हिमाचली खबर: साल 2003 के चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी रोहित चतुर्वेदी की समय से पहले रिहाई की अनुमति दी है. कोर्ट ने रोहित की माफी याचिका को स्वीकार किया और पूर्व अस्वीकृति को मनमाना बताया. साथ ही आपराधिक न्याय में प्रतिशोध की बजाय सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया. ये फैसला जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, रोहित चतुर्वेदी की समय से पहले रिहाई के लिए उत्तराखंड सरकार की सिफारिश को खारिज करने वाला गृह मंत्रालय का 9 जुलाई 2025 का पत्र कानूनी रूप से अस्थिर था. कोर्ट ने रोहित की हिरासत अवधि और उसकी वर्तमान स्थिति पर भी ध्यान दिया. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि उसे हिरासत में वापस आने की जरूरत नहीं होगी.
अदालत ने कहा कि चूंकि दोषी रोहित चतुर्वेदी पहले से ही बाहर है, इसलिए सरेंडर न करे. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी गौर किया कि चतुर्वेदी ने बिना किसी छूट के 22 साल जेल में बिताए हैं. अदालत ने इस दौरान बड़ी टिप्पणी की, कहा कि अपराध एक बात है, सुधार दूसरी. ध्यान सुधार पर होना चाहिए ना कि दंड देने पर.
क्या है पूरा मामला?
कवयित्री मधुमिता शुक्ला की 9 मई 2003 को लखनऊ की पेपर मिल कॉलोनी में हत्या कर दी गई थी. उस समय वह गर्भवती थीं. इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे अमरमणि त्रिपाठी को सितंबर 2003 को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद मधुमिता की हत्या की साजिश के सिलसिले में अन्य आरोपियों को अरेस्ट किया गया था.
निचली अदालत का फैसला
इस मामले में उत्तराखंड की एक निचली अदालत ने 24 अक्टूबर 2007 को अमरमणि, उनकी पत्नी मधुमणि, रिश्तेदार रोहित चतुर्वेदी और संतोष कुमार राय को हत्या का दोषी पाया. उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई. मामले की जांच 17 जून 2003 को सीबीआई को सौंपी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी 2007 को केस की सुनवाई यूपी से उत्तराखंड ट्रांसफर कर दी थी.
हाई कोर्ट का फैसला
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 16 जुलाई 2012 को इन सभी की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 19 नवंबर 2013 को इस आदेश को बरकरार रखा. इस मामले में उत्तर प्रदेश के कारागार विभाग ने 24 अगस्त 2023 को राज्य की 2018 की सजा माफी नीति और इस तथ्य का हवाला देते हुए कि सजा के 16 साल पूरे हो चुके हैं, अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी की समय से पहले रिहाई का आदेश जारी किया था.



