पेट्रोल पंप पर एक साथ होंगे 2 नुकसान! जान लें वरना लगेगा झटका

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) की तरफ से देश की सड़कों पर दौड़ रहे बिना वैध इंश्योरेंस (Insurance) वाले वाहनों को पकड़ने के लिए ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ मॉडल पर एक बड़ा पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बनाई गई है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) सिस्टम के जरिए गाड़ियों के नंबर स्कैन किए जाएंगे. इस कदम से देश के करोड़ों वाहन मालिक सीधे प्रभावित होंगे, क्योंकि भारत में चलने वाले कुल वाहनों में से करीब 56% वाहन बिना किसी वैध इंश्योरेंस के चल रहे हैं.

यह पहल इसलिए बहुत अहम मानी जा रही है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से IRDAI और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को इस तरह का पायलट प्रोजेक्ट चलाने का निर्देश दिया गया था. अगर यह सिस्टम सफल रहता है, तो पेट्रोल पंपों पर फ्यूल भराने से पहले ही गाड़ी के इंश्योरेंस स्टेटस की जांच संभव हो सकेगी. साल 2026 के आने वाले महीनों में चुनिंदा शहरों में इस सिस्टम का शुरुआती परीक्षण शुरू होने की पूरी उम्मीद है.

कैसे काम करेगा ANPR सिस्टम और VAHAN डेटाबेस का तालमेल?
ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) एक हाई-टेक कैमरा आधारित तकनीक है, जो सड़क या पेट्रोल पंप से गुजरने वाले हर वाहन की नंबर प्लेट को कुछ ही सेकंड में स्कैन कर लेती है.

डेटा का रीयल-टाइम मिलान: कैमरा जैसे ही नंबर प्लेट को पढ़ेगा, वह डेटा तुरंत इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) और सड़क परिवहन मंत्रालय के केंद्रीय ‘VAHAN’ डेटाबेस से क्रॉस-चेक होगा.

बीमा की स्थिति का तुरंत पता: सिस्टम कुछ ही पलों में यह बता देगा कि उस वाहन का थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस एक्टिव है या उसकी तारीख खत्म हो चुकी है.

ऑटोमैटिक ई-चालान की सुविधा: यदि गाड़ी बिना वैध बीमा के पाई जाती है, तो सिस्टम सीधे ट्रैफिक पुलिस के सर्वर को अलर्ट भेजकर ऑटोमैटिक ई-चालान जारी करने में सक्षम होगा.

पेट्रोल पंप इंटीग्रेशन का परीक्षण: पायलट प्रोजेक्ट के अगले चरण में इस तकनीक को फ्यूल डिस्पेंसिंग मशीनों के सॉफ्टवेयर से जोड़ने का परीक्षण किया जाएगा, ताकि अन-इंश्योर्ड गाड़ियों को ईंधन देने से रोका जा सके.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर क्यों हुआ यह फैसला?
आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल पंजीकृत वाहनों में से लगभग 56% वाहन ऐसे हैं जिनके पास कानूनन अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस तक नहीं है. इनमें सबसे बड़ी संख्या दोपहिया वाहनों और ग्रामीण इलाकों में चलने वाले कमर्शियल वाहनों की है.

सड़क दुर्घटना की स्थिति में जब किसी पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार को मुआवजा देने की बात आती है, तो बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के कारण कानूनी पचड़े खड़े हो जाते हैं और पीड़ितों को वर्षों तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिल पाती. इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और नियामक संस्थाओं को आधुनिक तकनीक के जरिए बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान करने और एक व्यावहारिक पायलट प्रोजेक्ट चलाने का आदेश दिया.

क्या आप पर भी होगा असर?
इस नए नियम और पायलट प्रोजेक्ट का सीधा असर हर दोपहिया, कार और कमर्शियल वाहन चलाने वाले नागरिक पर पड़ेगा:

समय पर रिन्यूअल की जरूरत: अगर आपकी गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस खत्म हो चुका है, तो आपको तुरंत उसे रिन्यू कराना होगा, वरना पेट्रोल पंप पर ईंधन न मिलने या भारी जुर्माना कटने का जोखिम रहेगा.

दुर्घटना पीड़ितों को सुरक्षा: जब सड़कों पर शत-प्रतिशत गाड़ियां बीमित होंगी, तो सड़क हादसों के शिकार लोगों को ट्रिब्यूनल के जरिए तय समय में उचित मुआवजा मिल सकेगा.
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पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर रोक: अक्सर लोग चेकिंग के दौरान जाली इंश्योरेंस पेपर दिखाकर बच निकलते थे. VAHAN डेटाबेस के डिजिटल मिलान से फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी.