नई दिल्ली। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ गर्मजोशी भरी मुलाकात चर्चा में रही। समूह तस्वीर से पहले मोदी को जिनपिंग और पुतिन से हाथ मिलाते और संक्षिप्त बातचीत करते देखा गया।

तस्वीर के क्या मायने?

इस दृश्य को भारत की संतुलित और बहुपक्षीय कूटनीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। भारत एक ओर चीन और रूस के साथ संवाद बनाए रखता है, वहीं अपने स्वतंत्र विदेश नीति रुख को भी कायम रखता है।

रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ अलग बैठक में पीएम मोदी ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। मोदी ने कहा कि मानवता के हित में संघर्ष का जल्द अंत होना चाहिए।

वहीं, SCO जैसे मंच पर मोदीजिनपिंग की मुलाकात यह दिखाती है कि भारत और चीन के बीच मतभेदों के बावजूद उच्चस्तरीय संवाद जारी है।

भारत के लिए संदेश

  • रणनीतिक स्वायत्तता: भारत अलगअलग शक्तियों के साथ अपने हितों के अनुसार संबंध बनाए रख रहा है।
  • रूस से मजबूत रिश्ते: ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग भारतरूस संबंधों के प्रमुख क्षेत्र हैं।
  • चीन से संवाद: सीमा और अन्य मतभेदों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रखना महत्वपूर्ण है।
  • वैश्विक भूमिका: SCO में भारत की सक्रिय भागीदारी बहुपक्षीय मंचों पर उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

तस्वीर में दिखा बड़ा कूटनीतिक संदेश

बिश्केक की यह तस्वीर सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि भारत अपनी विदेश नीति में किसी एक खेमे तक सीमित रहने के बजाय विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ संवाद और सहयोग को प्राथमिकता देता है। SCO में चीन, रूस और भारत जैसे बड़े देशों की मौजूदगी इसे और महत्वपूर्ण बनाती है।