Friendship Day 2026: सोशल मीडिया के दौर में एक पोस्ट करके हम अपने सारे दोस्तों को एक साथ फ्रेंडशिप की शुभकामनाएं भेज देते हैं, लेकिन 90 के दशक में ऐसा नहीं था। उस दौर में इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप व फेसबुक जैसी चीजें नहीं थी और न ही ऑनलाइन गिफ्ट का कोई रिवाज था। इसके बावजूद फ्रेंडशिप डे पर एक्साटमेंट बनी रहती थी।

फ्रेंडशिप बैंड, हैंडमेड ग्रीटिंग कार्ड और दोस्तों के साथ बिताया गया समय ही इस दिन को स्पेशल बनाने के लिए काफी था।
फ्रेंडशिप बैंड का था अलग ही क्रेज
90 के दौर में दोस्ती के इस विशेष दिन पर बाजार रंगबिरंगे फ्रेंडशिप बैंड से सज जाते थे। स्कूल और कॉलेज के छात्र अपने दोस्तों के लिए खास बैंड खरीदते थे। कई लोग खुद भी रंगीन धागों से बैंड बनाकर अपने सबसे खास दोस्त की कलाई पर बांधते थे। ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। तब यह दोस्ती का सिंबल हुआ करता था।
ग्रीटिंग कार्डस के जरिए बयां करते थे मन की बात
तब आज के जमाने की तरह केवल हैप्पी फ्रेंडशिप डे लिखकर विश करना काफी नहीं माना जाता था। लोग अपने दोस्तों के लिए हाथ से कार्ड बनाते थे या ग्रीटिंग कार्ड खरीदकर उस पर दिल की बात लिखते थे। कई बार इन कार्ड्स को लोग सालों तक संभालकर रखते थे।
मुलाकात था सबसे बड़ा तोहफा
उस समय स्मार्टफोन और सोशल मीडिया नहीं थे, इसलिए दोस्त दोस्ती के इस दिन को सेलिब्रेट करने के लिए मिलते थे। पार्क, कैंटीन या किसी पसंदीदा जगह पर साथ समय बिताना ही सबसे बड़ा सेलिब्रेशन होता था। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। बातचीत, हंसीमजाक और पुरानी यादें इस दिन की पुंजी होती थी, जिसे आज भी याद करके ठहाका लगाया जा सकता है।
फोटो कम, यादें ज्यादा
90 के दशक में हर पल कैमरे में कैद नहीं होता था। फोटो खिंचवाना भी खास अवसर हो पाता था। इसलिए की सबसे खास यादें तस्वीरों में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में बस जाती थीं।
छोटेछोटे गिफ्ट से जताते थे अपनापन
दोस्त एकदूसरे को , कीचेन, पेन, डायरी या छोटेछोटे गिफ्ट देते थे। इनकी कीमत नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपा प्यार और अपनापन मायने रखता था।
सोशल मीडिया ने बदल दिए दोस्ती के मायने
आज फ्रेंडशिप डे पर इंस्टाग्राम स्टोरी, फेसबुक पोस्ट, रील और व्हाट्सएप स्टेटस लगाए जाते हैं। डिजिटल दुनिया ने शुभकामनाएं देना भले ही आसान कर दिया हो, लेकिन कई लोग मिलकर खुशी मनाने में यकीन करते हैं।



