
Bihar Woman Found Alive After 12 Years in Jharkhand: बिहार के रोहतास जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून, न्याय प्रणाली से लेकर इंसानियत तक को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है. जी हां. 12 साल पहले जिस महिला की हत्या के इल्जाम में मायके वालों ने उसी के पति, ससुर और देवर समेत 8 लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भिजवा दिया था और परिवार ने केस रफा-दफा करने के लिए अपनी पैतृक जमीन तक बेचकर 8 लाख रुपये खर्च कर दिए थे, वही महिला अब झारखंड के गढ़वा जिले में जिंदा और हंसती-खेलती मिली है. यह कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की मर्डर मिस्ट्री से भी ज्यादा सस्पेंस से भरी है, जहां पुलिस और परिवार वाले दोनों चकरा गए हैं.
आखिर क्या है पूरा माजरा? कैसे रची थी मौत की झूठी कहानी?
साल 2014 के अगस्त महीने में शकुंतला देवी उर्फ सरस्वती नाम की महिला अपने एक रिश्तेदार देवर के साथ अचानक रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी. 20 अगस्त 2014 को उसके भाई ने देहरी थाने में शिकायत दर्ज कराई कि ससुराल वाले दहेज के लिए उसकी बहन को प्रताड़ित कर रहे थे. इसके महज दो दिन बाद, 22 अगस्त को डेहरी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के एक नहर से पुलिस ने एक अज्ञात महिला का शव बरामद किया. भाई ने गुस्से और शक में आकर उसी लाश को अपनी बहन शकुंतला समझकर पहचान लिया और पति अरुण मेहता, ससुर दिलीप मेहता समेत 8 लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा ठोक दिया. पुलिस ने बिना ज्यादा छानबीन किए पति, ससुर और देवर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जिन्होंने कई साल सलाखों के पीछे सिसकते हुए बिताए.
12 साल बाद ऐसे खुला राज, झारखंड में जिंदा मिली शकुंतला
वक्त का पहिया घूमा और 12 साल बाद अचानक इस सनसनीखेज मामले में ऐसा ट्विस्ट आया कि सब दंग रह गए. ससुराल वालों को कहीं से गुप्त सूचना मिली कि शकुंतला मरी नहीं है, बल्कि झारखंड के गढ़वा जिले के कांडी थाना क्षेत्र के लाभरी गांव में अपना नाम बदलकर (कांति) रह रही है. इसके बाद पति के परिवार ने रोहतास के एसपी से गुहार लगाई. एसपी के आदेश पर पुलिस की एक टीम तुरंत झारखंड के लिए रवाना हुई और वहां पहुंचकर उस महिला को ढूंढ निकाला. पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि शकुंतला ने अपनी पहचान छिपाकर अपना नाम बदलकर रट्टू सिंह नाम के शख्स के साथ रहना शुरू कर दिया था.
ताज्जुब की बात यह है कि जब महिला ससुराल छोड़कर गई तो बेटा काफी छोटा था लेकिन आज वो 22 साल का है, उसे जीवनभर अपनी मां और परिवार के सुख से वंचित रहना पड़ा.
अब पुलिस और कानून के सामने खड़े हो गए हैं नए सवाल
जिंदा मिली शकुंतला को पुलिस फौरन वापस रोहतास लेकर आई और सासाराम कोर्ट में पेश किया. अब पुलिस इस महिला के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और झूठे केस में अपनों को फंसाने की साजिश रचने के आरोप में कानूनी कार्रवाई कर रही है. लेकिन इस पूरी कहानी के बाद सबसे बड़ा और खौफनाक सवाल यह है कि अगर 12 साल पहले नहर से मिली वो लाश शकुंतला की नहीं थी, तो आखिर वो बदकिस्मत महिला कौन थी जिसका पोस्टमार्टम हुआ, जिसे पुलिस ने शकुंतला मान लिया और जिसके नाम पर बेकसूर लोगों ने जेल की हवा खाई? क्या इस रहस्य से कभी पूरा पर्दा उठ पाएगा?



