अपना खुद का घर खरीदना हर किसी का सपना होता है. इस सपने को पूरा करने के लिए लोग अपनी सालों की जमापूंजी और निवेश का सहारा लेते हैं. कर्मचारी भविष्य निधि में जमा भारीभरकम फंड को देखकर अक्सर नौकरीपेशा लोग सोचते हैं कि होम लोन का बोझ कम करने या डाउन पेमेंट देने के लिए पीएफ से पैसा निकाल लिया जाए. इम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन घर खरीदने के लिए आंशिक निकासी की अनुमति भी देता है. लेकिन क्या ऐसा करना एक समझदारी भरा वित्तीय फैसला है? फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसा करने से पहले कम से कम दो बार जरूर सोचना चाहिए. आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि घर खरीदने के लिए EPF कॉर्पस को छूना आपके भविष्य के लिए क्यों नुकसानदेह हो सकता है और इसके क्या बेहतर विकल्प हैं.

किन बातों को समझना जरूरी?

  1. नियमों की ढील: EPFO कम से कम 5 साल की सेवा पूरी करने पर घर/प्लाट खरीदने या निर्माण के लिए EPF बैलेंस से पैसे निकालने की अनुमति देता है.
  2. कंपाउंडिंग का भारी नुकसान: EPF पर मिलने वाला सुरक्षित और टैक्सफ्री ब्याज रिटायरमेंट तक आपके पैसे को कई गुना बढ़ा देता है, जो निकासी से खत्म हो जाता है.
  3. रिटायरमेंट पर खतरा: पीएफ का पैसा निकालने से बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा और रिटायरमेंट कॉर्पस में बड़ी सेंध लगती है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
  4. टैक्स लाभ का गणित: होम लोन लेने पर आपको टैक्स में दोहरी छूट मिलती है, जबकि EPF का पैसा निकालने से यह फायदा सीमित हो जाता है.

क्या कहते हैं EPFO के नियम?

EPFO के मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी ने 5 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, तो वह नीचे दी गई स्थितियों में अपने EPF खाते से पैसे निकाल सकता है:

  • जमीन खरीदने के लिए: अधिकतम 24 महीने का बेसिक वेतन + DA.
  • बनाबनाया घर या फ्लैट खरीदने के लिए: अधिकतम 36 महीने का बेसिक वेतन + DA.
  • हाउसिंग सोसाइटी के माध्यम से घर खरीदने पर: कुल जमा कॉर्पस का 90 फीसदी तक निकाला जा सकता है.

कागजी तौर पर यह नियम बहुत सुविधाजनक लगता है, लेकिन वित्तीय योजना के नजरिए से यह काफी जोखिम भरा साबित हो सकता है.

घर के लिए EPF निकालने के 4 बड़े नुकसान

फाइनेंशियल एडवाइजर्स चेतावनी देते हुए कहते हैं कि EPF एक रिटायरमेंट एसेट है, कोई लिक्विड सेविंग्स अकाउंट नहीं. इसे आपातकालीन स्थितियों के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए निकालना आपके बुढ़ापे के फंड को नष्ट कर देता है.

  1. Compounding का बहुत बड़ा नुकसान : EPF वर्तमान में 8.25% की दर से सुरक्षित और गारंटीकृत ब्याज देता है, जो पूरी तरह से टैक्सफ्री होता है. मान लीजिए आपकी उम्र 30 से 35 साल है और आप घर खरीदने के लिए अपने PF से 5 लाख रुपए निकालते हैं. यदि यह 5 लाख अगले 25 साल तक PF में ही जमा रहते, तो 8.25% के चक्रवृद्धि ब्याज की दर से रिटायरमेंट के समय यह राशि लगभग 36 लाख रुपए से 38 लाख रुपए बन चुकी होती. यानी आज निकाले गए 5 लाख रुपए की वास्तविक कीमत भविष्य में आपके 37 लाख रुपए से अधिक के नुकसान के बराबर है.
  2. रिटायरमेंट कॉर्पस में बड़ा गैप : भारतीय परिप्रेक्ष्य में अधिकांश कर्मचारियों के पास पेंशन या रिटायरमेंट के लिए EPF ही एकमात्र मुख्य जरिया होता है. यदि आप अपनी नौकरी के शुरुआती या मध्य वर्षों में ही EPF का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट में लगा देते हैं, तो रिटायरमेंट के समय आपके पास पर्याप्त नकदी नहीं बचेगी.
  3. होम लोन के टैक्स बेनिफिट्स का नुकसान : अगर आप EPF से पैसा निकालकर डाउन पेमेंट बढ़ा देते हैं और लोन की राशि कम कर लेते हैं, तो आप होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट का पूरा फायदा नहीं उठा पाते. सेक्शन 24 के तहत होम लोन के ब्याज भुगतान पर सालाना 2 लाख रुपए तक की टैक्स छूट मिलती है. सेक्शन 80C के तहत होम लोन के मूलधन पर 1.5 लाख रुपए तक की टैक्स छूट दी जाती है.
  4. इलिक्विड एसेट में लॉक हो जाता है पैसा : EPF का पैसा निकालकर आप उसे मकान में बदल देते हैं. रियल एस्टेट एक इलिक्विड एसेट है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत बेचकर कैश में नहीं बदला जा सकता. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। इसके उलट, EPF का पैसा रिटायरमेंट पर तुरंत लिक्विड कैश के रूप में आपके हाथ में आता है.

EPF का ब्याज बनाम होम लोन का ब्याज: क्या है सही गणित?

पैरामीटर EPF कॉर्पस होम लोन
ब्याज दर 8.25% 8.30% से 8.75%
टैक्स स्थिति पूरी तरह टैक्सफ्री ब्याज और प्रिंसिपल पर टैक्स छूट
प्रभावी लागत उच्च रिटर्न देता है टैक्स छूट के बाद प्रभावी दर घटकर 6.5% 7% रह जाती है

टैक्स बेनिफिट्स को जोड़ने के बाद होम लोन की प्रभावी लागत EPF से मिलने वाले टैक्सफ्री ब्याज से कम हो जाती है. इसलिए, PF का पैसा निकालकर लोन कम करना गणितीय रूप से भी समझदारी नहीं है.

घर की खरीदारी के लिए क्या होने चाहिए बेहतर विकल्प?

  1. शॉर्टटर्म लिक्विड इन्वेस्टमेंट्स का इस्तेमाल करें: डाउन पेमेंट जुटाने के लिए अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट , रिकरिंग डिपॉजिट , या लिक्विड/डेट म्यूचुअल फंड्स का इस्तेमाल करें.
  2. होम लोन की अवधि बढ़ाएं: शुरुआती दौर में डाउन पेमेंट कम रखकर होम लोन की अवधि बढ़ा लें और समय के साथ आय बढ़ने पर लोन का प्रीपेमेंट करते रहें.
  3. गैरजरूरी संपत्तियां बेचें: यदि आपके पास कोई ऐसी संपत्ति है जिसका रिटर्न अच्छा नहीं है, तो उसे बेचकर डाउन पेमेंट का इंतजाम करें.
  4. घर की खरीदारी थोड़ा टालें: अगर आपके पास पर्याप्त डाउन पेमेंट नहीं है, तो 12 साल के लिए घर की खरीदारी टाल दें और अलग से सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए डाउन पेमेंट का फंड तैयार करें.

घर खरीदना जीवन की एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके लिए अपने बुढ़ापे के सेफ्टी साइकिल यानी EPF कॉर्पस को दांव पर लगाना एक सही वित्तीय रणनीति नहीं है. EPF के पैसे को बिना छेड़े अपनी जगह बढ़ते रहने दें, ताकि रिटायरमेंट के बाद आपको किसी पर निर्भर न रहना पड़े. घर की खरीदारी के लिए अलग से वित्तीय योजना बनाएं और होम लोन व अन्य बचत साधनों का सही संतुलन स्थापित करें.