शिमला। वर्षों से करोड़ों रुपये के घाटे और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) को पटरी पर लाने के लिए सुक्खू सरकार की ओर से शुरू की गई कवायद अब नए दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से डीजल पर होने वाले खर्च में बड़ी बचत हो रही है, वहीं निगम ने इन बसों से होने वाली कमाई बढ़ाने पर भी फोकस कर दिया है।

 

हाल ही में बेड़े में शामिल की गई 297 इलेक्ट्रिक बसों से प्रतिदिन करीब 8 लाख रुपये के डीजल खर्च की बचत का दावा किया गया है। अब निगम ने इन बसों के माध्यम से हर महीने करीब 2.50 करोड़ रुपये की आय अर्जित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार की योजना केवल बसों को सड़कों पर उतारने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के साथ निगम की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

 

घाटे से उबरने की कवायद तेज

हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम लंबे समय से आर्थिक दबाव का सामना करता रहा है। बसों के संचालन, ईंधन, रखरखाव और अन्य खर्चों के बीच निगम के लिए आय और व्यय में संतुलन बनाना बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों को परिवहन व्यवस्था में शामिल करना खर्च कम करने और संचालन को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

 

 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक परिवहन को विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। नई बसों की खरीद, मौजूदा बसों के बेहतर इस्तेमाल और चार्जिंग सुविधाओं के विस्तार को एक साथ आगे बढ़ाने की तैयारी है। इससे निगम को ईंधन पर होने वाले खर्च में राहत मिलने के साथ यात्रियों को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।

297 इलेक्ट्रिक बसों से रोजाना 8 लाख रुपये की बचत

निगम के बेड़े में शामिल की गई 297 इलेक्ट्रिक बसों से प्रतिदिन करीब 8 लाख रुपये के डीजल खर्च की बचत हो रही है। इस आंकड़े के आधार पर देखें तो 30 दिनों में संभावित बचत करीब 2.40 करोड़ रुपये बैठती है। यह बचत तभी वास्तविक मासिक आंकड़े के रूप में सामने आएगी, जब संबंधित अवधि में बसों का संचालन और बताई गई बचत लगातार बनी रहे।

डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन ईंधन खर्च के लिहाज से राहत दे सकता है। हालांकि, इनके साथ बिजली की लागत, चार्जिंग व्यवस्था, बैटरी से जुड़ा रखरखाव और अन्य तकनीकी खर्च भी जुड़े रहते हैं। ऐसे में वास्तविक आर्थिक लाभ का आकलन कुल परिचालन लागत को ध्यान में रखकर करना होगा।

 

 

इसके बावजूद प्रतिदिन होने वाली बताई गई बचत निगम के लिए महत्वपूर्ण है। यदि बसों का संचालन व्यवस्थित तरीके से किया जाता है और यात्रियों की मांग के अनुसार रूट तय किए जाते हैं, तो इलेक्ट्रिक बसें निगम की वित्तीय स्थिति सुधारने में उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं।

एक महीने में 2.50 करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य

इलेक्ट्रिक बसों से बचत के साथ अब कमाई बढ़ाने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है। HRTC ने इन बसों से हर महीने करीब 2.50 करोड़ रुपये की आय अर्जित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए उन मार्गों पर संचालन की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जा रहा है, जहां मौजूदा परिचालन स्थलों से 10 से 20 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करना व्यावहारिक हो।

 

 

इस रणनीति का उद्देश्य बसों की उपयोगिता बढ़ाना, यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी देना और उपलब्ध संसाधनों से अधिक आय हासिल करना है। यदि यात्रियों की मांग और रूट की व्यवहार्यता के आधार पर बसों का संचालन बढ़ाया जाता है, तो निगम को राजस्व बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

1000 नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की तैयारी

प्रदेश सरकार अब इलेक्ट्रिक बसों के मौजूदा बेड़े को और बड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। योजना के तहत 1000 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की तैयारी है और इन्हें आगामी वर्ष में प्रदेश में लाने का लक्ष्य रखा गया है। नई बसें शामिल होने से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन को बिजली आधारित बनाने की योजना को गति मिल सकती है। इससे डीजल पर निर्भरता कम करने और परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

 

लेकिन इतनी बड़ी संख्या में बसें खरीदने के साथ चार्जिंग सुविधाओं, डिपो की क्षमता, तकनीकी रखरखाव और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। बसों की खरीद और उनके प्रभावी संचालन के बीच बेहतर तालमेल ही इस योजना के वास्तविक परिणाम तय करेगा।

प्रदेश में बनेंगे 179 इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन

इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़ाने के लिए चार्जिंग ढांचे को मजबूत करना भी जरूरी है। इसी दिशा में प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर 179 इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है। इसके अतिरिक्त नए चार्जिंग केंद्रों के विकास के लिए केंद्र सरकार को दोबारा प्रस्ताव भेजने की तैयारी भी की जा रही है। चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क मजबूत होने से बसों को समय पर चार्ज करने और निर्धारित रूट पर नियमित संचालन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में चार्जिंग केंद्रों की सही लोकेशन और पर्याप्त क्षमता का विशेष महत्व होगा, ताकि बसों को चार्जिंग के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े और यात्रियों को सेवा में बाधा का सामना न करना पड़े।

 

हरित परिवहन के साथ आर्थिक मजबूती पर सरकार का फोकस

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सार्वजनिक परिवहन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में लोग बसों के माध्यम से कामकाज, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार पर्यावरण संरक्षण के साथ परिवहन सुविधाओं को आधुनिक बनाने का अवसर भी प्रदान करता है। सरकार और निगम की मौजूदा रणनीति के तीन प्रमुख पहलू हैं—डीजल खर्च में बचत, बसों से आय बढ़ाना और चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार। इन तीनों मोर्चों पर योजनाबद्ध तरीके से काम होने पर निगम के संचालन को अधिक कुशल बनाया जा सकता है।