नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार रोधी बिलों का मकसद गैर बीजेपी सरकारों को कमजोर करना नहीं है। गृह मंत्री अमित शाह के मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रस्तावित कानूनों से आरोपी को पद से हटाया जाएगा, मगर उसकी विधायी सदस्यता बनी रहेगी। MHA ने प्रस्तावित कानूनों की जांच कर रही संसदीय समिति को बताया कि चूंकि सत्ताधारी पार्टी का विधायी बहुमत प्रभावित नहीं होता है और पद से हटाए गए मंत्री की जगह उसी पार्टी का कोई अन्य सदस्य ले सकता है।

गृह मंत्रालय ने विपक्ष के आरोपों को कर दिया खारिज
गृह मंत्रालय ने विपक्ष के उस आरोप को खारिज कर दिया है कि उसके भ्रष्टाचाररोधी बिल संघवाद को कमजोर करते हैं और इनका मकसद बीजेपी के प्रतिद्वंद्वियों द्वारा चलाई जा रही राज्य सरकारों को अस्थिर करना है।

मंत्रालय ने कहा कि इन प्रावधानों के तहत अगर कोई आरोपी लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसे पद से हटा दिया जाएगा, लेकिन उसकी विधायी सदस्यता बनी रहेगी। इससे सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आगामी मानसून सत्र में अमित शाह संसद में भ्रष्टाचार के आरोपी प्रधानमंत्रीमुख्यमंत्री या मंत्रियों को हटाने वाले बिल को पेश कर सकते हैं।

अगर कोई आरोपी लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसे पद से हटा दिया जाएगा, लेकिन उसकी विधायी सदस्यता बनी रहेगी। इससे सरकार की स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

MHA ने संसदीय समिति को बता दी पूरी बात
MHA ने संसदीय समिति को बताया कि पद से हटाए गए मंत्री की जगह उसी पार्टी का कोई अन्य सदस्य ले सकता है। ऐसे में इन बिलों से लोकतांत्रिक जनादेश ‘पूरी तरह से अप्रभावित’ रहता है। सूत्रों ने बताया कि बिलों में प्रस्ताव है कि अगर पीएम, सीएम या मंत्री गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें खुद ही पद से हटा दिया जाएगा।

समिति के आने वाले दिनों में अपनी रिपोर्ट को अपनाने और 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दौरान इसे लोकसभा में पेश करने की संभावना है।

मंत्रालय ने बिलों के मकसद को सही ठहराया
मंत्रालय ने बिलों के मकसद को सही ठहराते हुए कहा कि पीएम, मुख्यमंत्री या मंत्री एक कार्यकारी पद संभालते हैं जो राष्ट्रीय या राज्य के मामलों को प्रभावित करता है।

साथ ही लंबे समय तक हिरासत में रहने से इन भूमिकाओं को प्रभावी ढंग से निभाने की उनकी क्षमता में बाधा आती है, जिससे शासन में गतिरोध पैदा हो सकता है।

विपक्षी दलों ने जताई थी चिंता, मंत्रालय ने किया साफ
बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संसद की संयुक्त समिति ने MHA को भेजे अपने संदेश में विपक्षी दलों सहित कई हितधारकों द्वारा उठाए गए कई मुद्दों की ओर इशारा किया था, जिनका मंत्रालय ने जवाब दिया।

इस दावे का जवाब देते हुए कि पद से खुद ही हटाने से चुनावों के माध्यम से व्यक्त जनइच्छा कमजोर होगी, मंत्रालय ने कहा कि जनादेश न तो पूर्ण है और न ही बिना शर्त, क्योंकि संविधान कई जवाबदेही तंत्र प्रदान करता है जो नए चुनावों के बिना नेतृत्व में बदलाव का कारण बन सकते हैं।

नया नेता चुनने का अवसर होता है
गृह मंत्रालय ने कहा कि पीएमसीएम को हटाने वाले बिल को लेकर कहा कि सत्ता में मौजूद पार्टी या गठबंधन के पास एक नया नेता चुनने का अवसर होता है जिसे बहुमत का समर्थन प्राप्त हो।
मंत्रालय ने कहा, ‘जनइच्छा को नकारने के बजाय यह प्रावधान यह सुनिश्चित करके इसकी रक्षा करता है कि शासन प्रभावी और भरोसेमंद बना रहे और ऐसी स्थिति को रोकता है जहां सदन के सामने पेश होने या आधिकारिक कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थ नेता अनिश्चित काल तक पद पर बना रहे।’