
MP Teacher Salary Hike News: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले करीब 70 हजार शिक्षकों के लिए एक बहुत ही अच्छी खबर निकलकर आई है। लंबे समय से अपनी सीनियरिटी और हक की लड़ाई लड़ रहे शिक्षकों की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को साफ निर्देश दिया है कि पहली नियुक्ति की तारीख से सेवाकाल जोड़ने के पुराने फैसले को अगले 4 हफ्ते के भीतर लागू किया जाए। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है।
वरिष्ठता, एरियर और पेंशन में होगा बड़ा फायदा
अगर हाईकोर्ट के इस आदेश पर तय समय सीमा के अंदर अमल हो जाता है, तो प्रदेश के 70 हजार से ज्यादा शिक्षकों की किस्मत बदल जाएगी। सेवाकाल को शुरुआत से मान्य किए जाने से न केवल शिक्षकों की सीनियरिटी (वरिष्ठता) तय होगी, बल्कि उनका वेतन भी काफी बढ़ जाएगा। इसके अलावा, उन्हें पिछले सालों का रुका हुआ एरियर, बेहतर पेंशन सुविधाएं और पदोन्नति के अन्य वित्तीय लाभ भी समय पर मिल सकेंगे, जिनका वे सालों से इंतजार कर रहे थे।
कहां से शुरू हुआ था यह पूरा विवाद?
दरअसल यह पूरा मामला छठे वेतनमान और संविलियन से जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश में 1 जनवरी 2006 से छठा वेतनमान लागू माना गया था, लेकिन शिक्षकों को इसका असली फायदा 2016 से दिया जाने लगा। इतना ही नहीं, सरकार ने जब 2018 में संविलियन की प्रक्रिया शुरू की, तो उससे पहले शिक्षकों द्वारा दी गई सालों की सेवाओं को दरकिनार कर दिया गया। सरकार के इस रवैये से नाराज होकर शिक्षकों को मजबूरन न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट में भी चित हुई राज्य सरकार
हाईकोर्ट ने जब पहले शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था, तो राज्य सरकार इसे स्वीकार करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी। सरकार ने आदेश को चुनौती देते हुए एसएलपी (SLP) दाखिल की थी। हालांकि, 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद भी जब आदेश लागू नहीं हुआ, तो शिक्षकों ने दोबारा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर अपनी बात रखी।
जस्टिस दीपक खोट की बेंच में हुई अहम सुनवाई
इस पूरे अवमानना मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक खोट की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान जब सरकार की तरफ से आदेश का पालन करने के लिए थोड़ा और समय मांगा गया, तो कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। हालांकि, बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि अब और ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकार को हर हाल में 4 हफ्तों के भीतर शिक्षकों के पक्ष में फैसला लागू करना होगा। इस निर्णय के बाद से ही मध्य प्रदेश के शिक्षक संघों में खुशी की लहर है।



