हिमाचल में B.Ed की पढ़ाई पर ब्रेक! अब टीचर बनने का सपना हुआ फीका, 1000 से ज्यादा सीटें खाली, निजी कॉलेज बंद करने की तैयारी में

हिमाचल प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देखने वाले युवाओं की घटती दिलचस्पी ने B.Ed कॉलेजों को गहरे संकट में डाल दिया है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय) से संबद्ध निजी B.Ed कॉलेजों के लिए सत्र 2025-26 किसी झटके से कम नहीं रहा। तमाम प्रयासों के बावजूद राज्य भर में 1,000 से अधिक सीटें खाली रह गई हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई निजी कॉलेज अब B.Ed कोर्स को स्थायी रूप से बंद करने पर विचार कर रहे हैं।

काउंसलिंग के बाद भी नहीं बढ़ी भीड़

एचपीयू की ओर से जारी अंतिम रिपोर्ट ने शिक्षा जगत को चौंका दिया है। आंकड़ों के मुताबिक इस सत्र में कुल 6,050 सीटों में से केवल 5,031 सीटों पर ही दाखिले हो पाए, जबकि 1,019 सीटें खाली रह गईं।
कॉलेजों ने छात्रों को आकर्षित करने के लिए प्रवेश में 10% अंकों की छूट दी, ऑनलाइन काउंसलिंग के साथ-साथ ऑफलाइन स्पॉट काउंसलिंग भी कराई गई, लेकिन इसके बावजूद उम्मीद के मुताबिक छात्र सामने नहीं आए।

निजी कॉलेजों पर सबसे ज्यादा मार

इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निजी B.Ed कॉलेजों पर पड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, निजी संस्थानों में HP कोटे की करीब 840 सीटें और मैनेजमेंट कोटे की 179 सीटें खाली रह गईं।
निजी कॉलेजों की पूरी अर्थव्यवस्था छात्रों की फीस पर टिकी होती है। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। मैनेजमेंट कोटे की सीटें खाली रहने से उनकी आय में भारी कमी आई है, जिससे कई संस्थानों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।

महंगी फीस और अनिश्चित भविष्य बनी वजह

शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों का मानना है कि B.Ed कोर्स से छात्रों का मोहभंग हो रहा है। निजी कॉलेजों की भारी-भरकम फीस और कोर्स पूरा करने के बाद नौकरी की अनिश्चितता युवाओं को पीछे हटा रही है।
छात्रों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद सरकारी शिक्षक भर्ती सीमित है, जबकि निजी क्षेत्र में भी स्थायी रोजगार की गारंटी नहीं मिलती।

कोर्स बंद करने की तैयारी में प्रबंधन

कम दाखिलों के चलते कॉलेज प्रबंधन की आर्थिक हालत बिगड़ती जा रही है। शिक्षकों का वेतन, भवन का रखरखाव और अन्य प्रशासनिक खर्च निकालना मुश्किल होता जा रहा है।
कई कॉलेज संचालकों ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर अगले सत्र में भी यही हाल रहा, तो B.Ed कोर्स बंद करना उनकी मजबूरी बन जाएगी। मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप की मांग तेज़ हो गई है।

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