भारतीय रिजर्व बैंक के नए निर्देश के बाद बैंकों की कमाई पर असर पड़ सकता है. बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों के अनुसार, ग्राहकों को भेजे जाने वाले कुछ SMS अलर्ट पर शुल्क वसूलने पर रोक लगने से बड़े बैंकों की सालाना फीस आय में करीब 300 करोड़ रुपये तक की कमी आ सकती है. हालांकि, इससे ग्राहकों को राहत मिलेगी क्योंकि अब उन्हें ऐसे SMS के लिए अलग से भुगतान नहीं करना होगा.

RBI ने 24 जून को जारी अपने निर्देश में कहा था कि बैंक नियमों के पालन , जागरूकता और प्रचार से जुड़े SMS अलर्ट के लिए ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं ले सकते. अब तक अधिकांश बैंक इन संदेशों की लागत निकालने के लिए ग्राहकों से हर तिमाही 15 से 18 रुपये तक SMS शुल्क वसूलते थे.

500 रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर SMS भेजना अब वैकल्पिक

RBI ने बैंकों को यह भी छूट दी है कि 500 रुपये या उससे कम के लेनदेन पर SMS अलर्ट भेजना अब अनिवार्य नहीं रहेगा. यानी बैंक चाहें तो ऐसे छोटे ट्रांजैक्शन के लिए SMS की जगह अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

हालांकि, HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे बड़े निजी बैंक फिलहाल इस सुविधा को जारी रख सकते हैं. इन बैंकों का मानना है कि तुरंत SMS अलर्ट ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाते हैं और धोखाधड़ी की आशंका कम करने में भी मददगार होते हैं.

दूसरे शुल्क बढ़ाकर निकाल सकते हैं खर्च

विशेषज्ञों का कहना है कि अब बैंक SMS का खर्च सीधे ग्राहकों से नहीं वसूल पाएंगे. ऐसे में वे इसकी भरपाई अन्य शुल्कों के जरिए कर सकते हैं. इसमें अकाउंट मेंटेनेंस चार्ज, न्यूनतम बैलेंस से जुड़े शुल्क या अन्य बैंकिंग फीस शामिल हो सकती हैं.

एक अनुमान के मुताबिक, यदि किसी बड़े बैंक के करीब 5 करोड़ शुल्क देने वाले ग्राहक हैं, तो SMS शुल्क बंद होने से उसे सालाना लगभग 360 करोड़ रुपये की आय का नुकसान हो सकता है.

टेलीकॉम कंपनियों पर भी पड़ेगा असर

RBI के फैसले का असर केवल बैंकों तक सीमित नहीं रहेगा. भारत में हर महीने 60 से 80 अरब कमर्शियल SMS भेजे जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या छोटे मूल्य के ट्रांजैक्शन से जुड़ी होती है. यदि बैंक 500 रुपये तक के लेनदेन पर SMS भेजना कम कर देते हैं तो टेलीकॉम कंपनियों के SMS कारोबार में भी गिरावट आ सकती है.

RBI ने बैंकों को Google RCS, WhatsApp, इनऐप अलर्ट और मोबाइल पुश नोटिफिकेशन जैसे डिजिटल विकल्पों को भी मान्य माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दी है. आने वाले समय में बैंक ग्राहकों तक जानकारी पहुंचाने के लिए इन प्लेटफॉर्म का अधिक उपयोग कर सकते हैं.