नमक से लेकर स्मार्टफोन और लग्जरी गाड़ियां बनाने वाला टाटा ग्रुप अब समंदर में अपना परचम लहराने की तैयारी कर रहा है. केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में यह बड़ा खुलासा किया है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, देश का यह दिग्गज कारोबारी समूह केरल में जहाज निर्माण के क्षेत्र में 10,000 करोड़ रुपये का भारीभरकम निवेश करने जा रहा है. टाटा की ओर से राज्य सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव मिल चुका है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो महज एक महीने के भीतर इस मेगा प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल सकती है.

जमीन देगी सरकार, एक महीने में डील पक्की

मुख्यमंत्री सतीसन ने स्पष्ट किया है कि टाटा ग्रुप जहाज बनाने की इस नई और महत्वाकांक्षी परियोजना में पैसा लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार है. राज्य सरकार भी इस निवेश प्रस्ताव को लेकर काफी सकारात्मक रुख अपना रही है. सरकार की तरफ से इस बड़े प्रोजेक्ट को स्थापित करने के लिए जरूरी जमीन मुहैया कराई जाएगी. प्रशासन फिलहाल इस प्रस्ताव के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन कर रहा है और उम्मीद है कि अगले 30 दिनों के भीतर इसे अंतिम मंजूरी दे दी जाएगी. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। कॉफी से लेकर स्टील और सॉफ्टवेयर तक का कारोबार करने वाले टाटा समूह के लिए जहाज निर्माण का क्षेत्र एक बिल्कुल नया और रोमांचक बिजनेस होगा. हालांकि, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल टाटा ग्रुप के प्रवक्ता की तरफ से इस निवेश पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

समुद्री कारोबार में टाटा मचाएगी धमाल

टाटा का यह निवेश ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रतिद्वंद्वी कारोबारी समूह अडानी ग्रुप पहले से ही समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी छलांग लगा चुका है. अडानी ग्रुप का केरल के ही विझिंजम में एक विशाल डीपवाटर ट्रांसशिपमेंट हब तैयार हो रहा है. हाल ही में इस पोर्ट प्रोजेक्ट को दिग्गज ‘एमएससी मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी’ से 1.4 अरब डॉलर का कमिटमेंट भी मिला है. फिलहाल सतीसन सरकार इस बड़ी डील की भी समीक्षा कर रही है. अब उसी राज्य में जहाज निर्माण के जरिए टाटा की एंट्री से यह साफ है कि आने वाले समय में देश के दो सबसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों के बीच समुद्री कारोबार में दबदबा बनाने की होड़ तेज हो सकती है.

समुद्री बादशाहत के लिए भारत की नई उड़ान

जहाज निर्माण के क्षेत्र में टाटा की संभावित एंट्री भारत की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत देश वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी स्थिति को तेजी से मजबूत करना चाहता है. भारत अपनी ‘शिपबिल्डिंग’ क्षमता को बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है. इसी कड़ी में बीते अप्रैल महीने में भारत ने दक्षिण कोरिया के साथ इस सेक्टर में सहयोग बढ़ाने का अहम समझौता किया था. आपको बता दें कि चीन के बाद दक्षिण कोरिया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शिपबिल्डिंग हब है. दूसरी तरफ, केरल भी कोच्चि और विझिंजम जैसे प्रमुख बंदरगाहों के आसपास जहाज बनाने और उसकी मरम्मत करने वाली सेवाओं का जाल बिछाकर खुद को एक बड़े समुद्री केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है. हालांकि, मुख्यमंत्री ने अभी यह साफ नहीं किया है कि टाटा के इस प्रस्तावित प्लांट की क्षमता कितनी होगी और यहां उत्पादन कब से शुरू होगा.