हिमाचली खबर: Greenfield Expressway News: देशदुनिया में पीतल नगरी के नाम से मशहूर मुरादाबाद के विकास के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है. यहां के पीतल से बनने वाली मूर्तियां, अगरबत्ती स्टैंड, ट्रे, बर्तन, घंटियां, फूलदान, दीये और घरेलू सजावट के शानदार सामान सिर्फ देशभर में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया भर में भी सप्लाई किए जाते हैं. मुरादाबाद के सर्वांगीण विकास के लिए बरेली से हल्द्वानी के बीच बनने वाला ‘ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे’ को जिले से जोड़ा जाएगा. इससे मुरादाबाद के व्यापार को रफ्तार मिलेगी.

मुरादाबाद के पीतल उद्योग के लिए खुशखबरी, ये नया एक्सप्रेस-वे बनेगा गेम चेंजर; कुमाऊं तक सीधी कनेक्टिविटी​
मुरादाबाद के पीतल उद्योग के लिए खुशखबरी, ये नया एक्सप्रेस-वे बनेगा गेम चेंजर; कुमाऊं तक सीधी कनेक्टिविटी​

​मुरादाबाद जिले को बरेलीहल्द्वानी ‘ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे’ से कनेक्ट करने से यह व्यापारियों के लिए आर्थिक कॉरिडोर’ के रूप में उपयोगी साबित होने वाला है. 100 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन का सीमांकन कार्य शुरू हो गया है, जिससे इलाके के लोगों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. मुरादाबाद के पीतल व्यापारियों का कहना है कि उत्तराखंड देवभूमि है और कनेक्टिविटी बढ़ने से वहां के श्रद्धालुओं का आनाजाना बढ़ेगा.

मुरादाबाद से जुड़ेगा एक्सप्रेसवे

जिसका सीधा फायदा मुरादाबाद के पीतल उद्योग के साथ लकड़ी और एल्यूमीनियम के व्यापार को भी मिलेगा. मुरादाबाद के पीतल निर्यातक सलमान ने कहा कि जिस तरीके से इस नए हाईवे की जानकारी मिली है, उससे साफ है कि सरकार लगातार उद्योग को बढ़ाने के लिए काम कर रही है. यह व्यापारियों के लिए व्यापार के एक अच्छे कॉरिडोर के रूप में साबित होगा. NHAI की योजना के हिसाब से इस नए एक्सप्रेसवे को मुरादाबादबरेली हाईवे से जोड़ा जाएगा.

पर्यटन स्थलों तक पहुंच होगी आसान

इस रणनीतिक का लाभ यह होगा कि दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर से आने वाले वाहन सीधे इस एक्सप्रेसवे पर चढ़कर, बिना बरेली शहर में फंसे उत्तराखंड की ओर जा सकेंगे. यह इंटरलिंकिंग उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों को उत्तराखंड के कुमाऊं इलाके से जोड़ने में ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाली है. इस एक्सप्रेसवे के बनने से नैनीताल, भीमताल, रानीखेत और अल्मोड़ा जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों का सफर आसान हो जाएगा.

इससे उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को भी भारी लाभ होगा. दूसरी ओर, मुरादाबाद के पीतल उद्योग, रामपुर के लकड़ी उद्योग, जरी और कृषि उत्पादों को पहाड़ों तक पहुंचने में कम समय लगेगा. मालवाहक वाहनों के लिए यह रास्ता किसी वरदान से कम नहीं है.