियां साथ मिलकर चुनाव लड़ने की दिशा में बातचीत कर रही हैं और गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है. दिवाली के बाद गुरु नानक जयंती के आसपास गठबंधन का औपचारिक ऐलान हो सकता है. गठबंधन के ऐलान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बठिंडा में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है.

इसी रैली के मंच से बीजेपी और अकाली दल के साथ आने की औपचारिक घोषणा संभव है. बठिंडा को बादल परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित रैली और गठबंधन के ऐलान के लिए इस शहर का चयन राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी इनमें से 47 से 48 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. बाकी सीटों पर अकाली दल चुनाव लड़ेगी.

अमित शाह के बयान के बाद सुखबीर बादल ने भी दिए थे संकेत

बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन की अटकलों को उस समय और हवा मिली, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद NDA की सरकार बनने की बात कही थी. अमित शाह के इस बयान के बाद अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी गठबंधन को लेकर अपनी पार्टी का रुख साफ किया था.

पंजाब के राज्यपाल से मुलाकात के बाद सुखबीर बादल ने कहा था कि अकाली दल उन राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है, जो उसकी विचारधारा और कार्यक्रमों से सहमत हों. उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को पंजाब का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए इन दोनों दलों के साथ किसी भी तरह की राजनीतिक समझौते की संभावना से इनकार किया था. सुखबीर बादल ने पिछली अकाली दलबीजेपी सरकार का जिक्र करते हुए कहा था कि दोनों दलों के शासन में पंजाब में अमनशांति थी और राज्य में विकास हुआ था.

सीटों के बंटवारे पर बातचीत, BJP को मिल सकती हैं 4748 सीटें

सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी की रणनीति पहले के मुकाबले बदली हुई बताई जा रही है. 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल ने 94 और बीजेपी ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था. यानी उस समय अकाली दल बड़े भाई की भूमिका में था. अब बीजेपी पंजाब में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है और अधिक सीटों पर दावेदारी की चर्चा है. ऐसे में बीजेपी की कोशिश समान सीट पर चुनाव लड़ने की होगी.

1997 से 2012 तक तीन बार बनी थी अकालीBJP सरकार

अकाली दल और बीजेपी का गठबंधन पंजाब की राजनीति में करीब 23 साल तक प्रभावशाली रहा. दोनों दलों ने 1997 में पहली बार गठबंधन सरकार बनाई थी. इसके बाद 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों ने मिलकर जीत दर्ज की. 2012 में लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर गठबंधन ने पंजाब में लगातार सरकार दोहराने का रिकॉर्ड बनाया.

तीनों विधानसभा चुनावों में गठबंधन का प्रदर्शन इस तरह रहा—

  • 1997: अकाली दल ने 75 और बीजेपी ने 18 सीटें जीतीं. गठबंधन को कुल 93 सीटें मिलीं.
  • 2007: अकाली दल को 49 और बीजेपी को 19 सीटें मिलीं. गठबंधन ने कुल 68 सीटें हासिल कीं.
  • 2012: अकाली दल ने 56 और बीजेपी ने 12 सीटें जीतीं. गठबंधन के खाते में कुल 68 सीटें आईं.

कृषि कानूनों के विरोध में 2020 में टूटा था गठबंधन

दोनों दलों के बीच करीब 23 साल पुराना औपचारिक गठबंधन सितंबर 2020 में टूट गया था. केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में किसानों का आंदोलन तेज हुआ तो अकाली दल ने इन कानूनों का विरोध किया. पार्टी की नेता हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद अकाली दल ने NDA से अलग होने का ऐलान कर दिया. गठबंधन टूटने के बाद 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दल अलगअलग मैदान में उतरे. 2022 में अकाली दल को सिर्फ तीन और बीजेपी को दो विधानसभा सीटें मिली थीं. वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पंजाब में एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि अकाली दल को एक सीट मिली.