किसने नाम पर नामकरण हुआ… दुनियाभर में फूलों की करीब 4 लाख किस्में पाई जाती हैं. इनमें रैफ्लेशिया अर्नोल्डी बहुत खास है. यह दुनिया का सबसे बड़ा फूल है. इसका नामकरण ब्रिटेन के सर्जन जोसेफ अर्नोल्ड के नाम पर रखा गया है. 1818 में वो फूल के नमूने का अध्ययन करने वाले पहले इंसान थे. अपने विशाल आकार के कारण इसे दुनिया का सबसे बड़ा फूल कहा गया. फोटो: Getty Images

कितना बड़ा और भारी…रैफ्लेशिया अर्नोल्डी का व्यास 1 मीटर या 3 फीट 3 इंच तक हो सकता है. यह 11 किलोग्राम तक भारी हो सकता है. इसमें पांच लालभूरे रंग की पंखुड़ियां होती हैं. इन पर सफेद धब्बे होते हैं. इसका जीवन चक्र 1 साल तक का होता है. अगर यह एक बार खिल जाता है तो केवल 5 से 7 दिनों तक वैसा रहता है. फिर यह खत्म हो जाता है. फोटो: Pexels
कहां पाया जाता है… रैफ्लेशिया अर्नोल्डी इंडोनेशिया के वर्षावनों में, विशेषकर बोर्नियो और सुमात्रा द्वीप में पाया जाता है. इसकी पंखुड़ियों से निकलने वाली दुर्गंध के कारण इसे शव फूल भी कहते हैं. यह अपनी दुर्गंध से मक्खियों और दूसरे कीटों को आकर्षित करता है. यह जंगल के उस हिस्से में उगता है जहां नमीं ज्यादा और धूप कम पहुंचती है. फोटो: Pexels
क्यों आती है गंध… इस फूल की खूबी है कि इसके पास से सड़े हुए मांस जैसी गंध आती है. यह फूल जानवरों का मांस खाने वाली मक्खियाें और कीटों को आकर्षित करता है. इसके पास से आने वाली गंध की वजह डाइमिथाइल डाइसल्फाइड और डाइमिथाइल ट्राइसल्फाइड जैसे रसायन हो सकते हैं, जो दुर्गंध पैदा करते हैं. फोटो: Pexels
जड़, पत्ती और तना नहीं… इस फूल में पत्तियां, जड़ और तना नहीं होता. यह किसी पेड़ से जुड़कर पैदा होता है और ऊर्जा और पोषक तत्व उसी पेड़ से हासिल करता है. दिलचस्प बात है कि इसे दक्षिण पूर्व एशिया के वर्षावनों के अलावा कहीं नहीं उगाया जा सकता. ऐसा इसलिए क्योंकि यह फूल टेट्रास्टिग्मा या जंगली अंगूर के पौधे पर निर्भर रहता है. फोटो: Getty Images



