हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी उतारचढ़ाव भरा साबित हुआ। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों के साथसाथ भारतीय इक्विटी बाजार पर भी देखने को मिला। बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि बीएसई सेंसेक्स 600 अंक से अधिक की गिरावट के साथ फिसल गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 150 अंक से ज्यादा नीचे कारोबार करता नजर आया। इस व्यापक बिकवाली के कारण निवेशकों की संपत्ति में बड़ी सेंध लगी है, और बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 2 लाख करोड़ रुपये घटकर 479 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है।

बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में गहराता संकट है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने और ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने की घोषणा के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल में इस तेजी ने भारत के ट्रेड बैलेंस और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसका असर शेयर बाजार की धारणा पर साफ दिख रहा है। इसके अलावा, यूएस ट्रेजरी यील्ड में उछाल ने भी बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर करने का काम किया है, जिससे विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क हो गया है।

कारोबारी सत्र के दौरान सेक्टरों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑटो और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। निफ्टी 50 इंडेक्स में इंडिगो, टाटा स्टील और मारुति सुजुकी के शेयरों में भारी गिरावट रही। इसके अलावा, लार्सन एंड टुब्रो, एशियन पेंट्स और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे बड़े शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। केवल आईटी और फार्मा सेक्टर ही बाजार को थोड़ा सहारा देने की कोशिश करते दिखे, जहां एचसीएल टेक और टीसीएस के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी क्रमशः 0.58 प्रतिशत और 0.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार के व्यापक दायरे में कमजोरी को दर्शाती है।

मौजूदा गिरावट का एक कारण मुनाफावसूली भी माना जा रहा है। पिछले दो सत्रों में बाजार में आई तेजी के बाद निवेशकों ने आज के मौके का फायदा उठाते हुए अपनी हिस्सेदारी बेचना उचित समझा। पिछले दो दिनों में सेंसेक्स ने करीब 1,066 अंक और निफ्टी ने 325 अंक की बढ़त दर्ज की थी, जिसके बाद आज बाजार में सुधार देखने को मिला। हालांकि, जानकारों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों का लगातार आ रहा निवेश बाजार के लिए एक सकारात्मक पहलू है। लेकिन फिलहाल, भूराजनीतिक अस्थिरता और तेल की कीमतों में तेजी भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।