अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. केंद्र सरकार के नए लेबर कोड के तहत सैलरी देने के नियम पहले से ज्यादा स्पष्ट कर दिए गए हैं. कोड ऑन वेजेज के मुताबिक, अगर किसी कर्मचारी को हर महीने वेतन मिलता है, तो अगले महीने की 7 तारीख तक उसकी सैलरी खाते में आ जानी चाहिए. यही नहीं, अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ देता है, उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है या किसी कारण उसकी सेवा समाप्त कर दी जाती है, तो कंपनी को दो कार्य दिवस के भीतर उसका पूरा बकाया भुगतान करना होगा. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।

किसे मिलेगा इस नियम का फायदा?

पहले वेतन भुगतान से जुड़े कई नियम केवल एक निश्चित वेतन सीमा तक के कर्मचारियों पर लागू होते थे, लेकिन नए कोड ऑन वेजेज के तहत यह नियम सभी कर्मचारियों पर लागू होंगे, चाहे उनकी सैलरी कम हो या ज्यादा. इसका मतलब है कि अब हर कर्मचारी को समय पर वेतन मिलने का कानूनी अधिकार मिलेगा.

कब तक देनी होगी सैलरी?

नए नियमों के अनुसार वेतन भुगतान की समयसीमा इस प्रकार होगी. मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अगले महीने की 7 तारीख से पहले वेतन देना होगा. साप्ताहिक वेतन पाने वालों को सप्ताह के आखिरी कार्य दिवस तक भुगतान करना होगा. 15 दिन के आधार पर वेतन पाने वालों को 15 दिन की अवधि खत्म होने के दो दिन के भीतर भुगतान करना होगा. दैनिक मजदूरी पर काम करने वालों को उसी दिन का भुगतान काम खत्म होने के बाद करना होगा.

नौकरी छोड़ने पर कब मिलेगा पूरा पैसा?

अगर कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है, कंपनी उसे निकाल देती है या उसकी नौकरी समाप्त कर दी जाती है, तो कंपनी को दो कार्य दिवस के भीतर उसका पूरा बकाया वेतन, छुट्टियों का पैसा और अन्य देय राशि का भुगतान करना होगा. इस नियम का उद्देश्य कर्मचारियों को लंबे समय तक अपने पैसे का इंतजार करने से बचाना है.

अगर कंपनी सैलरी देने में देरी करे तो क्या होगा?

अगर किसी कंपनी ने समय पर वेतन नहीं दिया या बिना अनुमति कर्मचारी की सैलरी से पैसा काट लिया, तो कर्मचारी शिकायत दर्ज करा सकता है. इसके लिए सरकार इंस्पेक्टरकमफैसिलिटेटर नियुक्त करेगी, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि कंपनियां नियमों का पालन करें. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। कर्मचारी तीन साल के भीतर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है. अगर जांच के बाद संबंधित अधिकारी कंपनी को वेतन या मुआवजा देने का आदेश देता है और कंपनी फिर भी भुगतान नहीं करती, तो सरकार उस राशि की वसूली भूमि राजस्व की तरह कर सकती है.

पुराने नियमों से क्या बदला?

नया कोड ऑन वेजेस पुराने पेमेंट ऑफ वेजेस एक्ट 1936 सहित वेतन से जुड़े कई अलगअलग कानूनों की जगह एक नया और एकीकृत कानून है. इसमें सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब समय पर वेतन देने और गलत तरीके से कटौती न करने के नियम हर कर्मचारी पर लागू होंगे, चाहे उसकी सैलरी कितनी भी हो. इसके अलावा कंपनियों को कर्मचारियों को वेतन पर्ची देना भी अनिवार्य होगा. यह पर्ची कागज या डिजिटल दोनों रूपों में दी जा सकती है. साथ ही, कंपनी वेतन से कितनी कटौती कर सकती है, इसके लिए भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं.