ग्लोबल तेल बाजार में एक बार फिर उबाल आ गया है. 2022 के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे सप्लाई को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है. अमेरिकाईरान तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा और न्यूक्लियर डील पर ठहराव ने बाजार को अस्थिर कर दिया है. एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो तेल कीमतों में और बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है.

2022 के बाद कच्चे तेल में सबसे बड़ी तेजी, 120 डॉलर के पार हुआ क्रूड
2022 के बाद कच्चे तेल में सबसे बड़ी तेजी, 120 डॉलर के पार हुआ क्रूड

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, जहां ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. यह स्तर 2022 के बाद पहली बार देखने को मिला है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.

मिडिल ईस्ट टेंशन से मिला बल

इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर कड़ा रुख अपनाया है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर गतिरोध बना हुआ है. यह वही रणनीतिक मार्ग है, जहां से दुनिया के कुल तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है.

30 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड जून डिलीवरी के लिए करीब 1.96% बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 107 डॉलर के पार बना रहा. इससे पहले बुधवार को भी बाजार में जोरदार तेजी देखी गई थी, जब ब्रेंट करीब 6% और WTI 7% तक उछल गया था.

आगे कैसा रहे मार्केट?

एक्सपर्ट का मानना है कि अगर ईरान के तेल निर्यात पर रोक जारी रहती है और भंडारण क्षमता सीमित रहती है, तो सप्लाई की स्थिति और खराब हो सकती है. हालांकि यूएई की ओर से OPEC से अलग होकर उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसका असर तुरंत देखने को नहीं मिलेगा. आगे के आउटलुक पर नजर डालें तो कई संस्थानों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकाईरान वार्ता में प्रगति नहीं होती और तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट का लंबा बंद रहना वैश्विक बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि इस रास्ते से हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है. ऐसे में सप्लाई में बाधा सीधे कीमतों को ऊपर धकेल सकती है.