उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक घर में चल रहे पांच दिवसीय अनुष्ठान के दौरान खूनी संघर्ष में तीन लोगों की हत्या कर दी गई और वारदात को अंजाम देने वाला आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

शंभूपुर गांव के एक घर में बाधा निवारण से जुड़ा पांच दिवसीय अनुष्ठान चल रहा था। इस अनुष्ठान को छितौना भटौली निवासी 55 वर्षीय अखिलेश मिश्रा समेत कुछ ब्राह्मण करा रहे थे। घटना के दिन अनुष्ठान का चौथा दिन था। चश्मदीद हिमांशु मिश्रा के मुताबिक, शाम करीब पांच बजे अरविंद सिंह बाजार से घर लौटा और अनुष्ठान करा रहे लोगों से आधार कार्ड मांगने लगा। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि बात पहले लाठीडंडों तक पहुंची और फिर आरोपी ने असलहा निकाल लिया।
बीचबचाव करने आईं अरविंद की पत्नी बबिता सिंह अनुष्ठान करा रहे लोगों को बचाने का प्रयास कर रही थीं, तभी चली गोली बबिता को लग गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। इसके बाद गोलीबारी में पठखौली निवासी 42 वर्षीय महेंद्र पाठक भी घायल होकर मौके पर गिर पड़े, जिनकी बाद में मौत हो गई। चश्मदीद के अनुसार, उनके पिता अखिलेश मिश्रा ने गोली लगने के बाद भागकर अपनी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उन पर दोबारा गोली चला दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस तरह इस खूनी घटना में बबिता सिंह, महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा की जान चली गई।
लगातार गोलियों की आवाज से पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई और घर के बाहर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान आरोपी अरविंद अपने तीन छोटे बच्चों—पांच वर्षीय परी, छह वर्षीय लक्खा और सात माह की बच्ची—को लेकर घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। कमरे के भीतर तीन मासूमों की सुरक्षा पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, डीआईजी आजमगढ़ सुनील कुमार सिंह और एडीजी जोन वाराणसी नवीन अरोड़ा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए।
एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पूछताछ में यह बात सामने आई कि पिछले कुछ समय से आरोपी अरविंद का व्यवहार असामान्य था और उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। परिजनों का भी यह मानना था कि अरविंद पर भूतप्रेत की बाधा है, जिसके निवारण के लिए ही घर में यह अनुष्ठान कराया जा रहा था। पुलिस ने जल्दबाजी करने के बजाय बातचीत और समझाइश का रास्ता अपनाया ताकि बच्चों को सुरक्षित बचाया जा सके।
एडीजी जोन वाराणसी नवीन अरोड़ा ने पूरी स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी की मनःस्थिति और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने देर रात तक घेराबंदी जारी रखी। इसी दौरान अचानक अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। जब पुलिस के जवान दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुए, तो वहां एक बच्चा घायल अवस्था में मिला और आरोपी ने पुलिस पर धुआंधार फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में आरोपी पुलिस की गोली से घायल हो गया।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो सुरक्षित बच्चों को सकुशल बाहर निकालकर उनके रिश्तेदारों के सुपुर्द कर दिया, जबकि एक घायल बच्चे और आरोपी को सुरक्षा के बीच इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। अस्पताल में इलाज के दौरान आरोपी अरविंद की मौत हो गई। एक तरफ इस घटना ने तीन हंसतेखेलते परिवारों को उजाड़ दिया, तो दूसरी तरफ पुलिस की सूझबूझ और लंबी मशक्कत के बाद मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकी।



