हिमाचली खबर: आजकल लोगों में बालकनी, टैरेज और छतों पर गार्डेनिंग करने का शौक तेजी से बढ़ रहा है। शहरों में सीमित जगह होने के चलते लोग अपने घर के छोटेछोटे कोनों को हरियाली से सजाने की कोशिश करते हैं। अपनी छोटी सी गार्डेन को रंगबिरंगे फूलों वाले पौधे, सब्जियां, हर्ब्स और तरहतरह के हर भरे पौधे से सजाते हैं। हरियाली से भरे छोटे गार्डन न केवल घर की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि वातावरण को भी ताजा, शांत और खुशनुमा बनाए रखने में मदद करते हैं।

गमलों में लगे पौधों की अच्छी ग्रोथ और लंबे समय तक हरियाली बनाए रखने नें सबसे अहम भूमिका मिट्टी निभाती है। मिट्टी जितनी उर्वरक होगी पौधों में उतने जल्दी फलफूल आएंगे और वे स्वस्थ रहेंगे। लेकिन कई बार मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने के चलते पौधे सूखने और मुर्झाने लगते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि गमले की मिट्टी को लेकर कुछ चीजें पता होनी जरूरी है।
मिट्टी को समयसमय पर बदलना बेहद जरूरी होता है। गमले की मिट्टी सीमित मात्रा में होती है, इसलिए कुछ महीनों बाद उसमें मौजूद पोषक तत्व धीरेधीरे खत्म होने लगते हैं। लगातार पानी देने से मिट्टी सख्त हो जाती है और उसकी जल निकासी क्षमता भी कम हो जाती है। ऐसे में पौधों की जड़ें ठीक तरह से फैल नहीं पातीं और उनकी ग्रोथ रुकने लगती है। ऐसे में गमले की मिट्टी को समयसमय पर बदलना या उसमें नई खाद और पोषक तत्व मिलाना जरूरी माना जाता है।
छोटे गमलों की मिट्टी
छोटे आकार के गमलों में मिट्टी जल्दी कमजोर हो जाती है, क्योंकि उनमें पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है। ऐसे में गमले की मिट्टी हर 6 से 12 महीने में बदल देना बेहतर माना जाता है। खासकर अगर पौधा तेजी से बढ़ने वाला हो, तो मिट्टी जल्दी खराब हो सकती है।
बड़े गमलों की मिट्टी
बड़े हमलों की मिट्टी की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए उनमें पोषक तत्व लंबे समय तक बने रहते हैं। ऐसे गमलों की मिट्टी लगभग 1 से 2 साल में बदलना पर्याप्त होता है। हालांकि बीचबीच में खाद डालना जरूरी होता है।
फूल और सब्जियों वाले पौधे
मौसमी फूलों और सब्जियों वाले पौधे मिट्टी से काफी पोषण लेते हैं। इसलिए इनकी फसल या फूलों का सीजन खत्म होने के बाद मिट्टी बदल देना अच्छा माना जाता है। इससे अगली बार पौधे लगाने पर उनकी ग्रोथ बेहतर तरीके से होती है।



