चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर गड़बड़ियों के आरोप लगे, जिसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष मुखर हो गया और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के तमाम हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इस बीच हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के 100 पूर्व छात्रों ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में पुलिस की बर्बरता, गैरकानूनी हिरासत और सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन” की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया है. हावर्ड के इन पूर्व छात्रों की ओर से जारी किए गए बयान पर मशहूर वकील कपिल सिब्बल के भाई कंवल सिब्बल ने पलटवार किया है. उन्होंने इसमें विदेशी हाथ बताया.

उन्होंने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ‘विदेशी हाथ साफ नजर आ रहा है. यह प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर की जा रही बाहरी लामबंदी का ही एक हिस्सा है. हार्वर्ड के पूर्व छात्र इन अराजक प्रदर्शनों में क्यों शामिल हो रहे हैं?’ दरअसल, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों ने सीनियर वकील शादान फरासत के साथ एकजुटता दिखाई है, जिनके साथ दिल्ली पुलिस पर बदसलूकी करने के आरोप लगे हैं. CJP की पॉलिसी हेड मेहर पसरीचा को पुलिस ने हिरासत में लिया था.

The foreign hand is becoming visible. This is part of external mobilisation in cahoots with the protestors. Why are the Harvard alumni joining these anarchical protests?

— Kanwal Sibal October 12, 2026

पूर्व छात्रों ने मांग की है कि हम सरकार और कानून लागू करने वाली सभी एजेंसियों से अपील करते हैं कि वे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन तुरंत बंद करें, शांतिपूर्ण विरोध और कानूनी मदद पाने के अधिकारों का सम्मान करें. साथ ही यह सुनिश्चित करें कि गलत व्यवहार के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के शासन के तहत जवाबदेह ठहराया जाए.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के समूह ने दी सफाई

हालांकि बीते दिन सोमवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के आधिकारिक समूह ‘हार्वर्ड क्लब ऑफ़ इंडिया’ ने मामले पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बारे में कोई बयान जारी नहीं किया है और न ही उनका समर्थन किया गया है. क्लब की एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य रजत सेठी ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के कुछ पूर्व छात्रों ने संगठन का प्रतिनिधित्व किए बिना वह पत्र जारी किया था. यह स्पष्टीकरण जरूरी था क्योंकि क्लब ने विरोध प्रदर्शनों या उसके बाद हिरासत में लिए लोगों के लिए कोई बयान जारी या उसका समर्थन नहीं किया था.