आम धारणा है कि Gen Z केवल महंगे कैफे, लेटेस्ट गैजेट्स, फैशन और ट्रेवलिंग पर पैसे उड़ाती है. हालांकि, हालिया वित्तीय आंकड़ों और बाजार सर्वेक्षणों ने इस पुरानी धारणा को पूरी तरह खारिज कर दिया है. सच यह है कि आज की युवा पीढ़ी पिछली पीढ़ियों की तुलना में बेहद कम उम्र से ही अनुशासित निवेश कर रही है और अपने फाइनेंशियल फ्यूचर को लेकर काफी गंभीर है.

JPMorganChase में सीनियर एसोसिएट के तौर पर काम कर रहे 29 साल के मंजीत कुमार ईटी की रिपोर्ट में कहते हैं कि कुछ लोगों की ये आम राय बन गई है कि Gen Z बेपरवाह है और काम या पैसे के मामलों में गंभीर नहीं है, लेकिन ये सच नहीं है. उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि हमें क्या चाहिए, उसे कैसे पाना है, और हम इस बारे में खुलकर बात करते हैं. ज्यादातर जानकार इस बात से सहमत हैं कि यह पीढ़ी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले ज्यादा खुलकर बात करने वाली, बेहतर जानकारी रखने वाली और अलग है—चाहे बात पैसे से जुड़ी प्राथमिकताओं की हों या फिर इंवेस्टमेंट बिहेवियर की.
फाइनेंशियल प्लानिंग स्टैंडर्ड्स बोर्ड इंडिया के CEO रमेश विश्वनाथन मीडिया रिपोर्ट में कहते हैं कि पैसे के प्रति Gen Z का नजरिया उस माहौल को दिखाता है जिसमें वे बड़े हुए हैं. मिलेनियल्स और Gen X की तुलना में, उन्हें बहुत कम उम्र से ही जानकारी, डिजिटल टूल्स, टेक्नोलॉजी और पैसे से जुड़ी जानकारी तक पहुंच मिली है, जिससे पर्सनल फाइनेंस के बारे में उनकी समझ बढ़ी है.
निवेश का तरीका
शायद यह पहली ऐसी पीढ़ी है जो इतनी कम उम्र में निवेश करना शुरू कर रही है. NSE मार्केट पल्स जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, नए निवेशकों की औसत उम्र 201920 में 29 साल थी, जो अब घटकर 27 साल हो गई है. सूरत के 22 साल के हनोज भगत ने 11 साल की उम्र में निवेश करना शुरू किया था—वही उम्र जब वॉरेन बफेट ने निवेश शुरू किया था. भगत ईटी की रिपोर्ट में कहते हैं कि मैंने अपनी पॉकेट मनी से शेयर खरीदना शुरू किया क्योंकि मैं अपनी मां के साथ टीवी पर बिजनेस चैनल देखता था और मुझे लगा कि फिक्स्ड डिपॉज़िट से ज्यादा रिटर्न पाना बेहतर है. उन्होंने हाल ही में म्यूचुअल फंड, सोना और चांदी में भी निवेश करना शुरू किया है.
टेक्नोलॉजी की वजह से Gen Z बहुत कम रकम से निवेश शुरू कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें कंपाउंडिंग का फायदा बहुत पहले मिल सकता है. स्टेबल मनी के कोफाउंडर और CEO सौरभ जैन कहते हैं कि सबसे बड़ा बदलाव जानकारी लेने के तरीके में आया है. किसी एक सलाहकार या एक ही सोर्स पर निर्भर रहने के बजाय, वे फैसला लेने से पहले कई प्लेटफॉर्म पर अलगअलग नजरियों की तुलना करते हैं.”
एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया से प्रभावित होता है, लेकिन कई लोग अपनी गलतियों से जल्दी सीखते हैं. स्क्रिपबॉक्स के चीफ क्लाइंट ऑफिसर अशोक कुमार ईआर मीडिया रिपोर्ट में कहते हैं कि 62.4 फीसदी निवेश फैसले सीधे तौर पर सोशल मीडिया और साथियों के ग्रुप से प्रभावित होते हैं. ऑनलाइन फोरम पर साथियों की सहमति एक एम्प्लीफायर की तरह काम करती है, जिससे ज़्यादा रिस्क लेने की क्षमता और खास थीम वाले शेयरों में निवेश करने की प्रवृत्ति बढ़ती है.
वे निवेश के नए तरीकों को आजमाने या रिस्क लेने से भी नहीं डरते. जर्मिनेट इन्वेस्टर सर्विसेज के सीईओ संतोष जोसेफ ईटी की रिपोर्ट में कहते हैं कि म्यूचुअल फंड में, कई लोग इंडेक्स फंड, ETF, और स्मॉलकैप और थीमैटिक फंड से शुरुआत करते हैं, लेकिन कुछ लोग क्रिप्टोकरेंसी, F&O ट्रेडिंग और ज्यादा रिस्क वाले दूसरे तरीकों को भी आजमाते हैं. इसका एक बड़ा कारण यह है कि शुरुआत करने में कोई खास रुकावट नहीं है.
फाइनेंशियल फ्रीडम
आर्थिक आज़ादी कई जूमर्स के लिए एक जरूरी टारगेट है, लेकिन इसका मतलब हमेशा रिटायरमेंट नहीं होता. फ्रैंटाइगर बिजनेस कंसल्टिंग में 25 साल की चीफ पीपल ऑफिसर, तनुष्का बिश्नोई मीडिया रिपोर्ट में कहती हैं कि मैं 40 की उम्र तक इतना कमाना चाहती हूं कि अपने शौक पूरे कर सकूं, जैसे अपना रेस्टोरेंट खोलना. जोसेफ कहते हैं कि अब फाइनेंशियल फ्रीडम को पैसे और जिंदगी, दोनों के नजरिए से देखा जाता है. इसे ‘कोस्ट’ या ‘सॉफ्ट लाइफ FIRE’ कहा जाता है. स्क्रिपबॉक्स के कुमार कहते हैं कि Gen Z ‘कोस्ट FIRE’ और वर्कलाइफ इंटीग्रेशन को अपना रही है. वे रिटायरमेंट तक आराम को टालने के बजाय, 20 और 30 की उम्र में निवेश का बेस बनाने को प्राथमिकता देते हैं, ताकि वे फ्रीलांस काम, अपने शौक के प्रोजेक्ट और कुछ समय के लिए काम से ब्रेक ले सकें.
कर्ज और लोन
हालांकि Gen Z निस्संदेह क्रेडिटफ्रेंडली है और एसेट बनाने और आरामदायक जीवनशैली के लिए उधार लेती है, लेकिन उन्हें कर्ज के जाल में फंसाना आसान रहा है. विश्वनाथन कहते हैं कि इस पीढ़ी की क्रेडिट तक अभूतपूर्व पहुंच है. डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म, ‘बाय नाउ पे लेटर’ वाले प्रोडक्ट और तुरंत मिलने वाले कंज्यूमर लोन ने उधार लेने की प्रक्रिया को मिलेनियल्स या Gen X की तुलना में बहुत तेज और आसान बना दिया है. नतीजतन, कई युवा अपनी आर्थिक ज़िंदगी की शुरुआत में ही क्रेडिट प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं.
हाल ही में आई TransUnion CIBIL की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में क्रेडिट कार्ड लेने वाले नए ग्राहकों में से 50 फीसदी की उम्र 30 साल से कम थी, जबकि मार्च 2022 में यह आंकड़ा 43 फीसदी था. पहला कार्ड जारी होने के समय, 31 फीसदी Gen Z ग्राहकों के पास पहले से ही दो या उससे ज़्यादा एक्टिव क्रेडिट प्रोडक्ट थे, 23 फीदी पर छोटे पर्सनल लोन बकाया थे और 18 फीसदी ने कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन ले रखे थे.
हालांकि, विश्वनाथन का कहना है कि इस ट्रेंड को आज की आर्थिक हकीकत के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. घर की बढ़ती कीमतें, महंगाई का दबाव और जीवनशैली पर बढ़ते खर्च का मतलब है कि युवा कमाने वालों को अक्सर अपने करियर की शुरुआत में ही आर्थिक जरूरतों का सामना करना पड़ता है. वे कहते हैं कि कुछ मामलों में, उधार लेना वित्तीय गैरजिम्मेदारी की निशानी के बजाय इन दबावों को संभालने का एक जरिया बन गया है.
काम के प्रति नजरिया
यह सोचना कि Gen Z अपने करियर को लेकर गंभीर नहीं है या वे ‘वर्कलाइफ बैलेंस’ पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं, शायद पूरी तरह सही नहीं है. टीमलीज डिजिटल की CEO नीति शर्मा कहती हैं कि वे अक्सर नौकरियां बदलते हैं, उनकी पहली नौकरी औसतन एक साल से कुछ ज्यादा समय तक ही चलती है. इसका मतलब यह नहीं है कि वे कम कमिटेड हैं. इसका मतलब है कि वे ज्यादा और तेजी से सीखने के लिए करियर में बदलाव कर रहे हैं. कंपनियों के लिए असली चुनौती ऐसे करियर पाथ बनाना है जो इन बदलती उम्मीदों के हिसाब से हों.



