हिमाचली खबर: Bhrigu Samhita: भृगु संहिता ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में से एक है। इसके रचनाकार वैदिक काल के ऋषि भृगु हैं। इस संहिता में कुंडलियों का गहरा अध्ययन किया गया है और कुंडली के आधार पर व्यक्ति के भूतभविष्य की जानकारी दी गई। इस संहिता का अध्ययन करके आप पिछले जन्मों के बारे में भी जान सकते हैं। भृगु संहिता में मनुष्य के भाग्योदय वर्ष के बारे में भी सूत्र दिए गए हैं आज हम आपको इसकी के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। 

Bhrigu Samhita: किस उम्र में चमकेगी आपकी किस्मत? भृगु संहिता के गुप्त सूत्रों से जानें अपना भाग्योदय वर्ष!​
Bhrigu Samhita: किस उम्र में चमकेगी आपकी किस्मत? भृगु संहिता के गुप्त सूत्रों से जानें अपना भाग्योदय वर्ष!​

लग्न से भाग्योदय की जानकारी 

नीचे दी गई कुंडली को देखकर सबसे पहले ये जान लें कि लग्न कहते किसे हैं। नीचे जो कुंडली दी गई है उसका लग्न वृषभ राशि का है क्योंकि दूसरी राशि वृषभ है। इसी तरह लग्न में 1 से 12 तक कोई भी नंबर लिखा हो सकता है। आइए अब जानते हैं लग्न के अनुसार भाग्योदय का वर्ष क्या होगा। 

  1. मेष लग्न 16, 22, 28, 32 और 36 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  2. वृषभ लग्न 25, 28, 36 और 42 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  3. मिथुन लग्न 22, 32, 35, 36 और 42 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  4. कर्क लग्न 16, 22, 24, 25, 28 और 32 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  5. सिंह लग्न 16, 22, 24, 26, 28 और 32 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  6. कन्या लग्न 16, 22, 25, 32, 33, 34 और 36 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  7. तुला लग्न 24, 25, 32, 33 और 35 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  8. वृश्चिक लग्न 22, 24, 28 और 32 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  9. धनु लग्न 16, 22 और 32 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  10. मकर लग्न 25, 33, 35 और 36 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  11. कुंभ लग्न 25, 28, 36 और 42 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 
  12. मीन लग्न 16, 22, 28 और 33 वर्ष की उम्र में भाग्योदय। 

ग्रहों के अनुसार भाग्योदय का समय 

आपकी कुंडली में जो भी ग्रह सबसे अधिक बली यानि प्रबल होगा उसके अनुसार भी भृगु संहिता में भाग्योदय का समय बताया गया है। 

  • अगर कुंडली में गुरु ग्रह सबसे प्रबल हे तो 16 वर्ष की आयु में ही भाग्योदय होने की संभावना रहती है। 
  • सूर्य के बली होने पर 22वें वर्ष में व्यक्ति का भाग्योदय हो सकता है और ऐसे व्यक्ति को सरकारी क्षेत्र में सफलता मिलती है।
  • चंद्रमा के बली होने पर 22 वें वर्ष में व्यक्ति को सफलता मिलती है और भाग्योदय होता है। 
  • शुक्र के प्रबल होने पर व्यक्ति को 25 वें वर्ष में भाग्य का साथ मिलता है। 
  • मंगल के बली होने पर 28वें वर्ष में भाग्योदय होता है और सफलता मिलती है। 
  • बुध के प्रबल होने पर 32वें वर्ष में भाग्योदय होता है और करियर में ऊंचाइयां प्राप्त होती हैं। 
  • शनि के प्रबल होने पर 36वें साल में भाग्योदय होता है और जीवन में स्थिरता आती है। 
  • राहुकेतु के प्रबल होने पर 42वें से 48वें वर्ष के बीच व्यक्ति का भाग्योदय होता है। 

कुंडली में कौन सा ग्रह सबसे ज्यादा प्रबल है ये जानने के लिए आपको किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से संपर्क करना चाहिए।