पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में अब एक नया और गंभीर कानूनी विवाद सामने आ गया है, जिसने पूरे मामले की जटिलता को और बढ़ा दिया है। मामले में आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल को एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव द्वारा ₹10 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस उन सार्वजनिक बयानों के आधार पर जारी किया गया है, जिनमें साहिल गोयल ने वकील श्रीवास्तव की भूमिका और उनकी नियुक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

जानकारी के अनुसार, साहिल गोयल ने सार्वजनिक इंटरव्यू और बयानों में दावा किया था कि उनके परिवार ने एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव को सिया गोयल का वकील नियुक्त नहीं किया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वकील ने कथित रूप से दस्तावेजों या वकालतनामा पर हस्ताक्षर को लेकर परिवार को गुमराह किया या दबाव बनाया। इन बयानों को लेकर अब एडवोकेट श्रीवास्तव ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे पूरी तरह से झूठा और उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है।

VIDEO | Pune: Siya Goyal’s lawyer, Ashotush Srivastava, slaps Rs 10 crore defamation notice on her brother in Ketan Agarwal murder case.

He says, “We have sent a Rs 10 crore defamation notice to Sahil Goyal. We did this because we heard a statement from him where he is stating… pic.twitter.com/guACw4Twma

— Press Trust of India June 30, 2026

मानहानि नोटिस में एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने साहिल गोयल से इन सभी आरोपों को तत्काल वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, भविष्य में ऐसे किसी भी बयान से बचने की लिखित गारंटी देने और ₹10 करोड़ के हर्जाने का भुगतान करने की मांग भी की है। वकील का कहना है कि इन बयानों से उनकी पेशेवर छवि को गंभीर क्षति पहुंची है और यह कानूनी कार्रवाई उसी के जवाब में की गई है।

इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र यह सवाल बन गया है कि आखिर सिया गोयल की कानूनी पैरवी कौन कर रहा है। एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव का दावा है कि सिया गोयल ने स्वयं उन्हें अपना वकील नियुक्त किया है और उन्होंने विधिवत वकालतनामा पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे वह कानूनी रूप से उनकी ओर से अदालत में पेश हो रहे हैं। दूसरी ओर, सिया गोयल के परिवार का पक्ष रखने वाले साहिल गोयल का दावा है कि परिवार ने उन्हें इस मामले में वकील नियुक्त नहीं किया है और पहले से ही किसी अन्य वकील को नियुक्त किया गया था। परिवार का आरोप है कि श्रीवास्तव की भूमिका इस मामले में वैध नहीं है।

यह विवाद अब केवल मानहानि तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने हत्या मामले के भीतर ही एक समानांतर कानूनी संघर्ष का रूप ले लिया है। एक ही आरोपी के लिए दो अलगअलग वकीलों द्वारा प्रतिनिधित्व का दावा किए जाने से मामले की कानूनी स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। इससे न केवल अदालत में प्रतिनिधित्व को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है, बल्कि पूरे केस की कार्यवाही और सार्वजनिक धारणा पर भी इसका असर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि केतन अग्रवाल की हत्या का मामला पुणे के लोणावाला स्थित लोहगढ़ किले से जुड़ा है, जहां 18 जून को घटना के दौरान उन्हें कथित रूप से धक्का देकर गिराने की बात सामने आई थी। इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी आरोपी बनाए गए हैं और पुलिस द्वारा मामले की जांच और घटनाक्रम की पुनर्निर्माण प्रक्रिया जारी है।

इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल हत्या मामले की संवेदनशीलता को बढ़ा दिया है, बल्कि वकील और आरोपी परिवार के बीच चल रहे टकराव को भी सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब यह मामला कानूनी बहस के साथसाथ प्रतिनिधित्व और प्रतिष्ठा के संघर्ष के रूप में भी सामने आ रहा है, जिसका प्रभाव आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण रूप से पड़ सकता है।