स्ट्रोक से अपने बोलने की ताकत को खो चुके लोगों के लिए एक म्यूजिक थेरेपी काम की साबित हो सकती है. दरअसल, आईआईटी दिल्ली, एम्स नई दिल्ली और इब्हास ने मिलकर पोस्टस्ट्रोक अफेजिया के इलाज के लिए पहली हिंदी Melodic Intonation Therapy विकसित की है. एक्सपर्ट बताते हैं कि ये म्यूजिक बेस्ड थेरेपी है और इसमें धुन और रिदम की हेल्प ली जाती है. ऐसा करके कोशिश की जाती है कि जो लोग स्ट्रोक की वजह से अपनी बोलने की क्षमता को खो चुके हैं, इससे इसे वापस लाया जा सके.

बोल न पाने की क्षमता को फिर से पाना एक तरह का चमत्कार साबित हो सकता है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। इस दिक्कते को खत्म करने की ये पहल बेहद कारगर साबित हो सकती है. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। जानें इसके बारे में सबकुछ….
क्या कहती है रिसर्च
यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल एफ़ेशियोलॉजी में प्रकाशित हुआ है. दरअसल, स्ट्रोक के बाद कई मरीज बोल नहीं पाते, लेकिन उन्हें भाषा समझ आती है और वे पुराने गाने गा सकते हैं. MIT इसी क्षमता का इस्तेमाल कर बोलने की ताकत बढ़ाती है. अब तक यह थेरेपी अंग्रेजी और कुछ पश्चिमी भाषाओं में उपलब्ध थी. हिंदी के लिए पहली बार इसका मान्य संस्करण तैयार किया गया है.
शोधकर्ताओं ने सिर्फ अंग्रेजी शब्दों का अनुवाद नहीं किया, बल्कि हिंदी की लय और बोलने के तरीके के अनुसार पूरी थेरेपी को तैयार किया. पायलट स्टडी में 6 हिंदी भाषी स्ट्रोक मरीजों को शामिल किया गया. सभी मरीजों को 40 सत्र दिए गए. हर सत्र 45 से 60 मिनट का था. सभी 6 मरीजों में बोलने की क्षमता में clinically meaningful सुधार देखा गया. मरीज पहले से लंबे वाक्य बोलने लगे, ज्यादा सहजता से बात करने लगे और उनकी जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ.
कोई बडे़ साइड इफेक्ट का खतरा नहीं
इलाज के दौरान कोई बड़ा साइड इफेक्ट नहीं देखा गया. शोधकर्ताओं ने कहा कि अभी यह शुरुआती अध्ययन है क्योंकि इसमें केवल 6 मरीज शामिल थे. बड़े स्तर पर और अध्ययन की जरूरत है. टीम भविष्य में डिजिटल टूल्स भी विकसित करना चाहती है ताकि यह थेरेपी बड़े शहरों के अस्पतालों से बाहर भी ज्यादा मरीजों तक पहुंच सके. इस शोध का नेतृत्व IIT दिल्ली के प्रो. एन. एम. अनूप कृष्णन, प्रो. राहुल गर्ग और AIIMS की प्रो. दीप्ति विभा ने किया.



