प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. ये ट्रेन हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से सोनीपत के बीच चलेगी. इसका नाम नमो ग्रीन रेल है. खास बात ये है कि ये ट्रेन बिना डीजल और बिना बिजली के चलेगी यानी भारतीय रेल अब धुएं और प्रदूषण के दौर से निकलकर पूरी तरह ग्रीन होने की तरफ बढ़ रही है. इसके साथ ही भारत उन कुछ देशों की लिस्ट में शामिल हो गया, जिनके पास हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक है.

इस सूची में भारत से पहले सिर्फ अमेरिका, जर्मनी और चीन जैसे देश शामिल हैं, जहां ग्रीन एनर्जी को ध्यान में रखकर पहले से इस तरह ट्रेन चल रही हैं, लेकिन भारत में चलने वाली ट्रेन इन देशों की हाइड्रोजन ट्रेन से बहुत खास है और इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि गैस से ट्रेन चलाना कोई सामान्य तकनीक नही हैं. ये बहुत मुश्किल काम है.
पीएम मोदी ने हाइड्रोजन ट्रेन के उद्घाटन को लेकर सोशल साइट एक्स पर लिखा, शुक्रवार को जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जाएगी, जो जींद और सोनीपत को जोड़ेगी. भारत उन चुनिंदा देशों में से एक बन जाएगा जिनके पास ऐसी ट्रेनें हैं. इससे यह पक्का करने में काफी मदद मिलेगी कि भारत रेलवे सेक्टर में क्लीन टेक्नोलॉजी अपनाए.
From Jind tomorrow, Indias first hydrogenpowered train will be flagged off, which will connect Jind and Sonipat. India becomes one of the select group of nations that have such trains. This will go a long way in ensuring that India adopts clean technology in the railway sector.
— Narendra Modi July 16, 2026
आइए जानें कि आखिर बिना बिजली और डीजल इंजन के हाइड्रोजन वाली ट्रेन पटरी पर कैसे दौड़ेगी.
- इस ट्रेन में विशेष रूप से तैयार हाईप्रेशर सिलेंडर लगाए गए हैं, जिनमें हाइड्रोजन गैस को पूरी सुरक्षा के साथ स्टोर किया जाता है.
- इस हाइड्रोजन गैस को ऑक्सीजन के साथ एक ‘फ्यूल सेल’ के अंदर मिक्स किया जाता है.
- जब हाइड्रोजन और ऑक्सीजन आपस में रिएक्ट करते हैं, तो तुरंत भारी मात्रा में बिजली पैदा होती है.
- इसी बिजली को ट्रेन के नीचे लगी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन मोटर्स में भेजा जाता है, जिससे पहिए घूमते हैं और ट्रेन को रफ्तार मिलती है.
- इस ट्रेन में एडवांस लिथियमआयन बैटरी भी लगाई गई है. एक्स्ट्रा बिजली इस बैटरी में स्टोर होती है.
- जो चढ़ाई के वक्त या ट्रेन की शुरुआती रफ्तार के समय इंजन को एक्स्ट्रा पावर देती है.
- इस पूरी प्रक्रिया में एक बूंद डीजल नहीं जलता. ना ही जहरीला धुआं निकलता है. सिर्फ शुद्ध पानी की भाप बाहर निकलती है.
जींद में 1 मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट
इसके लिए जींद में ही 1 मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट बनाया गया है, जो पानी को तोड़कर शुद्ध ग्रीन हाइड्रोजन बनाएगा. यहां 3000 किलो हाइड्रोजन स्टोर करने की क्षमता है. ये ट्रेन अपने साथ 27 सिलेंडरों में कुल 440 किलोग्राम कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस लेकर चलेगी, एक बार पूरा टैंक भरने पर ये ट्रेन लगभग 250 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है.
हाइड्रोजन गैस बहुत ज्वलनशील होती है. इसलिए पूरी ट्रेन और रिफिलिंग स्टेशन पर विशेष हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर्स और फ्लेम डिटेक्टर्स लगाए गए हैं.
दूसरों देशों से कैसे अलग है हाइड्रोजन ट्रेन?
दूसरे देशों में आम तौर पर ऐसी हाइड्रोजन ट्रेनों में 2 से 4 डिब्बे ही होते हैं और वो नैरो गेज की पटरी पर चलती हैं,लेकिन भारत की स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन की ताकत, क्षमता और फीचर्स इनसे कहीं बेहतर हैं.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बारे में कहा था कि हाइड्रोजन ट्रेन, सिर्फ 4 देश ऐसे हैं जिन्होंने इसे डेवलप किया है, जिन देशों ने इसे डेवलप किया है, वहां हाइड्रोजन ट्रेन की क्षमता 500600 हॉर्स पावर की है. भारत में हमने इसे चुनौती के तौर पर लिया और अपने इंजीनियर्स और टैलेंट का इस्तेमाल करते हुए सफलतापूर्वक 1200 हॉर्स पावर हाइड्रोजन ट्रेन को डेवलप किया है. ये इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा क्षमता वाली हाइड्रोजन ट्रेन है.
- इस ट्रेन को रफ्तार देने के लिए आगे और पीछे दो बेहद शक्तिशाली पावर कार यानी इंजन लगाए गए हैं.
- जो 3200 हॉर्सपावर की ताकत पैदा करते हैं. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
- ये ट्रेन 2400 किलोवाट की कुल बिजली जनरेट करती है.
- अगर यात्री क्षमता की बात करें, तो इसमें 8 पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं.
- जिनमें 628 सीटें हैं…और 2600 यात्री आराम से सफर कर सकते हैं.
- ये ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच लगभग 90 किलोमीटर की दूरी तय करेगी.
हरियाणा से शुरू हो रही है पहली ट्रेन
इस दूरी को तय करने में करीब दो घंटे का वक्त लगेगा. ट्रायल के दौरान ट्रेन की अधिकतम गति 120 किलोमीटर प्रतिघंटा रही, लेकिन संचालन के लिए इसकी गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है.
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा से शुरू हो रही है, लेकिन भविष्य में इसका इस्तेमाल पहाड़ी इलाकों में किए जाने की योजना है. भारतीय रेलवे के ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ प्रोजेक्ट के तहत पहाड़ी रेल रास्तों को प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना है.
इस प्रोजेक्ट के तहत कालकाशिमला रूट कुल 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है. शिमला और कालका के बीच 96 किलोमीटर लंबा ट्रैक यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है. इस रूट पर वर्तमान में चलने वाली डीजल ‘टॉय ट्रेनों’ को धीरेधीरे हाइड्रोजन ट्रेनों से बदला जा रहा है.
कालकाशिमला के अलावा, इस प्रोजेक्ट के अगले चरणों में माथेरान हिल रेलवे, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, और नीलगिरी माउंटेन रेलवे जैसे प्रसिद्ध पहाड़ी रास्तों को भी इसमें शामिल किया गया है.
ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी9 भारतवर्ष



