UP Assembly Elections 2027: उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव समय से पहले कराए जाने की अटकलों पर चुनाव आयोग ने विराम लगा दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि यूपी विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे।

CEC ज्ञानेश कुमार ने दूर की सभी अटकलें
नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में आयोजित अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन2026 के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि जनगणना एक कानूनी प्रक्रिया है, जबकि विधानसभा चुनाव संवैधानिक दायित्व हैं। ऐसे में यदि जरूरत पड़ी तो जनगणना के कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे।
यूपी समेत इन राज्यों में अगले साल होंगे चुनाव
अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर की विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
उत्तर प्रदेश 22 मई 2027
उत्तराखंड 28 मार्च 2027
पंजाब 16 मार्च 2027
गोवा 14 मार्च 2027
मणिपुर 13 मार्च 2027
परंपरा के अनुसार इन राज्यों में विधानसभा चुनाव फरवरीमार्च के दौरान कराए जाते रहे हैं।
जनगणना को लेकर बनी थी असमंजस की स्थिति
केंद्र सरकार ने अगले वर्ष 1 से 28 फरवरी के बीच जनगणना के तीसरे चरण का कार्यक्रम तय किया है। इस दौरान गणनाकर्मी घरघर जाकर जनगणना करेंगे। इसी वजह से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि चुनाव समय से पहले कराए जा सकते हैं या चुनाव कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है। हालांकि चुनाव आयोग के ताजा बयान के बाद यह साफ हो गया है कि विधानसभा चुनाव अपने तय समय पर ही होंगे और जरूरत पड़ने पर जनगणना के कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है।
फरवरीमार्च में ही हो सकते हैं यूपी चुनाव
पिछले दो विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश में चुनाव हमेशा फरवरीमार्च के दौरान ही कराए गए हैं। 2017 में मतदान फरवरी और मार्च में हुआ, जबकि नतीजे 11 मार्च को घोषित हुए। 2022 में चुनाव की अधिसूचना 8 जनवरी को जारी हुई थी। मतदान 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच सात चरणों में हुआ और 10 मार्च को परिणाम घोषित किए गए। इसी परंपरा को देखते हुए माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव भी फरवरीमार्च में होंगे, जबकि अधिसूचना जनवरी में जारी की जा सकती है। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
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95 करोड़ मतदाताओं की सूची ‘जीवंत दस्तावेज’
मीडिया सम्मेलन के दौरान चुनाव आयोग ने बताया कि देश की करीब 95 करोड़ मतदाताओं वाली मतदाता सूची एक ‘जीवंत दस्तावेज’ है, जिसे लगातार अपडेट किया जाता है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची की निगरानी और सत्यापन के लिए 12 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी और 15 लाख से ज्यादा बूथ लेवल एजेंट कार्यरत हैं। चुनाव आयोग ने दोहराया कि भारत में चुनाव संविधान, जनप्रतिनिधित्व कानून और आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ कराए जाते हैं।
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