हिमाचली खबर: दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय बकरीद यानी ईदउलअज़हा मनाने की तैयारी में है. भारत में यह 28 मई को मनाया जाएगा. इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अनुसार, जुल हिज्जा महीने में ईदउलअज़हा मनाया जाता है, जो इस्लामी साल का 12वां महीना होता है. भारत में आमतौर पर बकरीद के लिए ईदउलअज़हा या फिर बकरा ईद नाम का प्रयोग किया जाता है, लेकिन दुनिया के कई ऐसे देश हैं जहां इस त्योहार को अलगअलग नामों से जाना जाता है. खासकर अफ्रीकी देशों में.

Bakrid Names: बकरीद के 15 नाम जो 99 फीसदी भारतीय नहीं जानते​
Bakrid Names: बकरीद के 15 नाम जो 99 फीसदी भारतीय नहीं जानते​

सबसे पहले बात करते हैं तुर्किए यानी तुर्की की. यहां बकरीद को कुर्बान बयरामी के नाम से जाना जाता है. इसे कुर्बानी का त्योहर कहते हैं. वहीं सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में इस त्योहार को इदुलअज़हा और लेबारान हाजी कहते हैं.

बकरीद के और कितने नाम?

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इसे आमतौर पर बकरीद और बकरा ईद ही कहते हैं. अल्बानिया, बुल्गारिया में इसे कुर्बान बजरम कहते हैं. वहीं मोरक्को, अल्जीरिया, मिस्र और लीबिया में मुस्लिम आबादी के बीच बकरीद को ईदअलकबीर कहा जाता है. अफ्रीकी देशों की बात करें तो पश्चिम अफ्रीका और नाइजीरिया में इसे बब्बर सल्लाह कहते हैं.

भाेपाल में बकरीद की तैयारी की तस्वीर.

इंडोनेशिया और मिस्र में क्या कहते हैं?

भारत में बकरीद को ईदउलअजहा कहा जाता है, लेकिन कई देशों में इसे अलग नाम से भी जाना जाता है. तुर्की में इसे कुर्बना बायरामी कहते हैं. वहीं ईरान में ईदएकुर्बान कहते हैं. इंडोनेशिया में हारी राया हाजी, अफगानिस्तान में लोय अख्तर, मिस्र में ईदअलकबीर कहते हैं. साेमालिया में इसे सीदवयनी, कजाकिस्तान में कुर्बान ऐल के नाम से जाना जाता है.

अल्बानिया, बुल्गारिया में इसे कुर्बान बजरम कहते हैं.

बकरीद को भले ही कुर्बानी का त्योहार कहते हैं, लेकिन भाषाई तौर पर अलगअलग देशों में इसे अलग नाम दिया गया है. परंपरा भले ही एक है, लेकिन इसे अलगअलग नामों से जाना जाता है. जर्मनी में ओपफरफेस्ट, नीदरलैंड में ओफ़रफेस्ट के नाम से मनाई जाती है.

बकरीद के दिन कुर्बानी देते हैं.

बकरीद क्यों मनाते हैं?

ईदउलअज़हा को मुस्लिमों के पैग़म्बर और हज़रत मोहम्मद के पूर्वज हज़रत इब्राहिम की कुर्बानी को याद करने के लिए मनाते हैं. मुस्लिम समुदाय में मान्यता है कि अल्लाह ने इब्राहिम की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी थी. इब्राहिम ने उसे पूरा करने के लिए अपने जवान बेटे इस्माइल को अल्लाह के लिए कुर्बान करने का फैसला लिया था. जैसे ही वो बेटे को कुर्बान करने वाले थे उसी समय अल्लाह ने उसकी जगह एक दुंबे को रख दिया. उसी परंपरा को निभाते हुए दुनियाभर के मुस्लिम ईदउलअज़हा को मनाते हैं. इस दिन जानवर की कुर्बानी देते हैं.