हिमाचली खबर: भारतीय रसोई में लहसुन और देसी घी का इस्तेमाल केवल स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि कई तरह की शारीरिक दिक्कतों को दूर करने के लिए भी सदियों से किया जाता रहा है। आयुर्वेद में लहसुन को एक बेहतरीन औषधि माना गया है। योग गुरु और आयुर्वेद विशेषज्ञ बाबा रामदेव के अनुसार अगर सुबह खाली पेट लहसुन की दो कलियों को देसी घी में भूनकर खाया जाए, तो यह शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने और जोड़ों के दर्द व वात रोगों से राहत दिलाने में बेहद मददगार साबित हो सकता है। हालांकि, इसकी तासीर बेहद गर्म होती है, इसलिए इसके सेवन का सही तरीका और मात्रा जानना बेहद जरूरी है। यह शरीर में जमा खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, पाचन सुधारने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद कर सकता है।

आयुर्वेद में घी और लहसुन का यह मिश्रण वात संबंधी समस्याओं और कमजोरी को दूर करने के लिए भी उपयोगी माना जाता है। लहसुन में पाए जाने वाले सल्फर कंपाउंड, खासतौर पर एलिसिन, इसके एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुणों के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। यही वजह है कि इसे इम्यूनिटी मजबूत करने वाला प्राकृतिक खाद्य भी कहा जाता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि लहसुन का सेवन करने से सेहत को कौनकौन से फायदे होते हैं।
लहसुन के पोषक तत्व
लहसुन में विटामिन C, विटामिन B6, मैंगनीज, सेलेनियम, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और फाइबर जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। नियमित मात्रा में इसका सेवन दिल की सेहत को बेहतर रखने, सूजन कम करने और शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक माना जाता है। कुछ शोधों में यह भी सामने आया है कि संतुलित आहार के साथ लहसुन का सेवन कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने में मददगार हो सकता है। हालांकि, लहसुन का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। जिन लोगों को एसिडिटी, पेट में जलन, ब्लड थिनर दवाओं का सेवन या किसी प्रकार की एलर्जी की समस्या हो, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका नियमित सेवन करना चाहिए।
लहसुन का सेवन करने के फायदे
कोलेस्ट्रॉल होता है कंट्रोल
The Journal of Nutrition और Annals of Internal Medicine में प्रकाशित एक व्यापक मेटाएनालिसिस के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया कि लहसुन को जब काटा या कुचला जाता है, तो उसमें ‘एलिसिन’ नामक सक्रिय सल्फर कंपाउंड बनता है। रिसर्च साबित करती है कि रोजाना आधा से एक कली लहसुन का सेवन करने से शरीर में जमा खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर 8% से 12% तक कम हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार इसे घी के साथ भूनकर खाने से इसकी तीक्ष्णता कम होती है और यह धमनियों को साफ रखता है।
ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में असरदार
Siloam Hospitals की मेडिकल रिपोर्ट्स और कई शोधों के अनुसार, लहसुन में मौजूद एलिसिन और पॉलीसल्फाइड जैसे तत्व रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करने में मदद करते हैं। इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। नियमित मात्रा में लहसुन का सेवन हृदय संबंधी जोखिम को कम करने में भी फायदेमंद माना जाता है। मेडिकल जर्नल Integrated Blood Pressure Control और Maturitas में छपी एक क्लिनिकल स्टडी के मुताबिक वैज्ञानिकों ने पाया कि लहसुन में मौजूद पॉलीसल्फाइड शरीर में जाकर ‘नाइट्रिक ऑक्साइड’ के उत्पादन को बढ़ाते हैं। यह गैस Blood Vessels को रिलैक्स और चौड़ा करता है। रिसर्च के अनुसार, लहसुन का नियमित सेवन हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों में सिस्टोलिक और डायस्टोलिक बीपी को ठीक उसी तरह कम कर सकता है, जैसे कुछ स्टैंडर्ड एलोपैथिक दवाएं करती हैं।
वजन घटाने में करता है मदद
The Journal of Nutrition और Nutrition Research and Practice के एक शोध के अनुसार चूहों और मनुष्यों पर किए गए अध्ययनों में देखा गया कि लहसुन का अर्क शरीर में ‘थर्मोजेनेसिस’ यानी कैलोरी बर्न करने की प्रक्रिया को तेज करता है। यह शरीर में जमा सफेद वसा को ब्राउन फैट में बदलने के लिए जिम्मेदार जीन्स को सक्रिय करता है, जिससे मोटापा कम करने और भूख को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। लहसुन शरीर के मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करने में मदद करता है, जिससे कैलोरी बर्न होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। इसके नियमित सेवन से भूख को नियंत्रित रखने और बारबार खाने की इच्छा कम करने में सहायता मिलती है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन कम करने और फैट जमा होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं।
कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक
National Cancer Institute की ‘ओलियम वेजिटेबल’ स्टडी और Cancer Prevention Research जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार जो लोग अपने भोजन में नियमित रूप से लहसुन का सेवन करते हैं, उनमें पेट , कोलोरेक्टल और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा काफी कम पाया गया। लहसुन में मौजूद ‘एलील सल्फर’ यौगिक ट्यूमर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकते हैं और डीएनए को डैमेज होने से बचाते हैं। लहसुन में मौजूद सल्फर यौगिक शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं। कई रिसर्च में यह पाया गया है कि संतुलित आहार के साथ नियमित लहसुन सेवन कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण कोशिकाओं को नुकसान से बचाने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में योगदान देते हैं।
दिमाग को रखता है सक्रिय और स्वस्थ
Journal of Neurochemistry और The Journal of Nutrition, Health & Aging के एक न्यूरोलॉजिकल अध्ययन के मुताबिक लहसुन का सेवन मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से बचाता है। इसका नियमित सेवन उम्र बढ़ने के साथ होने वाली मानसिक कमजोरी और सूजन को कम करने में सहायक हो सकता है। इससे याददाश्त, एकाग्रता और ब्रेन हेल्थ को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
डिस्क्लेमर : यह लेख अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा शोधों, सामान्य न्यूट्रिशन साइंस के सिद्धांतों पर आधारित है। लहसुन एक बेहतरीन प्राकृतिक औषधि और सुपरफूड है, लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक तासीर, बीमारियां और पाचन तंत्र अलग होते हैं। यदि आप खून पतला करने की दवाइयां ले रहे हैं, आपकी कोई सर्जरी होने वाली है, या आप गंभीर एसिडिटी/अल्सर की समस्या से पीड़ित हैं, तो अपनी डाइट में लहसुन की नियमित मात्रा शामिल करने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या प्रमाणित डायटीशियन से परामर्श अवश्य लें।



